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जिले के मात्र 13 निजी अस्पतालों में है आयुष्मान कार्ड से इलाज की व्यवस्था

Updated at : 25 Aug 2024 11:16 PM (IST)
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जिले के मात्र 13 निजी अस्पतालों में है आयुष्मान कार्ड से इलाज की व्यवस्था

जिले में आयुष्मान भारत योजना के तहत लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा एवं इलाज मुहैया कराने के उद्देश्य से सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग ने महा अभियान चलाकर आयुष्मान कार्ड का इ-केवाइसी कराया है.

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हाजीपुर. जिले में आयुष्मान भारत योजना के तहत लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा एवं इलाज मुहैया कराने के उद्देश्य से सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग ने महा अभियान चलाकर आयुष्मान कार्ड का इ-केवाइसी कराया है. लोगों का कार्ड बनाए जाने के बाद भी इसका पूरा-पूरा लाभ लोगों को मिले इसके लिए सरकार एवं विभाग द्वारा मुकम्मल व्यवस्था नहीं कराई गयी है. आयुष्मान कार्ड से विभिन्न बीमारियों के महंगे इलाज के लिए जिले में मात्र 13 निजी अस्पतालों को इंपैनल्ड किया गया है. हालांकि सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में भी इलाज की सुविधा मुहैया कराने का दावा करती है, लेकिन विभाग का दावा सिर्फ कागजी घोषणा ही है. अस्पतालों में कुछ गिने-चुने दवाओं के अलावे अन्य कई प्रकार की जरूरतों के लिए लोगों को बाहरी दुकान पर ही निर्भर रहना पड़ता है. सदर अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग एवं बिहार सरकार भले ही लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने का दावा करती है, लेकिन सुविधा के नाम पर सिर्फ बड़ी-बड़ी बिल्डिंग ही दिखाई देती है. मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए भी बाजार के अल्ट्रासाउंड का सहारा लेना पड़ता है. ऐसे में आयुष्मान भारत योजना के तहत सदर अस्पताल में सभी बीमारियों के लिए अलग-अलग इलाज की सुविधा मिलना मुश्किल लग रही है. आयुष्मान भारत योजना के जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी) विमला कुमारी ने बताया कि लोगों को पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग एवं सरकार के पहल पर लोगाें का आयुष्मान कार्ड बनाया जा रहा है. डीपीसी के अनुसार जिले में लोगों को आयुष्मान भारत योजना के तहत पांच लाख रुपये तक के इलाज मुफ्त कराने के लिए हाजीपुर शहर एवं अन्य प्रखंडों में कुल 13 प्राइवेट अस्पतालों को इंपैनल्ड किया जा चुका है. इंपैनल्ड अस्पतालों की संख्या बढ़ाने के लिए विभागीय स्तर पा लगातार काम किया जा रहा है. बताया गया कि जिले में सामान्य सर्जरी के छह अस्पतालों को इंपैनल्ड किया गया है. इन अस्पतालों में गायनी, यूरोलॉजी, ऑर्थोपेडिक, जेनरल मेडिसिन तथा अन्य बीमारियों से संबंधित इलाज की सुविधा लोगों को मिलेगी. डीपीसी ने बताया कि जिले में कुल 15 लाख से अधिक लाेगों का आयुष्मान कार्ड का इ-केवाईसी कराया जा चुका है, जिसमें 10 लाख 49 हजार कार्ड पूर्व में बनाया गया था. वहीं, लगभग 4.50 लाख लोगों का कार्ड महाअभियान के दौरान बनाया गया है. आंकड़े के अनुसार 29 लाख 87 हजार 798 लोगों का कार्ड बनाया जाना था. बताया गया कि कार्ड बनाने का कार्य लगातार जारी रहेगा. अब सवाल उठता है कि लगभग 30 लाख लोगों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी के साथ गंभीर बीमारी से ग्रसित लोगों के मुफ्त इलाज करने के लिए मात्र 13 अस्पतालों पर निर्भरता किस हद तक संभव है यह अभी भविष्य के गर्त में है. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी के अनुसार जिले के सभी सरकारी अस्पतालों को विभाग ने सूचीबद्ध करा चुकी है. बताया गया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत प्रति वर्ष पात्र लाभार्थी परिवार को पांच लाख रुपये का मुफ्त इलाज की सुविधा दिया जाना है. इसके लिए विभाग सभी सरकारी अस्पतालों को सूचीबद्ध कर रही है. सरकारी अस्पतालों की स्थिति देखने से अंदाजा लगाया जा सकता है कि मरीजों को किस हद तक इलाज की सुविधा मिल सकती है. जिले के लगभग सभी पीएचसी, सीएचसी एवं अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्रों में अच्छे चिकित्सकों का अभाव देखा जा रहा है. जिले के लगभग सभी पीएचसी सिर्फ रेफर सेंटर बनकर रह गयी है.

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