रात 1-2 बजे तक जलती थी कमरे की लाइट, जैक बोर्ड 10वीं की टॉपर बिटिया इस तरह करती थीं पढ़ाई
Published by : Shambhavi Shivani Updated At : 23 Apr 2026 7:01 PM
वैष्णवी श्री और उनका परिवार
JAC Board 10th Topper: झारखंड के लातेहार जिले की रहने वाली वैष्णवी श्री ने कड़ी मेहनत और अनुशासन के दम पर 10वीं बोर्ड परीक्षा में दूसरा स्थान हासिल कर अपने परिवार और जिले का नाम रोशन किया है. अब उनका सपना डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करने का है. प्रभात खबर से खास बातचीत में उन्होंने एग्जाम स्ट्रैटजी और फ्यूचर गोल पर बात की.
JAC Board 10th Topper: झारखंड बोर्ड ने 10वीं कक्षा की परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया है. लातेहार जिले की रहने वाली वैष्णवी श्री ने दूसरा स्थान हासिल किया है. उनकी इस उपलब्धि पर माता-पिता से लेकर गांव और जिले के लोग भी गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं. रिजल्ट आने के बाद से वैष्णवी के घर पर लोगों का आना-जाना है. वैष्णवी के पिता बेटी की इस उपलब्धि पर काफी खुश हैं.
शुरू से था बोर्ड परीक्षा में टॉप करने का लक्ष्य
वैष्णवी श्री की पढ़ाई इंदिरा गांधी बालिका हाई स्कूल हजारीबाग से हुई है. उनके पिता सरकारी स्कूल के शिक्षक और मां हाउस वाइफ हैं. भाई बहनों में सबसे बड़ी वैष्णवी अपनी पढ़ाई को लेकर काफी सीरियस थीं. उन्होंने 10वीं में एडमिशन लेने के साथ ही सोचा था कि बोर्ड परीक्षा में टॉप करना है.
रात-रात भर पढ़ाई करती थीं वैष्णवी
वैष्णवी अपनी पढ़ाई को लेकर हमेशा गंभीर और फोकस्ड रहती थीं. प्रभात खबर से खास बातचीत में उनके पिता बताते हैं कि कई बार वह रात 12-1 बजे तक पढ़ाई करती थीं. उनके कमरे की लाइट 1-2 बजे तक जली रहती थी. हालांकि, वैष्णवी खुद बताती हैं कि उनका पढ़ने का कोई फिक्स टाइम नहीं था. लेकिन वे लगातार मेहनत करती थीं. उनका मानना है कि रोजाना पढ़ाई के साथ डेली रिवीजन सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है.
आगे डॉक्टर बनने का सपना
वैष्णवी के पिता चाहते थे कि बेटी इंजीनियर या सिविल सेवा में जाए. लेकिन वैष्णवी का सपना डॉक्टर बनने का है. परिवार भी अब उनके इस फैसले के साथ खड़ा है और उनके पिता NEET UG की तैयारी के लिए अच्छे कोचिंग में एडमिशन कराने की सोच रहे हैं.
परिवार से मिली हिम्मत
वैष्णवी अपनी सफलता का क्रेडिट अपने माता-पिता और शिक्षकों को देती हैं. उनका कहना है कि परिवार और शिक्षकों के सपोर्ट के बिना यह सफलता संभव नहीं थी. वैष्णवी की यह कहानी दिखाती है कि अगर मेहनत और लगन सच्ची हो, तो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है.
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