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पशुओं के इलाज के लिए डायल 1962 सेवा शुरू होने से पशुपालकों को कम हुई निजी चिकित्सकों पर निर्भरता

Updated at : 27 Jun 2025 10:33 PM (IST)
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पशुओं के इलाज के लिए डायल 1962 सेवा शुरू होने से पशुपालकों को कम हुई निजी चिकित्सकों पर निर्भरता

मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना पार्ट 2 के तहत संचालित पशु चिकित्सा सेवा डायल 1962 प्रखंड क्षेत्र के पशुपालकों के लिए वरदान साबित हो रही है.

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विनय कुमार, पटेढ़ी बेलसर. मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना पार्ट 2 के तहत संचालित पशु चिकित्सा सेवा डायल 1962 प्रखंड क्षेत्र के पशुपालकों के लिए वरदान साबित हो रही है. मवेशियों के इलाज के लिए पशुपालकों का निजी पशु चिकित्सकों पर से निर्भरता कम हो रही है. बस एक कॉल पर चलंत पशु चिकित्सा वैन (मेडिकल वेटनरी यूनिट) आधे घंटे के भीतर पशुपालक के दरवाजे पर पहुंच रही है और मवेशियों का नि:शुल्क उपचार कर रही है. इस सेवा के तहत हर दिन औसतन 15 से 20 पशुओं का प्राथमिक उपचार किया जा रहा है. वेटनरी वैन में पशुओं के इलाज के लिए कुल 107 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं, जिससे अधिकांश बीमारियों का प्राथमिक उपचार संभव हो पा रहा है. साथ ही, इस सेवा का लाभ पूरी तरह नि:शुल्क है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब और मध्यमवर्गीय पशुपालकों को आर्थिक रूप से बड़ी राहत मिल रही है. यह सेवा प्रत्येक कार्य दिवस को सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक संचालित की जाती है. वैन में एक प्रशिक्षित पशु चिकित्सक और एक पारा वेटनरी कर्मी तैनात रहते हैं.

कॉल करने के बाद आधे घंटे में पहुंच जाती है वैन : बताया गया कि कॉल करने के बाद टीम संबंधित पते पर पहुंचकर मवेशियों की जांच करती है, आवश्यक दवा देती है. डायल 1962 पर कॉल करने से पशु चिकित्सा सेवा पूरी तरह सहज और सुलभ हो गयी है. पहले जहां पशुपालकों को पशुओं के इलाज के लिए निजी चिकित्सकों पर पूरी तरह निर्भर रहना पड़ता था, वहीं अब वैन की उपलब्धता से घर बैठे सेवा मिल रही है. जिससे समय और पैसों दोनों की बचत हो रही है, साथ ही पशुओं को तत्काल इलाज मिलने से उनकी सेहत में भी सुधार हो रहा है. जिससे किसानों में हर्ष का माहौल है.

10 महीने में कर चुके है 12 सौ मवेशियों का इलाज : वैन में सवार चिकित्सक डॉ सुनील कुमार ने बताया कि सितंबर 2024 से अब तक 1200 से ज्यादा पशुपालक इस सेवा का लाभ उठा चुके हैं. इस वैन के माध्यम से पशुओं को बुखार, दस्त, खुर-पका, आंख-कान की बीमारी, गर्भ संबंधित समस्याएं सहित कई बीमारियों का प्राथमिक उपचार दिया जाता है. उन्होंने बताया कि पशुओं के नियमित टीकाकरण को भी इस सेवा से बल मिल रहा है, जिससे बीमारियों की रोकथाम संभव हो रही है. इसके अलावा चलंत पशु चिकित्सा वैन समय-समय पर गांवों में पशुपालकों को जागरूक भी कर रही है. मवेशियों के खानपान, रखरखाव, साफ-सफाई तथा देखभाल से संबंधित आवश्यक जानकारी दी जाती है. इससे पशुपालकों के बीच वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पालन-पोषण करने की जागरूकता बढ़ी है. पशुपालक भी इस सेवा से काफी संतुष्ट हैं. डायल 1962 के जरिये चलायी जा रही चलंत वेटनरी सेवा पशुपालकों के लिए एक सशक्त और प्रभावशाली पहल बनकर उभरी है. यह योजना पशुपालन को मजबूती देने की दिशा में एक सफल प्रयास माना जा रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AMLESH PRASAD

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By AMLESH PRASAD

AMLESH PRASAD is a contributor at Prabhat Khabar.

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