BPSC Teacher: बिहार में यूपी की टीचर बदल रहीं पढ़ाई का माहौल, मेहनत और समर्पण से आ रहा सकारात्मक बदलाव
Published by : Paritosh Shahi Updated At : 15 Jan 2025 7:00 PM
BPSC Teacher Rubi Agarhari
BPSC Teacher: गोपालगंज जिले के सदर प्रखंड के श्रीराम रतन शाही प्लस-टू विद्यालय में यूपी आई शिक्षिका बच्चों को नए और प्रभावी तरीके से पढ़ातीं हैं. रूबी अग्रहरि के आने से पढ़ाई के माहौल में बड़ा बदलाव आया है.
BPSC Teacher: बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन (BPSC) द्वारा शिक्षकों की बहाली से गोपालगंज के सभी स्कूलों के शैक्षणिक माहौल में सकारात्मक बदलाव देखा जा रहा है. दूसरे राज्यों से आयी महिला शिक्षिकाओं के योगदान से छात्रों के बीच उत्साह बढ़ा है और पाठ्यक्रमों को रोचक तरीके से पढ़ाने के कारण स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति में भी वृद्धि हुई है और पढ़ाई का जज्बा जागृत हुआ है. गोपालगंज जिले के सदर प्रखंड के श्रीराम रतन शाही प्लस-टू विद्यालय में उत्तर प्रदेश से आयी बीपीएससी की एक ऐसी शिक्षिका हैं, जो बच्चों के भविष्य को संवारने में अहम भूमिका निभा रहीं है. उनकी मेहनत और समर्पण ने शैक्षणिक माहौल को बदलने में मदद की है. उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले की रहनेवाली रूबी अग्रहरि की बहाली बीपीएससी टीआरइ-02 परीक्षा के जरिये प्लस-टू विद्यालय में हुई थी.
प्रभावी तरीके से छात्रों को समझाती हैं रूबी अग्रहरि
रूबी अग्रहरि के पढ़ाने का तरीका न केवल छात्रों के लिए प्रेरणादायक है, बल्कि वह पढ़ाई को रोचक और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करती हैं. रूबी अग्रहरि, जो अब श्रीराम रतन शाही प्लस-टू विद्यालय में होम साइंस की शिक्षिका के रूप में पढ़ा रही हैं, बुधवार को छात्रों को विटामिन और पोषण के महत्व के बारे में ब्लैक बोर्ड पर सवालों के साथ पढ़ाती नजर आयीं. उनका यह तरीका न केवल छात्रों को विषय में रुचि बढ़ाने में मदद करता है, बल्कि उन्हें पूरी तन्मयता के साथ पाठ्यक्रम सीखने का उत्साह भी देता है. विद्यालय की छात्राएं रूबी मैम के पढ़ाने के तरीके की सराहना करती हैं और बताती हैं कि उनके शिक्षण से उनकी पढ़ाई में काफी सुधार आया है. स्कूल में बदलाव देख छात्रों के अभिभावक भी सराहना कर रहे हैं.

दूसरे राज्य की महिलाओं का बढ़ा सम्मान
रूबी अग्रहरि ने कहा, नौकरी से पहले मैंने बिहार के बारे में काफी कुछ सुना था, लेकिन यहां आने के बाद मैंने पाया कि सब कुछ बिल्कुल विपरीत है. बच्चों, उनके अभिभावकों और स्कूल के शिक्षकों से मुझे बहुत समर्थन मिला है. उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का धन्यवाद करते हुए कहा कि बिहार में महिलाओं को अब सम्मान मिला है और उनकी जैसी कई अन्य महिलाओं को दूसरे राज्यों से यहां आकर शिक्षिका के रूप में काम करने का मौका मिला है.
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पाठ्यक्रम को रोचक बनाकर पढ़ातीं हैं
रूबी की तरह कई अन्य महिला शिक्षिकाएं भी बिहार के विभिन्न विद्यालयों में बच्चों को शिक्षा दे रही हैं और उनके भविष्य को संवारने में अपना योगदान दे रही हैं. श्रीराम रतन शाही प्लस-टू स्कूल में पढ़नेवाली छात्राओं का कहना है कि रूबी मैम और अन्य शिक्षिकाओं के आने से उनकी पढ़ाई में बहुत मदद मिल रही है. वे न केवल पाठ्यक्रम को रोचक तरीके से पढ़ाती हैं, बल्कि होमवर्क देती हैं और एग्जाम की तैयारी में भी पूरी मदद करती हैं.

मुहल्ले के बच्चों को देती हैं नि:शुल्क शिक्षा
रूबी अग्रहरि न केवल स्कूल में बच्चों को पढ़ाती हैं, बल्कि वह अपने मुहल्ले में भी बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देती हैं. वह सरेया मुहल्ले में किराये के मकान में रहती हैं और स्कूल के बाद अपने आवास पर बच्चों को पढ़ाती हैं. उनके इस प्रयास से मुहल्ले के लोग बेहद खुश हैं और उनकी सराहना करते हैं.
शैक्षिक गुणवत्ता में आया सुधार : प्रधानाध्यापक
विद्यालय के प्रधानाध्यापक नरेंद्र मिश्रा का मानना है कि उत्तर प्रदेश से आयीं महिला शिक्षिकाओं के आने से शैक्षणिक माहौल में एक नया बदलाव आया है. अब बच्चे पूरी तन्मयता से क्लास अटेंड कर रहे हैं और उनकी उपस्थिति में लगातार वृद्धि हो रही है. उन्होंने कहा, यह बदलते बिहार की तस्वीर है, जहां शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार हो रहा है और छात्रों के बीच उत्साह बढ़ रहा है.
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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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