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मलयपुर की बेटी निशु सिंह ने पर्वत दिवस पर पर्वतों के संरक्षण का दिया संदेश

Updated at : 10 Dec 2025 6:16 PM (IST)
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मलयपुर की बेटी निशु सिंह ने पर्वत दिवस पर पर्वतों के संरक्षण का दिया संदेश

देशभर की 45 पर्वत चोटियों पर चढ़ाई कर चुकी हैं,

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बरहट. अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस के अवसर पर जमुई जिले के मलयपुर गांव से निकलकर विश्व की ऊंची चोटियों पर तिरंगा फहरा चुकी पर्वतारोही निशु सिंह ने पर्वतों के महत्व और पर्वतारोहण की कठिनाइयों पर अपनी गहरी बात रखी. उन्होंने कहा कि पर्वत केवल रोमांच का स्रोत नहीं बल्कि मानव जीवन पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व की आधारशिला हैं.निशु सिंह ने एक छोटे से ग्रामीण परिवेश से यात्रा शुरू की और आज माउंट एवरेस्ट, माउंट किलिमंजारो से लेकर कांग यात्से जैसी श्रृंखलाओं को पार कर चुकी हैं. वे बताती हैं कि पर्वतारोहण कोई सामान्य खेल नहीं बल्कि लगातार बदलते मौसम, गिरती बर्फ, एवलांच, अदृश्य कोर्निश और ऊँचाई पर ऑक्सीजन की कमी जैसी कठिनाइयों से जूझने का नाम है. फिर भी इन चुनौतियों के बीच जब शिखर पर भारत का तिरंगा फहराता है तो सारी थकान और भय छोटी बात लगते हैं.हाल ही में उन्होंने लेह-लद्दाख की दो प्रमुख चोटियों कांग यात्से-1 (21,063 फीट) और कांग यात्से-2 (21,590 फीट)पर लगातार चढ़ाई कर नया कीर्तिमान स्थापित किया. इससे पूर्व वे 2024 में माउंट एवरेस्ट के 26,200 फीट तथा 2021 में अफ्रीका की सबसे ऊँची चोटी माउंट किलिमंजारो पर भी भारत का तिरंगा फहरा चुकी हैं. अब तक वे देशभर की 45 पर्वत चोटियों पर चढ़ाई कर चुकी हैं, जो एक युवा महिला पर्वतारोही के लिए बड़ी उपलब्धि है.निशु मानती हैं कि पर्वत मानव जीवन के लिए उतने ही आवश्यक हैं, जितना जल और वायु. पर्वत जलवायु संतुलन, ग्लेशियरों के संरक्षण, नदियों के उद्गम और जैव विविधता की सुरक्षा में अनोखी भूमिका निभाते हैं. अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस जो प्रत्येक वर्ष 11 दिसंबर को मनाया जाता है.हमें वैश्विक स्तर पर यह समझाने का प्रयास है कि पर्वतीय क्षेत्रों की रक्षा, विकास और वहाँ रहने वाले लोगों के जीवन में सुधार कितना महत्वपूर्ण है.वहीं पर्वतारोहण के क्षेत्र में लम्बे अनुभव के बाद अब निशु सिंह नई पीढ़ी को प्रशिक्षित कर रही हैं. वे बच्चों को पर्वतों की तकनीकी समझ, पर्यावरण संरक्षण और साहस की शिक्षा देती हैं, ताकि उनका जिला और देश भविष्य में भी बेहतर पर्वतारोही और प्रकृति-रक्षक तैयार कर सके. वे उत्तराखंड, हिमाचल, लद्दाख से लेकर सिक्किम तक कई अभियानों में सक्रिय भूमिका निभा चुकी हैं और अंतरराष्ट्रीय पर्वत अभियानों का भी हिस्सा रही हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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PANKAJ KUMAR SINGH

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By PANKAJ KUMAR SINGH

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