गोपलगंज: सिंहासिनी धाम में 30 जुलाई से श्रावणी शिव महोत्सव, कलश यात्रा के साथ होगा शुभारंभ

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फोटो-2050- मेले के लिए लगाये जा रहे झूले और दुकानें | Prabhat Khabar Network

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गोपालगंज के ऐतिहासिक सिंहासिनी धाम में 30 जुलाई को कलश यात्रा के साथ श्रावणी शिव महोत्सव का शुभारंभ होने जा रहा है। एक महीने तक चलने वाले इस महोत्सव में सुरक्षा, श्रद्धालुओं की सुविधा और धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

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गोपालगंज: जिले के बैकुंठपुर प्रखंड स्थित ऐतिहासिक सिंहासिनी धाम के बाबा धनेश्वर नाथ शिव मंदिर में श्रावणी शिव महोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं. 30 जुलाई को भव्य कलश यात्रा के साथ महोत्सव का शुभारंभ होगा. इसे लेकर शुक्रवार को मंदिर परिसर में प्रशासन और मंदिर समिति की संयुक्त शांति समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें सुरक्षा व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधा और मेले के संचालन को लेकर विस्तृत चर्चा हुई.

मंदिर परिसर में रोशनी, सजावट, झूले और मेले की दुकानों की तैयारी भी तेज गति से चल रही है.

श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाओं पर रहेगा विशेष फोकस

शांति समिति की बैठक की अध्यक्षता बीडीओ नंदकिशोर साह ने की, जबकि सीओ शिवम श्रीवास्तव भी मौजूद रहे.

बीडीओ ने कहा कि जलाभिषेक के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी. इसके लिए मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरे, स्वयंसेवकों की तैनाती, महिला एवं पुरुष पुलिस बल, पेयजल, शौचालय, स्वास्थ्य शिविर, प्रकाश व्यवस्था और यातायात नियंत्रण की व्यापक व्यवस्था की जा रही है.

सीओ ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और शांतिपूर्ण वातावरण में पूजा-अर्चना करने की अपील की. मंदिर समिति ने भी प्रशासन को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया.

एक माह तक होंगे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन

मंदिर के पुजारियों के अनुसार, श्रावणी शिव महोत्सव के दौरान प्रतिदिन रुद्राभिषेक, शिव पुराण कथा, भजन-कीर्तन, आरती, संध्या आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.

प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को विशेष पूजा-अर्चना होगी. इसके अलावा विभिन्न गांवों से शोभायात्राएं और आकर्षक झांकियां भी निकाली जाएंगी.

मंदिर परिसर में एक माह तक विशाल श्रावणी मेला लगेगा, जिसकी तैयारियां जोरों पर हैं.

त्रेता और द्वापर युग से जुड़ी है सिंहासिनी धाम की मान्यता

सिंहासिनी धाम की धार्मिक मान्यताएं इसे विशेष पहचान दिलाती हैं. मान्यता है कि त्रेता युग में अयोध्या से जनकपुर जा रही भगवान श्रीराम की बारात का यहां कलेवा हुआ था. विवाह के बाद भगवान श्रीराम और माता सीता ने यहीं भगवान शिव तथा सिंहासिनी मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की थी.

वहीं द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण और महाराज युधिष्ठिर द्वारा यहां राजसूय यज्ञ किए जाने की भी मान्यता है.

इन्हीं धार्मिक मान्यताओं के कारण सावन माह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक और दर्शन के लिए सिंहासिनी धाम पहुंचते हैं.

तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी मंदिर समिति

मंदिर के पुजारी लालबाबू गिरि सहित मंदिर समिति के सदस्य श्रावणी शिव महोत्सव की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं. प्रशासन और मंदिर समिति का लक्ष्य श्रद्धालुओं को सुरक्षित, व्यवस्थित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराना है, ताकि महोत्सव शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न हो सके.

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