सौभाग्य योग में सावन की पहली सोमवारी आज, मंदिरों में कपाट के बाहर लगी भक्तों की कतार

Author : Prabhat Khabar News Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 26 Jul 2021 6:57 AM

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रविवार से भगवान शिव का प्रिय मास श्रावण मास शुरू हो गया. हालांकि कोरोना के कारण मंदिर व धार्मिक स्थलों को जहां बंद रखा गया है, वहीं घरों में ही पूजा-अर्चना व बोलबम के जयकारे गूंजने लगे हैं.

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पटना. रविवार से भगवान शिव का प्रिय मास श्रावण मास शुरू हो गया. हालांकि कोरोना के कारण मंदिर व धार्मिक स्थलों को जहां बंद रखा गया है, वहीं घरों में ही पूजा-अर्चना व बोलबम के जयकारे गूंजने लगे हैं. सावन के पहले दिन शिव भक्तों ने सीमित संसाधनों में ही भगवान भोलेनाथ को गंगाजल, दूध, दही आदि से स्नान कराकर पुष्प और बेलपत्र अर्पित किया.

सावन कृष्ण पक्ष में द्वितीया के क्षय होने से आज दूसरे दिन ही तृतीया तिथि विद्यमान हो गयी है. इस वर्ष सावन में चार सोमवार का अनूठा संयोग बना है. दो सोमवार कृष्ण पक्ष में तो दो शुक्ल पक्ष में होंगे. एक सोमवार जुलाई में तो तीन सोमवार अगस्त माह में पड़ेगा.

मनोकामना पूर्ति के लिए शिव को यह करें अर्पित

  • पुत्र प्राप्ति के लिए- दूध व घी से अभिषेक तथा धतूरे का फूल

  • दीर्घायु- अकावन की फूल

  • सुख प्राप्ति – हरसिंगार का पुष्प

  • शत्रु नाश – घी व सरसों तेल से अभिषेक तथा कुसुम का फूल

  • सुयोग्य पत्नी – बेला का फूल

  • मोक्ष प्राप्ति – आक, अलसी या समीपत्र

  • लक्ष्मी प्राप्ति – दूध व ईख रस से अभिषेक तथा शंख पुष्प

पूजन से सुहागिनों को मिलेगा अखंड सौभाग्य

भारतीय ज्योतिष विज्ञान परिषद के सदस्य आचार्य पंडित राकेश झा ने कहा कि पहली सोमवारी को धनिष्ठा नक्षत्र व सौभाग्य योग होने से पुण्यकारी योग बन रहा है. इस योग में शिव को दूध, दही, घी, मधु, ईख के रस व गंगाजल आदि से अभिषेक कर फूल, बेलपत्र, भांग, धथूर, समी,अकवन पुष्प आदि से श्रद्धाभाव से पूजा करने से श्रद्धालुओं को आयु, आरोग्य, यश, वैभव का वरदान प्राप्त होगा. वहीं सुहागन स्त्रियों को आज शिव-पार्वती की पूजन से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होगी. इस मौके पर मिथिलावासी अपने घरों में ही पार्थिव पूजन भी करेंगे.

रुद्राभिषेक से शिव हरते कष्ट

वैदिक पंडित विकास पाठक ने बताया कि सावन मास के सोमवारी पर भगवान भोलेनाथ की पूजा में दूध तथा गंगाजल से अभिषेक व बेलपत्र अर्पण करने से श्रद्धालुओं के समस्त दोष समाप्त हो जायेंगे. इसके अलावा असाध्य रोगों से छुटकारा, पितृदोष से मुक्ति और व्यवसाय संबंधित समस्याओं में समाधान मिलेगा. उन्होंने बताया कि महामृत्युंजय मंत्र और गायत्री मंत्र के साथ अभिषेक-पूजन से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं.

दूसरे व चौथे को सिद्धि योग

ज्योतिषी झा ने बताया कि सावन मास की पहली सोमवारी को सौभाग्य योग, वहीं दूसरी व चौथी सोमवारी को सर्वार्थ सिद्धि योग विद्यमान रहेगा. शुक्ल पक्ष में अष्टमी-नवमी एक दिन होने से इस बार सावन 29 दिनों का होगा. सर्वार्थ सिद्धि योग में शुद्ध अंतःकरण से भगवान सदाशिव की आराधना करने से मनचाहा वर मिलता है.

Posted by Ashish Jha

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