अिधकतर घरों में अंधेरा कायम

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हालात. राज्य सरकार के नये आदेश से उत्पन्न हुई समस्या बिजली रहती नहीं, गरीब व मजदूर वर्ग अंधेरे में रात बिताने को मजबूर जमुई : जिले में एक ओर केरोसिन की कालाबाजारी जोरों पर है, तो दूसरी तरफ लोगों को केरोसिन की किल्लत से जूझना पड़ रहा है. राज्य सरकार के नये आदेश के बाद […]

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हालात. राज्य सरकार के नये आदेश से उत्पन्न हुई समस्या

बिजली रहती नहीं, गरीब व मजदूर वर्ग अंधेरे में रात बिताने को मजबूर
जमुई : जिले में एक ओर केरोसिन की कालाबाजारी जोरों पर है, तो दूसरी तरफ लोगों को केरोसिन की किल्लत से जूझना पड़ रहा है. राज्य सरकार के नये आदेश के बाद स्थिति और भी गंभीर हो गयी है. केरोसिन वितरण को लेकर राज्य सरकार के नये आदेश के अनुसार जन वितरण प्रणाली के यहां सिर्फ राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के लाभुक को ही प्रति परिवार दो लीटर केरोसिन मिलेगा, जबकि खाद्य सुरक्षा योजना इतर लाभुकों को ठेला वेंडरों के माध्यम से प्रति परिवार एक लीटर तेल उपलब्ध कराया जायेगा.
ऐसे सरकारी आदेश के अनुसार, नवंबर महीने का केरोसिन नये नियमानुसार वितरण किया जाना है. यही वजह है कि अब तक एपीएल, बीपीएल एवं अंत्योदय कार्डधारियों को केरोसिन नहीं मिल सका है, जबकि दिसंबर का महीना चल रहा है. बगैर केरोसिन के ग्रामीण क्षेत्र के गरीब और मजदूर वर्ग के लोग रात को कैसे रहते होंगे, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है.
जनप्रतिनिधि व राजनीतिक दल भी उदासीन
ठेला वेंडरों के माध्यम से अत्यंत गरीब व मजदूर वर्ग यानी अंत्योदय, बीपीएल परिवारों को केराेसिन देने का निर्देश दिया गया है. ठेला वेंडर की पर्याप्त संख्या नहीं होने की वजह से नवंबर से गरीब व अत्यंत मजदूर वर्ग के लोगों को केरोसिन नहीं मिला है. पर अब तक किसी राजनीतिक दल या जनप्रतिनिधि ने इस मामले को लेकर कोई आवाज नहीं उठाया है. सिर्फ खाद्य सुरक्षा योजना से आच्छादित लाभुकों को ही जन वितरण प्रणाली के द्वारा केरोसिन मिल रहा है. हालांकि जिला प्रशासन ने अपने स्तर से पहल शुरू कर दी है. पर उसके पहल पर कितने दिनों में समस्या का समाधान होगा. यह कहना मुश्किल है.
कहते हैं पदाधिकारी
सरकार का नया आदेश मिलने के बाद पीएचएच परिवारों को ही केरोसिन दिया जा रहा है. इसके अलावे एपीएल परिवारों को ठेला वेंडर के माध्यम से केरोसिन पहुंचाया जा रहा है.
वंदना कुमारी, जिला आपूर्ति पदाधिकारी, जमुई
कहीं नहीं दिखते हैं ठेला वेंडर
विभाग की मानें तो अंत्योदय परिवारों को छोड़ सभी परिवारों को ठेला वेंडरों के माध्यम से केरोसिन उपलब्ध कराया जाना है. नये सरकारी आदेश से स्थानीय जिला आपूर्ति कार्यालय के पसीने छूट रहे हैं. हालांकि जिला आपूर्ति पदाधिकारी की मानें, तो नये आदेश के अनुसार जिले में उपलब्ध ठेला वेंडरों को प्रखंड के साथ लाभुकों को संबद्ध कर दिया गया है. साथ ही राज्य सरकार को पूरी स्थिति अवगत कराते हुए मार्गदर्शन भी मांगा गया है. यह भी उल्लेखनीय है कि पूर्व में राज्य सरकार ने शहरी क्षेत्र में किसी भी वर्ग को केराेसिन उपलब्ध कराने पर रोक लगा दी है. विभागीय आंकड़ों के अनुसार जमुई शहरी क्षेत्र में 16 और झाझा शहरी क्षेत्र में दो ठेला वेंडर कार्यरत है. परंतु वास्तविकता यह है कि जिले में कहीं भी ठेला वेंडर दिखाई नहीं पड़ता है.
बच्चों की पढ़ाई हो रही बाधित
नवंबर से केरोसिन नहीं मिलने की वजह से सबसे अधिक परेशानी गरीब व मजदूर वर्ग को हो रही है. ऐसे लोगों को अंधेरे में रात गुजारना पड़ रहा है. केरोसिन से ऐसे लोग केवल रात में खाना बनाने व अन्य कार्यों के लिए रोशनी के उपयोग के रूप में करते रहे हैं. बल्कि अपने बच्चों को पढ़ाने लिखाने में भी केरोसिन तेल लालटेन व ढिबरी जलाने का काम में आता है.
उल्लेखनीय है कि जिले में करीब ऐसे अंत्योदय, बीपीएल एवं खाद्य सुरक्षा योजना से वंचित कार्डधारकों की संख्या बड़ी संख्या में है. इसमें भी सबसे अधिक परेशानी प्रखंडों में है. यहां ठेला वेंडर नहीं होने की वजह से लाभुकों को अब तक केरोसिन नहीं मिला है.
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