स्टेशन पर सुविधा नहीं, सपना बुलेट ट्रेन का

Updated:
विज्ञापन

झाझा : बुलेट ट्रेन में सफर करने की सपना देखने वाले रेल यात्रियों को झाझा स्टेशन पर मौलिक सुविधा तक मसस्सर नहीं हो पा रहा है. इस स्टेशन पर रेल यात्री को अपने मरीजों को स्टेशन और प्लेटफाॅर्म से लाने ले जाने को लेकर पौराणिक व्यवस्था का ही सहारा लेना पड़ रहा है. कुछ ऐसा […]

विज्ञापन

झाझा : बुलेट ट्रेन में सफर करने की सपना देखने वाले रेल यात्रियों को झाझा स्टेशन पर मौलिक सुविधा तक मसस्सर नहीं हो पा रहा है. इस स्टेशन पर रेल यात्री को अपने मरीजों को स्टेशन और प्लेटफाॅर्म से लाने ले जाने को लेकर पौराणिक व्यवस्था का ही सहारा लेना पड़ रहा है. कुछ ऐसा ही नजारा बीते मंगलवार को झाझा स्टेशन पर देखने को मिला. रेल यात्री ट्रेन से अपने मरीज को उतार कर चादर के सहारे ले जाने को मजबूर हो रहे थे. जिसे स्टेशन के पदाधिकारी भी देखकर मूकदर्शक बने हुए थे.

जबकि अन्य यात्री इस व्यवस्था को देखकर विभागीय व्यवस्था को कोस रहे थे. बताते चलें कि पूर्व मध्य रेल दानापुर मंडल स्थित झाझा रेलवे स्टेशन पर फिलवक्त रेलयात्री को मौलिक सुविधा भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. इस कारण इस रेलखंड पर सफर करने वाले रेलवे यात्री भगवान भरोसे ही अपना यात्रा पूरा करते हैं. सबसे आश्चर्य की बात है कि करोड़ों रुपये की राजस्व देने वाला इस स्टेशन को लेकर बीते साल भर में कई वरीय अधिकारी का आना-जाना हुआ है.

अधिकारियों के द्वारा स्टेशन और प्लेटफाॅर्म का जीर्णोद्धार और आधुनिक सुविधा से लैस करने का आश्वासन दिया जाता रहा है. लेकिन अबतक मौलिक सुविधा का भी बहाली इस स्टेशन पर नहीं हो सका है. जिससे निरीह, लाचार, बीमार एवं अन्य जरूरतमंद यात्रियों को काफी फजीहत उठाना पड़ता है.

स्टेशन के पास एक व्हील चेयर और एक स्ट्रैचर की व्यवस्था है. रेलयात्री के द्वारा इसे लेकर मांग किये जाने पर उपलब्ध कराया जाता है. लेकिन उसे चलाने को लेकर मैनपावर की कमी है. उन्होंने बताया कि स्टेशन पर रेलयात्री की सुविधा बहाली को लेकर विभाग के वरीय पदाधिकारी को अवगत कराया गया है.
एमके मिश्रा, स्टेशन प्रबंधक
अंग्रेज जमाने में बना एकमात्र ओवरब्रिज पर होती है आवाजाही , यात्रियों को होती है परेशानी
झाझा प्लेटफाॅर्म पर यात्रियों को प्लेटफाॅर्म से बाहर आने-जाने को लेकर आज भी अंग्रेजों के जमाने में निर्मित एकमात्र ओवरब्रिज के सहारे ही रहना पड़ता है. ओवरब्रिज काफी पुराना व संकरी होने के कारण रेल यात्रियों को परेशानी होता है. प्लेटफाॅर्म पर लाचार, बीमार और बुजुर्ग यात्रियों के लिए किसी भी प्रकार का कोई व्यवस्था नहीं होने से रैंप नहीं बना हुआ है. ऐसे में संकरी पुल से मरीजो को ले जाने में काफी दिक्कत होती है.यदि अप एवं डाउन दोनों प्लेटफॉर्म पर ट्रेन आ जाती है तो आधा घंटा से भी अधिक समय मरीज को स्टेशन से बाहर लाने में लग जाता है.जिसका विपरीत असर मरीज पर पड़ता है.
स्टेशन परिसर में नहीं दिखता है साफ-सफाई
का नजारा
बताते चलें कि अधिकारियों के आने के पूर्व और निश्चित दिन के अलावे झाझा स्टेशन परिसर की स्वच्छता व्यवस्था भी लचर ही दिखता है. अधिकारियों के आगमन के दिन को छोड़ दिया जाये तो स्थानीय पदाधिकारी इसे लेकर उदासीन ही नजर आते हैं. जिसका आलम होता है कि रेलयात्री को यत्र-तत्र फैले गंदगी के बीच ही रहना-पड़ता है. अधिकारियों के आगमन की तिथि घोषित होते ही झाझा प्लेटफाॅर्म की स्वच्छता देखते ही बनता है.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन