विदेशी पर्यटकों में 25 प्रतिशत तक वृद्धि की संभावना

भगवान बुद्ध की कर्मभूमि और भगवान महावीर की जन्मस्थली वैशाली इन दिनों विदेशी सैलानियों से गुलजार है. बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय सह स्मृति स्तूप का दर्शन चालू होते ही वैशाली भ्रमण पर आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है. प्रतिदिन विदेशी पर्यटकों का आना जारी है.
वैशाली. भगवान बुद्ध की कर्मभूमि और भगवान महावीर की जन्मस्थली वैशाली इन दिनों विदेशी सैलानियों से गुलजार है. बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय सह स्मृति स्तूप का दर्शन चालू होते ही वैशाली भ्रमण पर आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है. प्रतिदिन विदेशी पर्यटकों का आना जारी है. प्राचीन इतिहास, धर्म और संस्कृति का संगम यह ऐतिहासिक नगर एशियाई देशों के पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र बनता जा रहा है. वैशाली की पवित्र भूमि, बौद्ध धरोहरें तथा जैन धर्म से जुड़ी आस्थाएं सैलानियों को विशेष रूप से आकर्षित कर रही हैं. यही कारण है कि वैशाली देश के प्रमुख ऐतिहासिक एवं धार्मिक पर्यटन स्थलों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है. सालभर पर्यटकों का आगमन होता रहता है, लेकिन अक्टूबर से मार्च तक पर्यटन का खूब आना जाना है. इस दौरान बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय सह स्मृति स्तूप, राजा विशाल का गढ़, विश्व शांति स्तूप, रैलिक स्तूप, कोल्हुआ स्थित अशोक स्तंभ तथा बसोकुंड स्थित भगवान महावीर की जन्मस्थली सहित सभी दर्शनीय स्थलों पर भारी चहल-पहल देखने को मिलती है. शुक्रवार को कोरिया से आए सैकड़ों पर्यटकों का जत्था वैशाली पहुंचा. पर्यटक निजी होटलों के अलावा थाई मंदिर, श्रीलंका मंदिर, वियतनाम मंदिर सहित विभिन्न बौद्ध मंदिरों के गेस्ट हाउसों में ठहरे. शनिवार की सुबह इन्होंने रैलिक स्तूप सहित कई ऐतिहासिक स्थलों पर पूजा-अर्चना की और वैशाली के गौरवशाली इतिहास से रूबरू होते हुए प्रस्थान किया. थाई मंदिर के प्रधान भंते डॉ पीसी चंद्रा के नेतृत्व में पर्यटकों ने रैलिक स्तूप पर विशेष पूजा-अर्चना किया. वही रवि किशन ने वैशाली के इतिहास से रूबरू कराया गया. यह वही पवित्र स्थल है जहां भगवान बुद्ध की अस्थि कलश प्राप्त हुई थी. इस अवसर पर भंते ने पर्यटकों को वैशाली के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व की विस्तृत जानकारी दी. विदेशी पर्यटकों के आगमन से स्थानीय दुकानदारों के चेहरे खिले इन दिनों वैशाली में जापान, श्रीलंका, वियतनाम, कंबोडिया, थाईलैंड, कोरिया सहित कई देशों से बौद्ध धर्मावलंबी बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं. विदेशी पर्यटकों की बढ़ती आमद से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिली है. होटल व्यवसाय, पर्यटक गाइड, ऑटो चालक, दुकानदार और अन्य छोटे व्यवसायियों के चेहरे पर रौनक लौट आई है. पर्यटन विभाग के अनुसार इस वर्ष विदेशी सैलानियों की संख्या में लगभग 25 प्रतिशत तक वृद्धि की संभावना है. ऐसे में प्रशासन द्वारा पर्यटकों की सुविधाओं के लिए बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने तथा पर्यटन स्थलों की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है.
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