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Chanakya Niti: कामयाबी के बेहद करीब पहुंचकर लोग क्यों बर्बाद हो जाते हैं? ये 6 गलतियां हैं बड़ी वजह

Updated at : 29 Dec 2025 8:24 PM (IST)
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Chanakya Niti

आचार्य चाणक्य की तस्वीर, Pic Credit- Chatgpt

Chanakya Niti: बहुत से लोग सफलता के बेहद करीब पहुंचकर भी क्यों चूक जाते हैं? चाणक्य नीति में बताई गई ये 6 गलतियां अगर समय रहते न सुधारी जाए तो कामयाबी हाथ से फिसल सकती है.

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Chanakya Niti: किसी भी इंसान को रातों रात सफलता नहीं मिलती है. इसके लिए उन्हें जिंदगी के कई कठिन परीक्षाओं और परिस्थितियों से होकर गुजरना पड़ता है. सभी परीक्षाएं महत्वपूर्ण होती है इसलिए उस परीक्षा से सीख लेकर आगे बढ़ना पड़ता है तभी इंसान को बड़ी सफलता हाथ लगती है. लेकिन कुछ लोग बड़ी सफलता या कामयाबी मिलने से पहले कुछ बातों मामूली समझकर नजर अंदाज कर देते हैं, जो उन्हें बाद में भारी पड़ता है और वह सफलता से वंचित रह जाते हैं. चाणक्य नीति में उन संकेतों के बारे में अच्छे से बताया गया है. चाणक्य नीति से आइये जानते हैं वह कौन कौन सी छोटी छोटी बातें या संकेत हैं जिन्हें जिंदगी में बड़ा मुकाम हासिल करने पहले इग्नोर नहीं करना चाहिए.

अहंकार का बढ़ना

चाणक्य कहते हैं कि जब भी व्यक्ति थोड़ा सा सफल होता है तो उसके भीतर अहंकार आ जाता है. यह पतन की पहली चेतावनी होती है. ऐसे में अक्सर वे लोग खुद को दूसरों से बेहतर समझने लगते और किसी की सलाह को गंभीरता से नहीं लेते हैं. यही चीज आगे चलकर बड़े नुकसान का कारण बनता है.

सही लोगों की सलाह को नजरअंदाज करना

अक्सर देखा जाता है कि इंसान अपने छोटी से सफलता हासिल करने के बाद आसपास में मौजूद अनुभवी और सच्चे लोगों की बातों को सुनना बंद कर देता है. उसी वक्त से वह गलत दिशा में बढ़ने लगता है. चाणक्य नीति में सलाह दी गई है कि सफलता से पहले विवेक बनाए रखना बेहद जरूरी है.

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आलस्य और टालमटोल की आदत

कई बार लोग छोटी से उपलब्धि से इतने खुश हो जाते हैं कि वह कोई भी गंभीरता नहीं लेते हैं. इसके कारण वह जरूरी काम को भी बार-बार टालते हैं. उस वक्त वे आराम को प्राथमिकता देते हैं. चाणक्य के अनुसार, आलस्य धीरे-धीरे इंसान की मेहनत और आत्मविश्वास दोनों को खत्म कर देता है, जिससे सफलता दूर होती चली जाती है.

गलत संगत का बढ़ता प्रभाव

चाणक्य नीति में संगति को बहुत महत्व दिया गया है. अगर किसी व्यक्ति की संगत धीरे-धीरे नकारात्मक लोगों से होने लगे, तो यह उसके जीवन में आने वाले संकट की चेतावनी है.

धन और संसाधनों का गलत उपयोग

कई बार इंसान सफलता से पहले ही बिना सोचे-समझे पैसा खर्च करने लगता है और अपनी संसाधनों का दुरुपयोग करता है. चाणक्य की नीति में यह भविष्य की परेशानी का संकेत माना गया है. चाणक्य कहते हैं कि संयम और संतुलन ही स्थायी सफलता की नींव है.

धैर्य की कमी

सफलता की जल्दी में चाहत में अगर धैर्य खत्म होने लगे, तो इंसान गलत फैसले लेने लगता है. चाणक्य नीति में धैर्य को सबसे बड़ी शक्ति बताया गया है, जिसके बिना सफलता टिक नहीं पाती.

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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