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पटना एम्स के शिशु टेली आइसीयू से जुड़े 11 जिलों के अस्पताल, पीकू में 1 माह से 12 साल के बच्चों का होगा इलाज

Updated at : 09 Apr 2023 2:30 AM (IST)
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पटना एम्स के शिशु टेली आइसीयू से जुड़े 11 जिलों के अस्पताल, पीकू में 1 माह से 12 साल के बच्चों का होगा इलाज

एम्स प्रशासन के अनुसार पिछले साल ही कोरोना से बचाव के साथ-साथ मौसमी बीमारी के उपचार व शिशु टेली आइसीयू की ट्रेनिंग जिलों के अस्पताल के डॉक्टर, नर्स, टेक्नीशियन व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को ट्रेनिंग दे दी गयी थी.

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पटना. गर्मी में होने वाली मौसमी बीमारियों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है. जिलों के सभी सरकारी अस्पतालों को खासकर बच्चों में होने वाले रोगों के प्रति अलर्ट रहते हुए सभी व्यवस्था करने के निर्देश जारी किये गये हैं. इसी कड़ी में मौसम के तेवर को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अति गंभीर, एइएस (एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम) और जेइ (जापानी इंसेफ्लाइटिस) से पीड़ित बच्चों के तुरंत व सही इलाज के लिए 11 जिलों में स्थापित शिशु गहन देखभाल इकाई (पीकू) को दुरुस्त किया जा रहा है. संबंधित जिलों के पीकू इकाइ को पटना एम्स के टेली मेडिसीन आइसीयू कंसल्टेंट की सुविधा से जोड़ा दिया गया है.

एक माह से 12 साल के गंभीर बच्चों का भी इलाज

एम्स के शिशु टेली आइसीयू से जिन जिलों को जोड़ा गया है, उनमें समस्तीपुर, सीतामढ़ी, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, वैशाली, पूर्वी चंपारण, गया, भागलपुर, दरभंगा, बेतिया समेत कुल 11 जिले के सदर अस्पताल में स्थापित पीकू वार्ड शामिल हैं. नयी सुविधा के अनुसार संबंधित जिलों के पीकू में एइएस एवं जेइ के साथ-साथ एक माह से 12 साल के अति गंभीर पीड़ित बच्चों का भी उपचार किया जायेगा.

पीड़ित बच्चों का इलाज जिले में ही संभव

एम्स प्रशासन के अनुसार पिछले साल ही कोरोना से बचाव के साथ-साथ मौसमी बीमारी के उपचार व शिशु टेली आइसीयू की ट्रेनिंग जिलों के अस्पताल के डॉक्टर, नर्स, टेक्नीशियन व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को ट्रेनिंग दे दी गयी थी. एम्स के विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी के मौसम में एइइएस व जेइ के बच्चों की संख्या में इजाफा होता है. ऐसे में टेलीमेडिसिन सुविधा से एइएस पीड़ित बच्चों का इलाज संभव हो गया है. साथ ही कई अन्य रोगों के कारण बच्चों की मौत की संख्या को भी कम करने की पहल की गयी है. पीकू वार्ड में टेली आइसीयू काउंसेलिंग की सुविधा उपलब्ध होने से बेहतर चिकित्सा के लिए बच्चों को कहीं बाहर रेफर नहीं करना पड़ेगा बल्कि गंभीर बच्चों का उपचार जिले में संभव हो पायेगा.

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