वार्ड के 25 फीसदी घरों में नहीं बना है शौचालय

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जहानाबाद : नगर पर्षद क्षेत्र के सभी 33 वार्डों को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) बनाने की प्रशासनिक मुहिम तेज हो गयी है. इसके लिए पर्षद के कर्मियों द्वारा सभी वार्डों में सर्वेक्षण कराने के बाद शौचालय विहीन घरों में टॉयलेट बनाने की धूम मची है. चार हजार वैसे लोगों ने आवेदन दिया है […]

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जहानाबाद : नगर पर्षद क्षेत्र के सभी 33 वार्डों को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) बनाने की प्रशासनिक मुहिम तेज हो गयी है. इसके लिए पर्षद के कर्मियों द्वारा सभी वार्डों में सर्वेक्षण कराने के बाद शौचालय विहीन घरों में टॉयलेट बनाने की धूम मची है. चार हजार वैसे लोगों ने आवेदन दिया है जिनके घरों में शौचालय नहीं है और वह खुले में शौच करने को बाध्य हैं. दो हजार शौचालय बनाने की योजना लगभग पूरी हो गयी है और इसके बाद दिये गये आवेदन के आलोक में चयनित अन्य दो हजार लोगों के घरों में निर्माण कार्य की स्वीकृति दी जा रही है.

सरकार के स्वच्छता और प्रशासन द्वारा चलाये जा रहे जागरूकता अभियान का ही असर है कि लोग अब खुले में शौच करना नहीं चाहते. यहां उल्लेखनीय है कि नगर पर्षद क्षेत्र में कई वार्ड ऐसे हैं जो शहर के हटकर ग्रामीण इलाके में आते हैं. यथा वभना, महम्मदपुर, लालसेबिगहा, बैरागीबाग, धनगावां वैसे तो नगर पर्षद क्षेत्र में है, लेकिन इसकी संरचना गांव जैसी है. इन गांवों के अलावा विभिन्न वार्डों में बड़ी संख्या में महादलित वर्ग के लोग निवास करते हैं.

जिनके घरों में शौचालय नहीं रहने से उनके घर के महिला-पुरुष खुले में शौच करने जाते हैं. महिलाओं को नित्य क्रिया से निबटने के लिए अहले सुबह या देर शाम अंधेरा होने पर घरों से निकलना पड़ता है. इस बीच सरकार के आदेश के आलोक में नगर पर्षद प्रशासन ने सभी वार्डों में सर्वेक्षण कराया तो स्पष्ट हुआ कि बड़ी संख्या में लोग खुले में शौच करने को विवश हैं.

नप क्षेत्र में 16500 घरों की है संख्या: जहानाबाद नगर पर्षद क्षेत्र का दायरा बढ़ा और वार्डों की संख्या 33 हो गयी. प्राप्त जानकारी के अनुसार इन वार्डों में नगर पर्षद की पंजी के अनुसार घरों की संख्या 16500 है. जिसमें अब तक के सर्वेक्षण में पता चला है कि चार हजार घरों के लोग शौचालय विहीन हैं जिन्होंने आवेदन दिया है. इस तरह कुल घरों में 25 फीसदी घर ऐसे हैं जहां शौचालय निर्माण कराकर नगर पर्षद क्षेत्र को ओडीएफ बनाया जा सकता है. हालांकि ये आंकड़े अब तक के हैं. इसके अलावा भी अन्य कई घरों में शौचालय नहीं रहने की जानकारी मिल रही है.
वार्ड पार्षदों से भी मांगी गयी है सूची: वार्डों को ओडीएफ बनाने के लिए नगर पार्षदों द्वारा भी अहम भूमिका निभायी जा रही है. सर्वेक्षण के लिए लगाये गये कर्मियों के अलावा नगर पार्षद भी इस महत्वपूर्ण अभियान में तन-मन से लग गया है. अपने-अपने वार्ड के वैसे लोगों की सूची उपलब्ध करा रहे हैं जिनके घर में शौचालय नहीं है. बताया गया है कि सर्वेक्षण कर्मियों और नगर पार्षदों द्वारा दी गयी सूची का निर्माण कर फाइनल लिस्ट तैयार की जाती है और फिर निर्माण की स्वीकृति दी जाती है.
दो किस्तों में लाभार्थियों के खाते में दी जाती है राशि
नगर पर्षद के कार्यपालक पदाधिकारी संजीव कुमार ने बताया कि एक शौचालय निर्माण मद में 12 हजार रुपये दिये जाते हैं. राशि का भुगतान दो किस्तों में किया जाता है. संबंधित लाभार्थी के खाते में पहली किस्त के रूप में साढ़े सात हजार रुपये देने का प्रावधान है. शौचालय का निर्माण पूरा होने पर उसकी फोटोग्राफी करायी जाती है और जांचों काम दूसरी किस्त की राशि साढ़े हजार रुपये का भुगतान भी खाते के माध्यम से किया जाता है.
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