बीत गये 30 साल, नहीं बना डंपिंग जोन

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उपेक्षा . शहरी क्षेत्र में कचरा प्रबंधन के लिए नहीं बनी कोई ठोस योजना नक्सल प्रभावित और जातीय संघर्ष से ग्रस्त रहे जहानाबाद को जिला बने 30 साल हो गये लेकिन शहरवासियों को गंदगी के माहौल से निजात दिलाने के लिए अबतक कचरा प्रबंधन की कोई ठोस योजना नहीं बनी. इतने वर्ष व्यतीत होने के […]

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उपेक्षा . शहरी क्षेत्र में कचरा प्रबंधन के लिए नहीं बनी कोई ठोस योजना

नक्सल प्रभावित और जातीय संघर्ष से ग्रस्त रहे जहानाबाद को जिला बने 30 साल हो गये लेकिन शहरवासियों को गंदगी के माहौल से निजात दिलाने के लिए अबतक कचरा प्रबंधन की कोई ठोस योजना नहीं बनी. इतने वर्ष व्यतीत होने के बावजूद भी पूर्व के नगरपालिका और वर्तमान में नगर पर्षद के द्वारा कूड़े-कचरे रखे जाने के लिए एक डंपिंग जोन का निर्माण तक नहीं कराया गया. फिलहाल शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों पर फेंके जाने वाले कचरे को नगर पर्षद के सफाई कर्मी घोसी मोड़ के समीप फेंक रहे हैं.
जहानाबाद : शहर के कई प्रमुख स्थान ऐसे हैं जहां वर्तमान समय में विभिन्न मोहल्ले की गंदगी फेंकी जाती है. इसमें एनएच 83 के अलावा सदर अस्पताल परिसर और अमर शहीद जगदेव प्रसाद सदर अस्पताल का दक्षिणी गेट भी शामिल है. इसके अलावा ऊंटा मोड़ स्थित नाका नंबर एक, फीदाहुसैन मोड़, अरवल मोड़, मलहचक मोड़, पुरानी अस्पताल रोड, और तो और नगर पर्षद कार्यालय से सटे दक्षिण मेन रोड पर कूड़े का ढेर लगाया जाता है.
यह अलग बात है कि उक्त स्थानों पर जब भारी मात्रा में कूड़े-कचरे का ढेर जमा हो जाता है और दुर्गन्ध से लोगों का जीना मुहाल हो जाता है तो हंगामा से बचने के लिए सफाई कर्मी ट्रैक्टर से कचरे का उठाव करते हैं. फिर उसे घोसी मोड़ या नदी में गिरा दी जाती है.
जिला पर्षद से लीज पर ली गयी जमीन पर फेंकी जा रही है शहर की गंदगी : जब शहर के गली माहल्ले में कचरे का ढेर लग जाता था तो उसे पहले दरधा नदी में ले जाकर फेंका जाता था. कुछ माह पूर्व से यहां एक नयी व्यवस्था की गयी कि कूड़े -कचरे को शहर से दूर फेंका जाये. इस उद्देश्य के तहत नगर परिषद के द्वारा जिला पर्षद की जमीन लीज पर ली गयी, जो फिलहाल घोसी मोड़ के पास है. इसी जमीन पर पूरे शहर की गंदगी फेंकी जा रही है.
नगर परिषद के सफाई कर्मी ट्रैक्टर से वहां कचरा ले जाते हैं. अब तो वहां कूड़े का पहाड़ हो गया है. उक्त मोड़ डंपिंग जोन में तब्दील है. हाल यह है कि उक्त इलाके में दुर्गंध फैलती है. गोरक्षणी मोहल्ले के लोगों के अलावा उक्त राह से प्रतिदिन हजारों की संख्या में पैदल यात्री और वाहन सवार उधर से गुजरते वक्त अपनी मुंह-नाक को ढक कर निकलते हैं. वहीं आसपास के लोगों का जीना भी मुहाल हो गया है. इस स्थान पर कूड़ा फेंके जाने का स्थानीय लोगों ने विरोध भी किया था.
सदर अस्पताल परिसर और अस्पताल के दक्षिणी गेट पर भी फेंका जाता है कचरा: वैसे तो शहर के कई प्रमुख स्थान ऐसे हैं जहां प्रतिदिन कूड़ा-कचरा फेंका जाता है. बाद में उसे उठाकर घोसी मोड़ पर ले जाया जाता है. लेकिन गंभीर बात यह है कि सदर अस्पताल परिसर में भी भारी मात्रा में कचरा फेंका जाता है.
अस्पताल परिसर में जिस स्थान पर गंदगी फेंकी जाती है, उसके बगल में ही ओपीडी, महिला प्रसूति वार्ड और नवजात बच्चों के विशेष देखभाल के लिए बनाये गये एसएनसीयू संचालित हैं. लेकिन यहां पर गंदगी फेंके जाने से मरीज और उनके परिजनों को दुर्गंध से भारी परेशानी होती है. उक्त परिसर में आसपास के लोगों के द्वारा भी गंदगी लाकर फेंक दी जाती है. साथ ही अस्पताल में आये मरीजों के द्वारा भी वहां गंदगी फैलायी जाती है . इतना हीं नहीं अस्पताल दक्षिणी गेट पर एनएच 83 के किनारे होटल संचालकों के अलावा नया टोला मोहल्ले के लोगों के द्वारा भी भारी मात्रा में कुड़ा-कचरा फेंका जाता है.
डंपिंग जोन में तब्दील घोसी मोड़ से गुजरना हुआ दुश्वार नागरिक भी हैं जिम्मेवार
शहर की मुख्य सड़कों और गली-मोहल्लों को गंदा करने में नागरिक भी कम जिम्मेवार नहीं है. नगर परिषद के द्वारा कई प्रमुख स्थानों पर कचरा फेंकने के लिए बड़े-बड़े प्लास्टिक व लोहे के डस्टबीन रखे गये हैं. लेकिन समझ के अभाव में कई लोग डस्टबीन के बजाय बीच सड़क पर ही घरों का कूड़ा फेंक देते हैं. इस बात पर यदि थोड़ी सी चिंतन की जाये तो शहर काफी हद तक साफ-सुथरा दिखेगा. और कूड़े का जमाव होने पर नगर पर्षद के द्वारा घोसी मोड़ पर बनाये गये अस्थायी डंपिंग जोन में ले जाकर फेंका जायेगा.
क्या कहते हैं अधिकारी
डंपिंग जोन बनाने के लिए पूर्व में निविदा निकाली गयी थी. शहर से पांच किलोमीटर के भीतर जमीन उपलब्ध कराने के लिए निविदा निकाले जाने के बाद किसी भी व्यक्ति ने इसमें रुचि नहीं ली फिर से शीघ्र ही निविदा निकाला जायेगा. फिलहाल जिला परिषद से लीज पर ली गयी जमीन पर कूड़े का जमाव किया जा रहा है.
नगर परिषद के आंतरिक संसाधनों के माध्यम से डंपिंग जोन बनाने की दिशा में कार्रवाई की जायेगी. जरूरत पड़ने पर विभाग के पास आवंटन के लिए पत्राचार किया जायेगा
संजीव कुमार, कार्यपालक पदाधिकारी नगर परिषद
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