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महज छह महीने के अंदर 10 से 20 फीसदी तक बढ़ गये दवाओं के दाम, बैच नंबर बदलकर बढ़ा रहे दवाओं की कीमतें

Updated at : 09 Jan 2021 6:42 AM (IST)
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महज छह महीने के अंदर 10 से 20 फीसदी तक बढ़ गये दवाओं के दाम, बैच नंबर बदलकर बढ़ा रहे दवाओं की कीमतें

आम आदमी बीमारी से ज्यादा महंगी दवाओं के बोझ से कराह रहा है. कोरोना काल में जहां कामकाजी व्यक्ति की आमदनी पर फर्क पड़ा, वहीं दवाओं के बढ़ते दाम ने उन परिवारों के लिए परेशानी खड़ी कर दी है.

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आनंद तिवारी, पटना. आम आदमी बीमारी से ज्यादा महंगी दवाओं के बोझ से कराह रहा है. कोरोना काल में जहां कामकाजी व्यक्ति की आमदनी पर फर्क पड़ा, वहीं दवाओं के बढ़ते दाम ने उन परिवारों के लिए परेशानी खड़ी कर दी है.

अनलॉक के बाद जरूरी दवाओं की कीमतों में 10 से 20% तक की तेजी आयी है. दवा कंपनियों ने बढ़ी हुई कीमतों पर नये बैच की दवाओं को बाजार में उतार दिया है. ब्लड प्रेशर की दवा हो या कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने की, सभी के दाम बढ़ चुके हैं.

हर तीन से छह माह में दवाओं के दाम में इजाफा हो रहा है, जबकि नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी ने पिछले साल ही 509 दवाओं के रेट तय कर दिये थे. गोविंद मित्रा रोड में दवा मंडी की पड़ताल के बाद यह खुलासा हुआ.

जीएम रोड दवा मंडी में फिर से नये बैच की दवाएं आ गयी हैं. इनके दाम 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गये हैं. दवा के क्षेत्र के जानकारों की मानें तो दवा कंपनियां नये बैच नंबर के साथ कीमत बढ़ाने का खेल करती हैं.

बाजार में दवाओं की मांग बढ़ते ही नया बैच जारी कर दिया जाता है. दवाओं की छोटी कंपनियां कम उत्पादन दिखा कर लगातार बैच नंबर बदलती रहती हैं. इसके साथ ही दवा का रेट भी बढ़ा देती हैं. हर बैच नंबर के साथ दो रुपये से लेकर पांच रुपये तक की बढ़ोतरी कर दी जाती है, जो छह माह में 10 से 20 प्रतिशत तक पहुंच जाती है.

कोरोना में काम आने वाली दवाओं के सबसे अधिक बढ़े दाम

कोरोना संक्रमण में कुछ दवाओं की मांग अचानक बढ़ गयी, जिसका लाभ दवा कंपनियों ने खुब उठाया. विटामिन सी की सेलिन दवा की 20 गोलियों का पत्ता जहां पहले 25 रुपये का था, वहीं अब इसकी कीमत 38 रुपये हो गयी है. इसी प्रकार आइवरमेक्टिन सॉल्ट वाली टेबलेट पहले 27 रुपये की थी. अलग-अलग कुछ कंपनियों ने इसके दाम बढ़ाकर अब 40 से 150 रुपये तक कर दिये हैं.

दवा पुरानी, रेट नया (तीन माह में)

  • प्रसव के बाद दी जाने वाली डूफा स्टोन 10 एमजी की कीमत 623.46 रुपये के बदले अब 672. 51 रुपये हो गयी.

  • चक्कर की दवा वर्टिन 16 228.56 रुपये के बदले 268.89 रुपये में मिल रहा है

  • खांसी की कोडिस्टार सीरप की कीमत 119 रुपये के बदले अब 131 रुपये है

  • टोसेक्स टी सीरप 90 रुपये के बदले अब 120 रुपये मिल रहा है

  • दस्त रोकने का इंजेक्शन एंटेरोजर्मिना के दाम 38 रुपये से बढ़कर अब 46 रुपये हो गये हैं

  • ब्लड संचार बढ़ाने वाला मिथाइल कोबाल इंजेक्शन 95 रुपये के बदले अब 115 रुपये मिल रहा है

  • डायबिटीज की दवा जीटा प्लस 500 एमजी के दाम 184 रुपये के बदले अब 210 रुपये है.

ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष परसन कुमार सिंह ने कहा कि रॉ मैटेरियल बनाने वाली कंपनियों पर प्रदूषण विभाग की कार्रवाई से देश में दवाओं के दाम 20 से 25% तक बढ़ गये हैं. प्रशासन जब तक रॉ मैटेरियल व मैन्युफैक्चरिंग में समन्वय स्थापित नहीं करता, यह समस्या बनी रहेगी.

मेडिकल स्टोर के संचालक मिथिलेश कुमार ने कहा कि दवाओं के दाम में कुछ माह में एक साथ तेजी आ गयी है. उसी के अनुरूप मरीजों से भी पैसे लिये जा रहे हैं. यह सही है कि कोरोना काल में दवाओं के दाम बढ़े हैं. इस दौरान कंपनियों को रेट कुछ कम करना चाहिए था.

विवेकानंद मार्ग, बोरिंग रोड के निवासी राजीव कुमार ने कहा कि मेरे पापा को शुगर व ब्लड प्रेशर की शिकायत है. वह इसकी दवा नियमित लेते हैं. पिछले कुछ माह में एक दवा के पत्ते पर लगभग 20 रुपये का अंतर आया है. चूंकि दवा लेना जरूरी है, इसलिए लेना पड़ता है.

पाटलिपुत्र कॉलोनी पटना की रहनेवाली सुमन कुमारी ने कहा कि घर में मम्मी को डायबिटीज है. पहले डायबिटीज की दवा की कीमत 152 रुपये के करीब थी, लेकिन अब उसमें भी इजाफा हो गया है. मर्ज सही रखना है तो दवा तो लेना ही पड़ेगा.

Posted by Ashish Jha

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