हाजीपुर के रामाशीष चौक बस स्टैंड पर क्यों उठ रहे सवाल, 2.75 करोड़ के टेंडर के बाद शुरू हुई वसूली, जानिए पूरा मामला
ओवर ब्रिज के नीचे खड़ी बस
Ramashish Chowk Bus Stand : हाजीपुर के रामाशीष चौक बस स्टैंड पर यात्रियों के लिए पेयजल, शौचालय और शेड जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी है. इसके बावजूद, सात माह के लिए 2.75 करोड़ रुपये के टेंडर के बाद बस चालकों से वसूली शुरू हो गई है.
Ramashish Chowk Bus Stand : हाजीपुर के रामाशीष चौक स्थित बस स्टैंड को लेकर अब कई सवाल सामने आ रहे हैं. सात माह के लिए 2 करोड़ 75 लाख रुपये में टेंडर होने के बाद बस चालकों से वसूली शुरू कर दी गई है. दूसरी ओर यात्रियों के लिए पेयजल, शौचालय, पर्याप्त शेड और बसों के व्यवस्थित ठहराव जैसी सुविधाओं की कमी की शिकायत सामने आई है. जमीन के इस्तेमाल को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग हो रही है.
टेंडर के बाद बस चालकों से शुरू हुई वसूली
रामाशीष चौक स्थित बस स्टैंड का जिला प्रशासन और नगर प्रशासन की ओर से सात माह के लिए टेंडर किया गया है. टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्टैंड में बस चालकों से वसूली भी शुरू हो गई है. इसी के साथ स्टैंड की मौजूदा व्यवस्था और यात्रियों को मिल रही सुविधाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं.
पेयजल और शौचालय की सुविधा नहीं होने की शिकायत
स्थानीय लोगों और बस यात्रियों का कहना है कि स्टैंड में जरूरी मूलभूत सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं. यात्रियों के लिए पेयजल, शौचालय और बैठने के लिए पर्याप्त शेड की व्यवस्था नहीं होने से परेशानी होती है. गर्मी और बारिश के दौरान यात्रियों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

पांच बसों के खड़े होने की जगह भी कम होने का दावा
स्टैंड में जगह की कमी भी बड़ी समस्या बताई जा रही है. स्थानीय लोगों के अनुसार यहां पांच बसों के एक साथ खड़े होने के लिए भी पर्याप्त जगह नहीं है. ऐसे में कई बार बसों को सड़क के किनारे या आसपास के हिस्से में खड़ा करना पड़ता है. इससे यातायात व्यवस्था प्रभावित होने के साथ यात्रियों को भी परेशानी होती है.
सुविधाएं अधूरी तो वसूली किस आधार पर, उठे सवाल
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि जब स्टैंड में यात्रियों और बस संचालकों के लिए जरूरी सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं, तो टेंडर के तुरंत बाद वसूली किस आधार पर शुरू कर दी गई. लोगों का कहना है कि प्रशासन को पहले स्टैंड की आधारभूत व्यवस्था दुरुस्त करनी चाहिए थी और इसके बाद वसूली की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए थी.
बस स्टैंड की जमीन को लेकर भी विवाद
रामाशीष चौक स्थित बस स्टैंड की जमीन को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए हैं. स्थानीय लोगों की ओर से सवाल उठाया जा रहा है कि जिस जमीन पर स्टैंड संचालित है, वहां स्थायी बस स्टैंड के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध है या नहीं. ओवरब्रिज के नीचे की जमीन के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं.
वर्ष 2022 में स्टैंड शिफ्ट करने का आदेश दिए जाने का दावा
मामले में यह भी बताया जा रहा है कि वर्ष 2022 में उच्च न्यायालय के आदेश के बाद तत्कालीन डीएम और नगर परिषद के ईओ की ओर से जमीन के अभाव को देखते हुए बस स्टैंड को सर्किट हाउस के पास शिफ्ट करने का आदेश दिया गया था. इसके बावजूद मौजूदा जगह पर स्टैंड के संचालन को लेकर अब सवाल उठाए जा रहे हैं.
बस स्टैंड के लिए जमीन खरीदने को 515.52 लाख रुपये हुए थे आवंटित
वर्ष 2024 में महुआ के पूर्व विधायक डॉ. मुकेश रौशन ने विधानसभा में हाजीपुर में बस स्टैंड के मुद्दे को उठाया था. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तत्कालीन मंत्री के जवाब में बताया गया था कि हाजीपुर में बस स्टैंड के लिए जमीन उपलब्ध नहीं है. जमीन खरीदने के लिए विभाग की ओर से नगर परिषद हाजीपुर को 515.52 लाख रुपये आवंटित किए गए थे.
जमीन खरीद की प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर भी सवाल
बताया गया है कि बस स्टैंड के लिए जमीन खरीदने का काम अब तक पूरा नहीं हुआ है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब स्थायी बस स्टैंड के लिए जमीन खरीद की प्रक्रिया लंबित है, तो मौजूदा जगह पर सात माह के लिए 2.75 करोड़ रुपये का टेंडर किस आधार पर किया गया.
नगर परिषद के ईओ ने जमीन पर दी अलग जानकारी
नगर परिषद हाजीपुर के ईओ सुशील कुमार दास ने जमीन को लेकर अलग जानकारी दी है. उन्होंने कहा कि बस स्टैंड की नीलामी का क्रियान्वयन जिला प्रशासन की ओर से कराया गया है. उनके अनुसार, जमीन एनएचएआई की नहीं बल्कि बिहार सरकार की है. जमीन की जांच के लिए जिला प्रशासन ने सीओ को निर्देश दिया है. जमीन से जुड़ी विस्तृत जानकारी संबंधित अधिकारी ही दे सकते हैं.
प्रशासन से पूरे मामले में स्थिति स्पष्ट करने की मांग
स्थानीय लोगों और बस यात्रियों ने जिला प्रशासन से मामले में पारदर्शिता के साथ स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है. लोगों का कहना है कि बस स्टैंड का संचालन हो रहा है तो यात्रियों की बुनियादी जरूरतों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए. पेयजल, शौचालय, यात्रियों के बैठने के लिए शेड और बसों के व्यवस्थित ठहराव की व्यवस्था कराने की मांग की गई है.
आगे जांच के बाद साफ होगी जमीन की स्थिति
अब जमीन की जांच और प्रशासन की ओर से दी जाने वाली जानकारी पर लोगों की नजर है. जांच के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि बस स्टैंड जिस जमीन पर संचालित है, उसका वास्तविक स्वामित्व क्या है और टेंडर किस आधार पर किया गया. इसके साथ ही यात्रियों की सुविधाओं को लेकर प्रशासन क्या कदम उठाता है, यह भी महत्वपूर्ण होगा.
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