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Durga puja 2022: बिहार के इस मंदिर में होती है अनोखी तंत्र साधना, जानें बलि के बाद क्या का लगता है भोग

Updated at : 22 Sep 2022 4:39 PM (IST)
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Durga puja 2022: बिहार के इस मंदिर में होती है अनोखी तंत्र साधना, जानें बलि के बाद क्या का लगता है भोग

Durga puja 2022 आमतौर पर मां दुर्गा सिंह पर ही सवार देखते होंगे, लेकिन इस बार यहां पर मां की मूर्ति रथ पर सवार दिखेंगी. मां जिस रथ पर सवार रहेंगी उस रथ को दो शेर खींचते दिखेंगे

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Durga puja 2022: नवरात्रि के 9 दिन काफी महत्वपूर्ण होते हैं. इस 9 दिनों में माता की विभिन्न रुपों की तरह से पूजा होती है. आमतौर पर बिहार में सभी जगह वैष्णवी विधि से मां भगवती की पूजा अर्चना होती है. लेकिन, बिहार के दरभंगा जिले के सैदनगर स्थित काली मंदिर में तांत्रिक विधि से पूजा होती है. तांत्रिक विधि से पूजा करने यहां देशों और विदेश से भी साधक आते हैं.वैसे जहां-जहां मां भगवती की शक्ति उपासक केंद्र है.उन सभी जगहों पर उपासक अपनी तांत्रिक विधि से उपासना करते हैं.

इन जगहों से यहां आते हैं उपासक

Durga puja 2022: पड़ोसी देश नेपाल और बिहार से सटे राज्य जैसे झारखंड, पश्चिम बंगाल, आसाम से लोग आते हैं. यहां पर आने वाले लोग तांत्रिक से लेकर उपासक तक होते हैं. यहां आने वाले लोग तंत्र विद्या को सिद्ध करने आते हैं. जो कि 9 दिन तक कठोर साधना कर अपनी उपासना करते हैं. यहां आने वाले साधकों के रहने की सारी व्यवस्था मंदिर प्रशासन की होती है.

यहां लगता है मांस का भोग

Durga puja 2022: नवरात्र में पूजा पाठ के दौरान आमतौर पर लोग मांसाहारी भोजन से कोसों दूर होते हैं. लेकिन, इस जगह पर नवरात्रि में मां काली को तीन दिनों तक मांसाहारी का बोग लगता है. यह अपने आप में एक अलग आस्था माना जाता है. यहां के पंडित बताते हैं कि यहां माता को पशु की बलि चढ़ाई जाती है और उसी का भोग भी लगता है. बहरहाल सैफ नगर दुर्गा पूजा की स्थापना 1972 में की गई थी. तब से निरंतर यहां पर भव्य पूजा पाठ किया जाता है. लेकिन, इस बार 50वीं वर्षगांठ पर यहां कुछ खास हो रहा है. इसको लेकर काफी धूमधाम से तैयारियां चल रही है.ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि पूरा पूजा पंडाल रोशनी से सराबोर दिखे. वहीं मंदिर के बगल में तालाब को भी रोशनी से पूरी तरह चाक-चौबंद कर दिए जाएंगे.

रथ पर सवार दिखेंगी मां

Durga puja 2022: आमतौर पर मां दुर्गा सिंह पर ही सवार देखते होंगे, लेकिन इस बार यहां पूजा समितियों के द्वारा माता की मूर्ति को कुछ विशेष आकार दिया जा रहा है.इस कारण यहां पर मां की मूर्ति रथ पर सवार दिखेंगी. मां जिस रथ पर सवार रहेंगी उस रथ को दो शेर खींचते दिखेंगे और उनका लगाम मां दुर्गे के हाथों में होगा. इस तरह की मूर्ति भक्तों को आकर्षित करने के लिए भी बनाया जा रहा है.

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