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दुष्कर्म के आरोपितों को 20 साल का सश्रम कारावास

Updated at : 30 Jan 2026 10:48 PM (IST)
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दुष्कर्म के आरोपितों को 20 साल का सश्रम कारावास

लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश ने एक किशोरी के साथ करीब डेढ़ वर्षों तक दुष्कर्म कर उसे गर्भवती कर दिये जाने के मामले में उसके एक चचेरे भाई और उसके एक साथी को 20-20 वर्ष का सश्रम कारावास और 50-50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा शुक्रवार को सुनाई.

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हाजीपुर. लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश ने एक किशोरी के साथ करीब डेढ़ वर्षों तक दुष्कर्म कर उसे गर्भवती कर दिये जाने के मामले में उसके एक चचेरे भाई और उसके एक साथी को 20-20 वर्ष का सश्रम कारावास और 50-50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा शुक्रवार को सुनाई. इस संबंध में लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम पॉक्सो के विशेष लोक अभियोजक मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि लालगंज थाना क्षेत्र की एक 16 वर्षीया किशोरी को उसका चचेरे भाई लालगंज स्थित अपने दोस्त के खाली मकान में मार्च 2021 में ले गया और वहां उसके साथ दुष्कर्म किया. इस घटना को किसी को नहीं बताने को लेकर उसे काफी धमकी दे दी. डर कर उसने किसी को कुछ नहीं बताया. इसके बाद फिर कुछ दिनों बाद उसे उक्त युवक अपने मौसी के घर पर ले गया. वहां देर रात उसकी मां की तबीयत खराब होने का बहाना बनाकर वहां से घर ले कर चला. रास्ते में अपने दोस्त बजरंगी सहनी को बुला लिया और फिर दोनों उसे अपने दोस्त के घर पर ले गये, वहां दोनों ने मिलकर फिर उसके साथ दुष्कर्म किया. सितंबर 2022 में पता चला कि पीड़िता गर्भवती है. इसके बाद उक्त किशोरी ने अपनी मां को आपबीती बतायी. पीड़िता की मां ने इस घटना को लेकर महिला थाना में गुड्डू सहनी और उसके ग्रामीण दोस्त बजरंगी सहनी के विरुद्ध प्राथमिकी करायी. दोनों के विरुद्ध 04 नवंबर 2021 को न्यायालय में आरोप पत्र समर्पित किया गया. इस मामले में दोनों के विरुद्ध न्यायालय में 10 नवंबर 2021 को संज्ञान लिया गया. न्यायालय में इन दोनों के विरुद्ध 31 जनवरी 2023 को आरोप का गठन किया गया. इसी बीच उक्त पीड़िता ने एक बच्चे को जन्म दिया. इस बच्चा का आनुवंशिक परीक्षण कराया गया. इस परीक्षण में गुड्डू सहनी को उसके जैविक पिता होने की पुष्टि की गयी. 11 साक्षियों एवं 18 प्रदर्श के कराये गये परीक्षण -प्रतिपरीक्षण के बाद दोनों को 27 जनवरी को दोषी करार दिया गया था. सजा के बिंदु पर 30 जनवरी को सुनवाई के बाद दोनों को 20 वर्ष का सश्रम कारावास और 50-50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनायी गयी. अर्थदंड की राशि पीड़िता को भुगतान करने का आदेश दिया है. जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन के सहयोग से स्वर्गीय कन्हाई शुक्ला सामाजिक सेवा संस्थान के द्वारा पीड़िता की काउंसेलिंग की गयी थी तथा उसे कानूनी सहायता प्रदान की जा रही थी. जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन के डायरेक्टर सह सचिव स्वर्गीय कन्हाई शुक्ला सामाजिक सेवा संस्थान सुधीर कुमार शुक्ला ने पॉक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश एवं विशेष लोक अभियोजक के प्रति त्वरित न्याय देने के लिए आभार व्यक्त किया है.

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DEEPAK MISHRA

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