जमुई : सात सालों में एक कदम भी नहीं चल पायी दत्तक ग्रहण योजना

Updated at : 02 Jul 2018 2:42 AM (IST)
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जमुई : सात सालों में एक कदम भी नहीं चल पायी दत्तक ग्रहण योजना

जिले में योजना के तहत आज तक एक बच्चे को भी नहीं लिया गया गोद कई लोगों को तो योजना की जानकारी भी नहीं जमुई : राज्य सरकार द्वारा अनाथ बच्चों को संतानहीन माता पिता के द्वारा गोद लेने के लिए आज से सात वर्ष पूर्व शुरू की गयी दत्तक ग्रहण योजना महज कागजी शोभा […]

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जिले में योजना के तहत आज तक एक बच्चे को भी नहीं लिया गया गोद
कई लोगों को तो योजना की जानकारी भी नहीं
जमुई : राज्य सरकार द्वारा अनाथ बच्चों को संतानहीन माता पिता के द्वारा गोद लेने के लिए आज से सात वर्ष पूर्व शुरू की गयी दत्तक ग्रहण योजना महज कागजी शोभा की वस्तु बनकर रह गयी है. जानकारी के अनुसार इस योजना का शुभारंभ राज्य सरकार के द्वारा वर्ष 2011 में किया गया था.
लेकिन आज तक इस योजना के तहत किसी भी नि:संतान दंपती को लाभ नहीं मिल पाया है. यह बहुत बड़े आश्चर्य की बात है कि प्रचार-प्रसार या प्रशासनिक लापरवाही के कारण यह योजना कागजों में सिमट कर रह गयी है. बहुत सारे लोगों को तो यह योजना के बारे में सही तरीके से जानकारी भी नहीं है.
बाल कल्याण समिति जिला बाल संरक्षण इकाई के कर्मियों की मानें तो इस योजना को शुरू होने के बाद से लेकर आज तक किसी भी निसंतान दंपती को इसका लाभ नहीं मिल पाया है.
हालांकि हम लोगों के द्वारा अपने स्तर से इस योजना के समुचित प्रचार-प्रसार के लिए तो कई बार प्रयास किया गया और प्रयास किया भी जाता है. कुछ वर्ष पूर्व दो बच्चे यहां आये थे, जिसे दुर्गेश भवन नालंदा भेज दिया गया. लेकिन उसके बाद उस बच्ची के को गोद लिया गया या नहीं इसके बारे में हम लोगों को कोई जानकारी नहीं है.
नि:संतान दंपती को दिखाये गये छह बच्चों में चुनना पड़ता है कोई एक बच्चा
कोई भी नि:संतान दंपती शून्य से पांच वर्ष के अनाथ बालक-बालिका को इस योजना के तहत गोद ले सकते हैं. बच्चा या बच्ची को गोद लेते समय नि:संतान दंपती को आवेदन पत्र के साथ अपना पहचान पत्र और उनचास हजार रुपया निबंधन शुल्क के रूप में जमा करना पड़ता है.
इसके बाद उनके आवेदन के और आवेदन में दर्ज परिवार की स्थिति की जिला बाल संरक्षण इकाई में कार्यरत समाजसेवी के द्वारा जांच किया जाता है. उनके जांच रिपोर्ट के आधार पर उस आवेदन को दत्तक ग्रहण केंद्र भेजा जाता है. जहां से उनका सूची में नाम आने के बाद उन्हें छह बच्चा दिखाया जाता है, ताकि वह उस छह बच्चा में से किसी एक बच्चे को चुन सके.
बोले सहायक निदेशक
जिला बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक संतोष कुमार ने बताते हैं कि मेरे द्वारा इस योजना का लाभ लोगों को मिल सके. इसके लिए हर संभव स्तर से प्रचार प्रसार किया जा रहा है.
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