गोपालगंज में चिनी मिल का स्क्रैप काटने पर विवाद, 21 जून को हजारों किसानों ने किया महाधरना का एलान

किसान संघर्ष समिति
Sugar Mill News : गोपालगंज के सासामुसा चीनी मिल परिसर में सोमवार को किसानों और मजदूरों की बड़ी पंचायत आयोजित की गई. पंचायत में सैकड़ों किसानों और श्रमिकों ने भाग लेकर चीनी मिल की मशीनों को स्क्रैप में काटने की प्रक्रिया का विरोध किया.
गोपालगंज से संजय कुमार अभय की रिपोर्ट
Sugar Mill News : गोपालगंज के सासामुसा चीनी मिल परिसर में सोमवार को किसानों और मजदूरों की बड़ी पंचायत आयोजित की गई. पंचायत में सैकड़ों किसानों और श्रमिकों ने भाग लेकर चीनी मिल की मशीनों को स्क्रैप में काटने की प्रक्रिया का विरोध किया. किसानों ने स्पष्ट कहा कि जब तक किसानों और मजदूरों का बकाया भुगतान नहीं हो जाता, तब तक किसी भी कीमत पर फैक्ट्री को स्क्रैप में नहीं कटने दिया जाएगा.
एनसीएलटी की नीलामी के बाद शुरू हुआ विवाद
किसान संघर्ष समिति के नेताओं ने बताया कि राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) द्वारा नवंबर 2025 में सासामुसा चीनी मिल की नीलामी की गई थी. नीलामी लेने वाली एजेंसी अब फैक्ट्री की मशीनों को स्क्रैप के रूप में काटने की तैयारी कर रही है. इसी के विरोध में किसानों और मजदूरों ने आंदोलन का रास्ता चुना है.
21 जून को महाधरना, प्रशासन को दी गई सूचना
पंचायत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 21 जून को सासामुसा चीनी मिल गेट पर विशाल महाधरना आयोजित किया जाएगा. इसकी सूचना जिला प्रशासन और जिलाधिकारी को भी दे दी गई है. किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा.
किसानों का दावा, भुगतान से पहले नहीं कटेगी फैक्ट्री
किसानों का कहना है कि चीनी मिल पर किसानों और मजदूरों का करोड़ों रुपये बकाया है. ऐसे में जब तक सभी देनदारियों का भुगतान नहीं हो जाता, तब तक मशीनों को स्क्रैप में काटना अन्यायपूर्ण होगा. किसानों ने कहा कि फैक्ट्री को बचाने और पुनः चालू कराने की दिशा में सरकार पहल कर रही है, इसलिए मशीनों को नष्ट करना क्षेत्र के हित में नहीं होगा.
सरकार की पहल से किसानों में जगी नई उम्मीद
पंचायत में मौजूद किसानों ने राज्य सरकार द्वारा सासामुसा चीनी मिल को पुनर्जीवित करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का स्वागत किया. किसानों का मानना है कि यदि नए निवेशक के माध्यम से चीनी मिल का संचालन शुरू होता है तो क्षेत्र के हजारों किसानों और मजदूरों को सीधा लाभ मिलेगा.
24 हजार किसानों की आजीविका से जुड़ा है मामला
किसानों ने कहा कि सासामुसा चीनी मिल क्षेत्र के लगभग 24 हजार गन्ना किसानों की आजीविका का प्रमुख आधार रही है. यदि यहां नए निवेशक को मौका दिया जाए तो स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.
कैबिनेट ने 42.99 करोड़ रुपये बकाया भुगतान को दी मंजूरी
किसानों के आंदोलन के बीच एक राहत भरी खबर भी सामने आई है. आठ जून को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में गन्ना उद्योग विभाग के प्रस्ताव पर सासामुसा शुगर वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड के किसानों का 42 करोड़ 99 लाख 9 हजार 95 रुपये बकाया भुगतान स्वीकृत कर दिया गया है. सरकार का कहना है कि चीनी मिल के पुनः संचालन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए किसानों का बकाया भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा.
नए निवेशक का रास्ता हुआ साफ
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब चीनी मिल के लिए नए निवेशक के आने का रास्ता साफ माना जा रहा है. किसानों को उम्मीद है कि रिगा चीनी मिल की तर्ज पर सासामुसा चीनी मिल को भी फिर से चालू किया जा सकता है, जिससे वर्षों से बंद पड़े उद्योग में नई जान आएगी.
कभी इलाके की आर्थिक रीढ़ थी सासामुसा चीनी मिल
साल 1932 में स्थापित सासामुसा चीनी मिल कभी पूरे क्षेत्र की आर्थिक धुरी मानी जाती थी. यहां करीब 960 मौसमी मजदूर और 438 स्थायी कर्मचारी कार्यरत थे. मिल के संचालन से हजारों किसान जुड़े हुए थे, जिनकी आय का मुख्य स्रोत गन्ना उत्पादन था.
2017 की दर्दनाक दुर्घटना के बाद बढ़ी मुश्किलें
20 दिसंबर 2017 की रात चीनी मिल में हुए भीषण बॉयलर हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया था. बॉयलर पाइप फटने से हुए विस्फोट में नौ मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई थी. हादसे के बाद मिल की स्थिति लगातार खराब होती चली गई और अंततः उत्पादन पूरी तरह बंद हो गया.
आंदोलन की तैयारी में जुटे किसान संगठन
पंचायत को जदयू प्रखंड अध्यक्ष मो. तौहीद, किसान संघर्ष समिति के संयोजक सत्येंद्र बैठा, सुनील यादव, योगेंद्र शर्मा, गुड्डू प्रसाद, ओमप्रकाश प्रसाद, अजय प्रसाद गुप्ता तथा चीनी मिल लेबर यूनियन के प्रतिनिधि एम. मतीन समेत कई नेताओं ने संबोधित किया. सभी ने एकजुट होकर 21 जून के महाधरना को सफल बनाने का आह्वान किया.
किसानों का अंतिम संदेश
किसानों ने साफ कहा कि सासामुसा चीनी मिल सिर्फ एक फैक्ट्री नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका और क्षेत्र की पहचान है. बकाया भुगतान और मिल के पुनः संचालन तक उनका संघर्ष जारी रहेगा.
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