Gopalganj News : मां सिंहासनी के आंचल में कलाकारों ने सुर, लय और ताल अर्पित कर किया आह्लादित

Published by : GURUDUTT NATH Updated At : 07 Apr 2025 9:18 PM

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Gopalganj News : बिहार के प्रमुख धार्मिक स्थलों में एक थावे में मां सिंहासनी का दरबार 17वीं सदी से आस्था का प्रतीक है. थावे में नवरात्र के समाप्ति के पश्चात धर्मराज दशमी के शुभ मुहूर्त के बीच 13वें वर्ष थावे महोत्सव का आयोजन हुआ.

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गोपालगंज. बिहार के प्रमुख धार्मिक स्थलों में एक थावे में मां सिंहासनी का दरबार 17वीं सदी से आस्था का प्रतीक है. थावे में नवरात्र के समाप्ति के पश्चात धर्मराज दशमी के शुभ मुहूर्त के बीच 13वें वर्ष थावे महोत्सव का आयोजन हुआ. थावे का होमगार्ड मैदान में आयोजित थावे महोत्सव के दौरान, मां थावे वाली के दरबार में सुर-ताल की अद्भुत महफिल सजी थी. मां सिंहासनी के आंचल में कलाकारों ने सुर, लय और ताल अंजलि भर-भर कर अर्पित किया. गीत , संगीत और वाद्य ने श्रोताओं को उमंग और उल्लास का एहसास करा दिया. वाद्य यंत्रों की धुन और नृत्यों की ताल से माहौल झंकृत हो गया, मानो सुर-लहरियां ही सब कुछ भर गयी हों. यह सब मां सिंहासनी के दरबार में हो रहा था, जो इस महोत्सव का केंद्र था.

सतरंगी रोशनी माहौल को बना रही थी खास

सतरंगी रोशनी में मां थावे वाली के दरबार में सजी सुर-ताल की अद्भुत महफिल वाकई माहौल को और भी खास बना रही थी. महोत्सव का आगाज राज्यस्तरीय कलाकार विपिन कुमार मिश्रा की टीम ने शंखनाद से किया तो ऐसा लगा कि देवलोक धरती पर उतर आया हो. उसके बाद सरस्वती संगीत कला केंद्र के कलाकारों द्वारा भाव नृत्य की प्रस्तुति दी गयी. उसके बाद अंतरराष्ट्रीय कवि मंच पर पहुंचे, तो मां भगवती काे शीश नवा कर संजीव मुकेश, दिनेश बावरा, डॉ तिष्याश्री, रोहित शर्मा ने कवि सम्मेलन में असल रंग जमाया. कवि नीलोत्पल मृणाल एक से बढ़कर एक प्रस्तुति कर लोगों के दिलों पर छा गये. दर्शकों को कवियों ने अपने साहित्य के फुहार से खूब हंसाया. उसके बाद जब मंच पर नीलम चौधरी द्वारा निनाद भाव नृत्य मां को समर्पित किया गया. अंत में प्रसिद्ध पार्श्व गायिका कल्पना पटवारी की मनमोहक प्रस्तुतिओं ने लोगों के तन-मन को छू लिया.

कलाकारों ने की अपनी संस्कृति से जोड़ने की कोशिश

सोमवार को आयोजित थावे महोत्सव में हजारों लोगों की भीड़ कलाकारों के प्रस्तुति से आनंदित होते रहे. पुरवा हवा मां थावे वाली के दरबार में सजी सुर-ताल की अद्भुत महफिल. दर्शक की तालियों की आवाज वाद्य यंत्रों की सुमधुर ध्वनियां बीच-बीच में गुम हो गयी थीं. उनकी वाहवाही की बारिश से कलाकारों की हौसले को बढ़ा रहा था. कलाकार भी अपनी प्रतिभा का उम्दा प्रदर्शन कर हर शख्स को आह्लादित करने की कोशिश की. मन को शांति और दिल को सुकून देने वाले संगीत से लेकर कलाकारों ने अपने संस्कृति से जोड़ने की कोशिश की.

महोत्सव ने थावे को राष्ट्रीय स्तर पर दिलायी पहचान

थावे मां सिंहासनी के दरबार में वर्ष 20212 में बिहार के तत्कालीन पर्यटन मंत्री सुनील कुमार पिंटू ने भाजपा नेता मिथिलेश तिवारी की पहल पर महोत्सव की मंजूरी दी. पहले वर्ष 25 लाख रुपये का आवंटन मिला. हर साल पर्यटन विभाग जिला प्रशासन के डिमांड पर राशि को बढ़ाकर देश के बड़े कलाकारों को बुलाने का मौका मिला. थावे महोत्सव की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर दिलायी है.

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