कुश्ती प्रतियोगिता में पहलवानों ने दिखाया दम

Updated at :05 Feb 2025 9:24 PM
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कुश्ती प्रतियोगिता में पहलवानों ने दिखाया दम

प्रखंड क्षेत्र के मंजोष गांव में सरस्वती पूजा उत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है. चार दिवसीय सरस्वती महोत्सव के दौरान मंजोष गांव में लगातार कार्यक्रमों की धूम मची है.

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सिकंदरा. प्रखंड क्षेत्र के मंजोष गांव में सरस्वती पूजा उत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है. चार दिवसीय सरस्वती महोत्सव के दौरान मंजोष गांव में लगातार कार्यक्रमों की धूम मची है. सरस्वती पूजा महोत्सव के पहले दिन सोमवार की रात स्थानीय कलाकार बिट्टू सिंह दीवाना के द्वारा लोकगीत का कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया. वहीं महोत्सव के दूसरे दिन मंगलवार की रात भक्ति जागरण की प्रस्तुति की गई. बुधवार को माघ सप्तमी के अवसर पर मंजोष गांव स्थित प्रसिद्ध सरस्वती मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. मेला के दौरान पारंपरिक कुश्ती का आयोजन किया गया. वहीं बिहार के पूर्व प्रधान आयकर आयुक्त संतोष कुमार पासवान के द्वारा कुश्ती प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया गया. इस अवसर पर विद्या की अधिष्ठात्री देवी माँ शारदे के दर्शन को लेकर दिन भर भक्तों की कतार लगी रही. वहीं सरस्वती मंदिर के समक्ष दर्जनों बच्चों का मुंडन संस्कार संपन्न किया गया. बताते चलें कि मंजोष स्थित सरस्वती मंदिर में बच्चों के मुंडन संस्कार की परंपरा लंबे अर्से से चली आ रही है. मान्यता है की संतान प्राप्ति की मन्नत मांगने के बाद माता सरस्वती की कृपा से जिनकी गोद भरती है वे यहां आकर अपने बच्चों का मुंडन कराते हैं. प्रखंड क्षेत्र के मंजोष में स्थापित माता सरस्वती काफी यशस्वी मानी जाती है. ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद मां सरस्वती पूरा करती है. मां के समक्ष मांगी मुराद पूरा होने के उपरांत एक व्यक्ति या एक परिवार के द्वारा ही मां की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जाती है. प्रतिमा की स्थापना करने वाला व्यक्ति ही प्रतिमा की स्थापना से लेकर पूजा पाठ व साज सज्जा का सारा खर्च वहन करता है. मंजोष गांव में सरस्वती पूजा का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है. कालांतर में मंजोष गांव में आयोजित सरस्वती पूजा का स्वरूप वृहत आकर लेता चला गया. वसंत पंचमी से चार दिवसीय सरस्वती पूजा महोत्सव की शुरुआत हुई. सरस्वती पूजा के तीसरे दिन माघ सप्तमी के पावन अवसर पर बुधवार को भव्य मेला का आयोजन किया गया. मेले में बच्चों के मनोरंजन के लिये तारामंची, ब्रेक डांस, नाव झूला समेत कई तरह के झूले व खेल तमाशे लगाए गए थे. वहीं मेला के दौरान अखाड़ा का भी आयोजन किया गया. जिसमें स्थानीय पहलवानों ने अपने दाव पेंच का कौशल दिखलाया. प्रतियोगिता में कनीय, मध्यम एवं वरीय वर्ग में प्रतियोगियों ने भाग लिया. प्रतियोगिता के विजयी प्रतिभागियों को बिहार के पूर्व प्रधान आयकर आयुक्त संतोष कुमार पासवान एवं गांव के गणमान्य लोगों के द्वारा पुरस्कार के रूप में प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया गया. इस अवसर पर संतोष कुमार पासवान ने कहा कि ऐसे कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन गांव स्तर पर होना चाहिए. आयोजनकर्ताओं की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि सरस्वती पूजा के अवसर पर इस गांव में कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन सौ वर्षों से अधिक समय से किया जा रहा है. ऐसे खेल आयोजन अन्य गांव, पंचायत, प्रखंड एवं जिला स्तर पर किए जाने की आवश्यकता है. ऐसे आयोजन से शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य का विकास होता है. साथ ही बच्चों एवं युवाओं के बीच खेल भावना का विकास होता है, जिससे उन्हें जीवन में सकारात्मकता के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है. इस अवसर पर सुरेंद्र सिंह, मुखिया प्रतिनिधि राणा रणवीर सिंह, जयप्रकाश पासवान, विजय सिंह, अशोक सिंह आदि ने खिलाड़ियों को प्रोत्साहित किया.

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