Gopalganj News : गंडक नदी की तबाही से बचाने के लिए 13 करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार, बाढ़ से बचाव के लिए अभी से ही हाेमवर्क तैयार करने में जुटा विभाग
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 07 Jan 2025 10:20 PM
Gopalganj News : गंडक नदी का स्वभाव उग्र होता है. सर्वाधिक कटाव करने वाली गंडक नदी मानी जाती है. पिछले तीन वर्षों में नदी की तबाही को कंट्राेल करने में जल संसाधन विभाग सफल रहा है. इस वर्ष बाढ़ से बचाने के लिए जल संसाधन विभाग के एक्सपर्ट की टीम ने दो तटबंधों को डेंजर मानते वहां नयी तकनीक से बचाव कार्य करने के लिए प्रोजेक्ट बनाकर उसकी मंजूरी ली है.
गोपालगंज. गंडक नदी का स्वभाव उग्र होता है. सर्वाधिक कटाव करने वाली गंडक नदी मानी जाती है. पिछले तीन वर्षों में नदी की तबाही को कंट्राेल करने में जल संसाधन विभाग सफल रहा है. इस वर्ष बाढ़ से बचाने के लिए जल संसाधन विभाग के एक्सपर्ट की टीम ने दो तटबंधों को डेंजर मानते वहां नयी तकनीक से बचाव कार्य करने के लिए प्रोजेक्ट बनाकर उसकी मंजूरी ली है. नये प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए 13 करोड़ की योजना की टेक्निकल स्वीकृति भी मिल गयी है.
कराया जाना है टेंडर
कार्यपालक अभियंता के स्तर पर अब टेंडर कराया जाना है. विभागीय सूत्रों ने बताया कि बाढ़ संघर्षात्मक बल के अध्यक्ष नवल किशोर सिंह, मुख्य अभियंता संजय कुमार, अधीक्षण अभियंता, कार्यपालक अभियंता प्रमोद कुमार की टीम ने नदी की तबाही को रोकने के लिए सलेहपुर- टंडसपुर बांध पर 58 से 75 स्टर्ड के बीच जीओ ट्यूब से एप्रॉन बनाने व रिस्टोर करने के लिए सात करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार किया है. जबकि मूंजा- मटियारी में एक नया चैनल बन जाने के कारण उसके मुहाने को बंद करने व पारकुपाइन वर्क के लिए छह करोड़ की प्रोजेक्ट तैयार किया है. बाकी जिले के तटबंधों को एक्सपर्ट की ओर से सुरक्षित बताया गया है. कहीं-कहीं रेनकट व अन्य छोटे- छोटे वर्क को कराया जाना है.
डुमरिया पुल के पास 13 वेंट से निकलने लगा पानी
जल संसाधन विभाग ने राहत की सांस ली है. डुमरिया पुल के 13 वेंट से अब पानी निकलने लगा है. इससे पानी का बहाव अब नहीं रुकेगा. पानी के बहाव जारी रहने से अहिरौली दान से लेकर डुमरिया तक बांध पर दबाव खत्म हो सकता है. यहां दबाव के कारण सर्वाधिक खतरा तटबंध के टूटने का बना रहता था.
गंडक नदी के महत्व समझें
हिमालय पर्वत शृंखला के धौलागिरि पर्वत के मुक्तिधाम से निकली गंडक नदी गंगा की सप्तधाराओं में से एक है. नदी तिब्बत व नेपाल से निकलकर यूपी के महाराजगंज, कुशीनगर होती हुई बिहार के गोपालगंज, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर, सारण होकर सोनपुर के पास गंगा नदी में मिल जाती है. इस नदी को बड़ी गंडक, गंडकी, शालिग्रामी, नारायणी,आदि नामों से जाना जाता है. नदी के 1310 किलोमीटर लंबे सफर में तमाम धार्मिक स्थल हैं. इसी नदी में महाभारत काल में गज और ग्राह (हाथी और घड़ियाल ) का युद्ध हुआ था, जिसमें गज की गुहार पर भगवान कृष्ण ने पहुंचकर उसकी जान बचायी थी. जरासंध वध के बाद पांडवों ने इसी पवित्र नदी में स्नान किया था. इस नदी में स्नान व ठाकुर जी की पूजा से सांसारिक आवागमन से मुक्ति मिल जाती है.टेंडर होने का इंतजार : विभाग
जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता प्रमोद कुमार ने बताया कि नदी कब उग्र हो जायेगी, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल होता है. नदी की उग्रता से बचाव के लिए विभाग हर संभव तैयारियां करता है. इस बार दो प्रोजेक्ट की मंजूरी मिली है. टेंडर होते ही काम शुरू हो जायेगा. उसे मई तक पूरा कराने का लक्ष्य है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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