एक रहेंगे तो नेक रहेंगे - जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज

संविधान की धारा 97 भी आत्मरक्षा में विधर्मी आतातियों का संहार करने की इजाजत देता है.
-देश संविधान से चलेगा शरीयत से नहीं -शरीयत की बात करने वाले सलाखों में हो बंद -जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज सरौन, चकाई हनुमान मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के अवसर पर चकाई प्रखंड के सिमरिया यज्ञ समारोह को संबोधित करते हुए काशी सुमेरु पीठ के जगत गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्र आनंद सरस्वती जी महाराज ने सनातनियों का आह्वान करते हुए कहा कि एक रहेंगे तो नेक रहेंगे. क्षत्रिय, ब्राह्मण, वैश्य और शूद्र एक ही ईश्वर की चार संतानें हैं. हम एक दूसरे के बिना अधूरे हैं. उन्होंने कहा कि सनातन धर्म का सबसे प्राचीन परंपरा कुंभ का आयोजन है, जो सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है. हमारे धर्म में भेदभाव और छुआछूत के लिए कोई जगह नहीं है. उन्होंने सनातनियों को सावधान करते हुए कहा कि आज भेष बदलकर लोग आ रहे हैं और हमारी बेटियों को भ्रमित कर जिहाद का शिकार बना रहे हैं. अकेले झारखंड में तीन लाख बेटियों का धर्मांतरण कराया गया. जिसने धर्मांतरण नहीं किया उस बेटी की हत्या करके उसकी जमीन को हड़पने का काम यह जिहादी तत्व के लोग कर रहे हैं. सीमावर्ती इलाकों की डेमोग्राफी को एक साजिश के तहत बदला जा रहा है. इनके षड्यंत्र से हमें सावधान रहना होगा. उन्होंने बंगाल के मुर्शिदाबाद घटना की निंदा करते हुए कहा कि सरकार को वहां अविलंब राष्ट्रपति शासन लागू करना चाहिए. मुर्शिदाबाद इन विधर्मियों की प्रयोगशाला है. जिस तरह जम्मू कश्मीर कभी हिंदू बाहुल्य राज्य हुआ करता था, आज वहां हिंदू अल्पसंख्यक हो गये हैं. वही काम आज मुर्शिदाबाद में दोहराया जा रहा है. उन्होंने कहा कि हमारे जितने भी देवी देवता थे, वह अपने हाथों में शास्त्र का धारण किया करते थे. इसलिए अब वक्त आ गया है कि हम भी अपनी बेटियों, बेटों को आत्मरक्षा के लिए शस्त्र उठाने और चलाने का प्रशिक्षण दें. संविधान की धारा 97 भी आत्मरक्षा में विधर्मी आतातियों का संहार करने की इजाजत देता है. नरेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज ने सरकार से अपील करते हुए कहा कि देश को बचाना है तो देश में समान शिक्षा प्रणाली और समान नागरिक संहिता लागू करना ही होगा. यदि ऐसा नहीं किया गया तो ना यह देश बचेगा और नहीं सनातनी बचेंगे. इन विधर्मियों का सबसे पहला शिकार दलित समुदाय के सनातनी ही होते हैं. आज भी मुर्शिदाबाद में जिन दो लोगों की हत्या विधर्मियों ने की है, वह दलित समुदाय से थे. उन्होंने सनातन समर्थकों से कहा कि आप अपने बच्चों को कुछ दें या ना दें नैतिक शिक्षा और धर्म की शिक्षा अवश्य दें. उन्होंने यज्ञ की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कर्म और उपासना यज्ञ का मूल आधार है, जो समाज को एक सूत्र में बांधने का माध्यम भी है. यज्ञ से हम सभी वांछित वस्तुओं की प्राप्ति कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि यज्ञ के आरंभ में स्वाहा प्रवचन में वाह और फिर भंडारे में आह शब्द यज्ञ को सफल बनाती है. उन्होंने सनातनियों से कहा कि आप 108 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें. आपकी सभी समस्याओं एवं संकट का समाधान स्वत मिल जायेगा. हनुमान जी महाराज एकमात्र जीवित देवता इस विश्व में है. उन्होंने कहा कि आज भगवा वेश में कई लोग सनातनियों को गुमराह करने में लगे हैं और उसकी आड़ में धर्मांतरण का खेल भी खेला जा रहा है. हमें इन सबसे अपने देश को बचाना होगा. उन्होंने कहा कि हमारे सनातन धर्म में गुरुकुल की प्रधानता थी, जहां 72 प्रकार की शिक्षाएं बच्चों को निशुल्क मिला करती थी. आज फिर से उसे पुनर्जीवित करने की जरूरत है. मौके पर प्रकाशानंद जी महाराज सहित हजारों लोग मौजूद थे.
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