80 घरों पर कटाव का खतरा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :14 Oct 2016 2:27 AM (IST)
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त्रासदी . गंडक नदी उग्र धारा ने विशंभरपुर गांव में मचायी तबाही गंडक का कहर पिछले एक माह से जारी है. कुचायकोट की कालामटिहनिया पंचायत का अस्तित्व अब समाप्त होने के कगार पर है. विशंभरपुर गांव अब नदी के निशाने पर है. गांव के दर्जनों घर नदी में कट चुके हैं. लोग अपने घरों को […]
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त्रासदी . गंडक नदी उग्र धारा ने विशंभरपुर गांव में मचायी तबाही
गंडक का कहर पिछले एक माह से जारी है. कुचायकोट की कालामटिहनिया पंचायत का अस्तित्व अब समाप्त होने के कगार पर है. विशंभरपुर गांव अब नदी के निशाने पर है. गांव के दर्जनों घर नदी में कट चुके हैं. लोग अपने घरों को तोड़ने में लगे हैं.
कलामटिहनिया : गंडक नदी का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है. कटाव से विशंभरपुर गांव भी अब मिटने के कगार पर है. घनी आबादी तक नदी पहुंच चुकी है. गुरुवार को पिछले 24 घंटे में गांव के 20 घर नदी में समा चुके थे. अब 80 घरों पर कटाव का खतरा मंडरा रहा है. पीड़ित ग्रामीण आंखों में आंसू लिये अपने घरों को तोड़ कर गांव को खाली करने में जुट गये हैं. गांव में चारों तरफ कोहराम मचा हुआ है. नदी के उग्र रूप से सभी दहशत में हैं.
आठ दिन पहले यहां कटावरोधी कार्य को बाढ़ नियंत्रण विभाग ने बंद कर दिया था. उसके बाद नदी की धारा उग्र हुई और देखते-ही-देखते हजाम टोली गांव नदी में समा चुका है. हरिहर तिवारी, सुदामा तिवारी, अनिल तिवारी, चंद्रभूषण तिवारी, शंभु तिवारी, रंगलाल यादव ने बताया कि जिस तरह से कटाव हो रहा है, उससे गांव को बचा पाना मुश्किल है.
डीएम से लगायी गुहार : ग्रामीण संतोष तिवारी, संतोष दुबे, सुबास तिवारी आदि ने डीएम को आवेदन देकर गुहार लगायी है. आवेदन में ग्रामीणों ने तत्काल गांव को बचाने के लिए पहल करने की अपील की है. बचाव कार्य के नाम पर बाढ़ नियंत्रण विभाग के द्वारा किये जा रहे कार्य पर भी सवाल उठाये गये हैं. मुखिया सायरा खातून ने बाढ़ नियंत्रण विभाग के कार्यों पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले में जांच की मांग की है.
होता रहा बचाव कार्य, कटते रहे गांव : बाढ़ नियंत्रण विभाग का दावा है कि पिछले एक माह से यहां बचाव कार्य जारी है. नदी का साइड काफी लंबा होने के कारण मुश्किल बढ़ गयी है. नदी के कटाव को रोकने का प्रयास जारी है. बाढ़ नियंत्रण विभाग के कार्यपालक अभियंता शरत कुमार ने बताया कि अचानक 75 हजार क्यूसेक जल डिस्चार्ज हो जाने के कारण हजाम टोली गांव नदी में समा गया. नदी अब शांत हो रही है. गुरुवार को नदी का डिस्चार्ज मात्र 45 हजार रहा है. विभाग की तरफ से पूरी कोशिश की जा रही है कि गांव को बचाया जा सके.
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