नहीं हो रही हुनर की कद्र, प्रशासनिक उदासीनता से मूर्तिकार आहत

Updated:
विज्ञापन

जमुई : कहते हैं भगवान ने दुनिया बनायी है. इंसान को बनाया, पशु पक्षी बनाये, वनस्पति बनायी. सब चीजें भगवान के भरोसे पर टिकी हैं. पर इन सब को बनाने वाले भगवान की प्रतिमा बनाने वाला इंसान भी आज भगवान भरोसे पर ही आ टिका है. चौंकिए मत हम बात कर रहे हैं, मूर्तिकारों की […]

विज्ञापन

जमुई : कहते हैं भगवान ने दुनिया बनायी है. इंसान को बनाया, पशु पक्षी बनाये, वनस्पति बनायी. सब चीजें भगवान के भरोसे पर टिकी हैं. पर इन सब को बनाने वाले भगवान की प्रतिमा बनाने वाला इंसान भी आज भगवान भरोसे पर ही आ टिका है. चौंकिए मत हम बात कर रहे हैं, मूर्तिकारों की जो एक कल्पना मात्र से भगवान के उस रूप के दर्शन करा देते हैं, जिनके किसी ने दर्शन नहीं किये. हम जब भी किसी त्योहार और मेले में जाते हैं तो वहां स्थापित मूर्तियों के स्वरूप को देखकर उसकी तारीफ किये बिना नहीं रह पाते. पर उसे बनाने वाले कारीगरों की बात तक करना हम मुनासिब नहीं समझते. यही वजह है कि अपने हाथों की जादूगरी से मिट्टी के पुतले को जीवंत बना देने वाले कारीगर अपने जीवन और भविष्य को लेकर आशंकित हैं.

सरकारी उदासीनता के कारण जिले के कारीगरों की हालत बिलकुल खस्ताहाल है और उनकी सुधि लेने वाला कोई नहीं. प्रतिभाओं को प्रोत्साहन और उचित मंच उपलब्ध कराने का दावा करने वाली सरकार की हकीकत इससे इतर है. अगर दावों में जरा भी सच्चाई होती तो इन मूर्तिकारों को अपने हुनर से मुंह मोड़ने की इच्छा नहीं होती. सरकार की उपेक्षा के कारण आज कई मूर्तिकार आर्थिक संकट से जूझने को मजबूर हैं. मगर सरकार को इससे कोई सरोकार नहीं. इससे तो यही लगता है प्रतिभाएं दम तोड़ती हैं तो तोड़ दें, मगर सरकार का रवैया बदलने वाला नहीं है.
भगवान होते हैं नाराज तो मिलती है सजा : सुनील आगे बताते हैं कि भगवान कभी-कभी नाराज हो जाये, तो हमारी मेहनत पर पानी फिर जाता है. उन्होंने बताया कि यह काम बेहद बारीक होता है. सबसे अधिक परेशानी तब आती है, जब मूर्ति बनाने का कार्य अंतिम चरण में होता है. थोड़ी सी टूट फूट बड़ा नुकसान करती है. क्योंकि खंडित मूर्ति तो कोई खरीदता नहीं है. ऐसा होने से मेहनताना निकालना भी मुश्किल हो जाता है. और उसके बाद सारा आय-व्यय जोड़कर देखा जाये तो बस 5-7 हजार रुपये की कमाई हो पाती है. जाहिर सी बात है की इतने कम पैसे में किसी भी व्यक्ति के लिए पूरे परिवार का भरण पोषण करना असंभव लगता है. लेकिन प्रशासनिक स्तर से या फिर किसी भी जनप्रतिनिधि द्वारा इन कारीगरों की सुधि लेने वाला कोई नहीं है. और इस बेहतरीन प्रतिभा के धनी ये कारीगर दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं.
पूजा के कारण मूर्ति निर्माण कार्य में आती है तेजी
सरस्वती पूजा नजदीक होने के कारण प्रतिमा निर्माण में तेजी आयी है और दर्जनों मूर्ति कलाकार मूर्ति निर्माण में जुट गये हैं. लेकिन हालत यह है की पूजा के समाप्त हो जाने के बाद पूरे साल इन कारीगरों के सामने भोजन का संकट उत्पन्न हो जाता है. जबकि पूरे जिले में हजारों ऐसे स्थल हैं जहां धूमधाम से सरस्वती पूजा का कार्यक्रम मनाया जाता है और लाखों रुपये सजावट और साउंड पर फूंक दिए जाते हैं. लेकिन ये कारीगर दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं. खैरा निवासी मूर्ति कारीगर दिलीप कुमार बताते हैं की वह पिछले डेढ़-दो महीने से मूर्ति निर्माण में जुटे हुए हैं और दिनरात मेहनत कर रहे हैं तब जाकर सही समय पर मूर्ति तैयार कर उसे सरस्वती पूजा के पहले बेच सकेंगे. दिलीप बताते हैं कि एक मूर्ति निर्माण की अगर बात की जाये और मेहनताना को दरकिनार कर देखा जाये तो तकरीबन तीन सौ से चार सौ तक की लागत आती है और उसकी बिक्री पांच से सात सौ रुपये के बीच होती है. जिससे एक मूर्ति पर औसतन एक से डेढ़ सौ रुपये का फायदा होता है. उन्होंने बताया कि पुरे साल में ऐसे तक़रीबन चालीस से पचास मूर्ति वो बेच पाते हैं जिससे करीब 10 हजार रुपये की कमाई होती है जिससे उन्हें साल भर पुरे परिवार का खर्च उठाना पड़ता है. दिलीप बताते हैं कि मूर्ति बनाना काफी मुश्किल काम है. मूर्तियों को बनाने में कई तरह की बारीकियों पर ध्यान से काम किया जाता है. मूर्तियों की आकृति को धीरे धीरे सांचे में ढालना पड़ता है. जिसमें हमें काफी मेहनत करनी पड़ती है. पर बावजूद इसके हमें हमारा वास्तविक मेहनताना तक नसीब नहीं हो पाता है.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन