खुशियों की फुहार और ज्ञान का संसार है रेडियो : प्रो गौरी शंकर

Published at :13 Feb 2025 10:00 PM (IST)
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खुशियों की फुहार और ज्ञान का संसार है रेडियो : प्रो गौरी शंकर

रेडियो संबोधन कार्यक्रम मन की बात जनता से संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच

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जमुई. विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर केकेएम कॉलेज में वर्तमान परिप्रेक्ष्य में रेडियो का महत्व विषय पर एक परिचर्चा हुई. इसकी अध्यक्षता डॉ देवेंद्र कुमार गोयल ने की. मुख्य वक्ता के बतौर डॉ (प्रो) गौरी शंकर पासवान ने रेडियो के महत्व पर कहा कि रेडियो खुशियों की फुहार और ज्ञान का संसार है. यह मनोरंजन तथा शिक्षा का माध्यम है. सूचना का सच्चा साथी है. रेडियो संवाद का अटूट सेतु है. इस दिवस का उद्देश्य सूचना का आदान प्रदान करना, इसका इस्तेमाल करना और जागरूकता लाना है. हर वर्ष 13 फरवरी को रेडियो दिवस मनाया जाता है. 2011 में यूनेस्को के सदस्य देशों द्वारा पहली बार इसकी घोषणा की गयी थी. भारत में रेडियो प्रसारण 1922 में हुआ था. इटली के जी मारकोनी ने 1890 के दशक में इसका आविष्कार किया था. उन्होंने कहा कि मोबाइल और संचार क्रांति के कारण रेडियो को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. नकारात्मक और सकारात्मक दोनों प्रभाव पड़ रहा है. पहले जैसा हर हाथ में रेडियो नहीं दिखता है. यदि दिखता है, तो सिर्फ मोबाइल. फिर भी भारत में रेडियो का विस्तार निरंतर जारी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आयोजित रेडियो संबोधन मन की बात कार्यक्रम रेडियो के प्रसार और महत्व को बढ़ावा दे रहा है. पीएम के मन की बात जनता से संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच है, जो रेडियो द्वारा ही प्रसारित होता है. रेडियो पर ”””” मन की बात”””” कार्यक्रम हर महीने के अंतिम रविवार को प्रसारित होता है. अब तक मन की बात में 118 एपिसोड प्रसारित हो चुका है.

आज भी बनी हुई है रेडियो की प्रासंगिकता

प्रो कैलाश पंडित ने कहा कि रेडियो लाभकारी साधन है. आज भी इसकी प्रासंगिकता बनी हुई है. वर्तमान में भी देश-दुनिया के लिए रेडियो की उपादेयता है. रेडियो पर मन की बात से सरकारी योजनाओं की जानकारी मिलती है. आम आदमी के विचारों और सुझावों को शामिल कर योजनाओं को बेहतर बनाया जाता है. आज की दौर में टीवी, इंटरनेट और सोशल मीडिया के विस्तार से रेडियो स्रोतों की संख्या में कमी आई है, तो दूसरी ओर डिजिटल रेडियो और इंटरनेट रेडियो ने खुद को नए रूप में ढाल लिया है, और डिजिटल माध्यमों के साथ ताल मेल बैठाकर अपनी प्रासंगिकता बनाये रखा है. हाल ही में देश के 500वें सामुदायिक रेडियो स्टेशन एफएम का उद्घाटन मिजोरम में किया गया है.

अध्यक्ष प्रबोधन में डॉ देवेंद्र कुमार गोयल ने कहा कि रेडियो के महत्व को नकारा नहीं जा सकता है. पहले गांव में हर किसान और जवान के हाथों में रेडियो हुआ करता था, आज इसमें कमी जरूर आयी है, जो भी हो आज भारत में सैकड़ों एफएम ऑनलाइन रेडियो स्टेशन हैं, जो सूचना, शिक्षा और मनोरंजन के महत्वपूर्ण स्रोत हैं. 1977 में पहला एफएम रेडियो स्टेशन चेन्नई में प्रारंभ हुआ था.

बिना चेहरे का मित्र है रेडियो

प्रो सरदार राय ने कहा कि रेडियो एक ऐसा यंत्र है, जो बिना तार के संचारित होता है. रेडियो को बेतारकातार (वायरलेस टेलीग्राफी) भी कहा जाता है. इसके लिए न तो इलेक्ट्रिक की जरूरत है, और ना तो पेट्रोल-डीजल की. यह सूचना, संवाद और मनोरंजन का बहुत ही सरल और उत्तम साधन है. हालांकि विज्ञान और संचार क्रांति की वजह से आने वाला समय रेडियो विहीन हो सकता है. रवीश कुमार सिंह ने कहा कि रेडियो देश और समाज के लिए बहुत हितकारी स्रोत है. यह बिना चेहरे का मित्र है, जो अपने मित्र से बात करता है. देश दुनिया की खबरें लाता है. मौसम की हर चाल बताता है. भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की रेडियो पर मन की बात रेडियो के महत्व और लाभ को को दर्शाता है. मौके पर सुशील कुमार, कृष्णागिरी, शैलेश कुमार सिंह, बालेश्वर यादव, रामचरितमानस, निरंजन सिंह तथा काफी संख्या में छात्र उपस्थित थे.

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