बेटों की मौत से बूझ गया घर का चिराग

Published at :03 Jun 2016 4:39 AM (IST)
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बेटों की मौत से बूझ गया घर का चिराग

हादसा . स्कूल से लौटने के बाद दोस्तों के साथ खेत में साग लाने गये थे दोनों भाई तिरविरवां गांव में दो सगे भाइयों की मौत पर पूरा गांव रोया. पल भर में रेयाजुद्दीन के घर का चिराग बूझ गया. दोनों भाइयों की मौत से पूरा परिवार सदमे में है. सऊदी में काम कर रहे […]

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हादसा . स्कूल से लौटने के बाद दोस्तों के साथ खेत में साग लाने गये थे दोनों भाई

तिरविरवां गांव में दो सगे भाइयों की मौत पर पूरा गांव रोया. पल भर में रेयाजुद्दीन के घर का चिराग बूझ गया. दोनों भाइयों की मौत से पूरा परिवार सदमे में है. सऊदी में काम कर रहे पिता को मौत की खबर मिलते ही सदमा लग गया. नदी में डूबी तीसरी बच्ची को चिकित्सकों ने खतरे से बाहर बताया है.
गोपालगंज : गुरुवार का दिन था. रेयाजुद्दीन साह का परिवार माह-ए रमजान की तैयारी में जुटा था. छह वर्षीय सानिया दरवाजे पर खेल रही थी. स्कूल से पहुंचा नूरे नजर व लखते जिगर ने बहन सानिया को आंगन में लाकर छोड़ दिया. पॉलिथीन लेकर खेत की तरफ साग लाने के लिए दोनों भाई निकले.
घर से जाते-जाते बहन की देखभाल करने के लिए दादी महलुदन खातून से बोल दिया. दादी और उसकी मां जिन्नत खातून को इस बात का तनिक भी एहसास नहीं हुआ कि लाडले घर वापस नहीं लौट पायेंगे. दोपहर के एक बजते ही गांव के छोटू ने वह मनहूस खबर लायी. मां जिन्नत खातून लाडलों के नदी में डूबने की खबर मिलते ही दौड़ पड़ी. रेयाजुद्दीन शाह के पिता यासीन शाह भी लड़खड़ाते कदमों के साथ छाड़ी नदी की ओर बढ़ते गये.
थोड़ी ही देर बाद दोनों की मौत होने की खबर मिली. घर में पड़ी दादी महलुदन खातून बेसुध होकर बेहोश हो गयी. आसपास के लोग परिजनों को संभालने में जुट गये. उधर, पूरा गांव बच्चों को नदी से निकालने और अस्पताल पहुंचाने में जुट गया. तब तक काफी देर हो चुका था, दोनों भाइयों की मौत हो चुकी थी. उधर, सउदी में काम कर रहे पिता को मनहूस खबर गांव वालों ने दी. देर शाम दोनों भाइयों को नम आंखों से सुपुर्द-ए-खाक किया गया.
…तो बचायी जा सकती थी जान
बच्चों के डूबने की सूचना पर थोड़ी देर पहले अगर परिजन या आसपास के लोग पहुंचते तो, शायद दोनों भाइयों की जान बचायी जा सकती थी. लाडलों की मौत के बाद गांव में तरह-तरह की चर्चाएं की जा रही थी. कुछ लोगों का कहना था कि दोनों भाइयों के डूबने की सूचना बच्चों ने बाद में दी. अगर पहले मिली होती तो बचा ली जाती. नदी में गांव के आधा दर्जन बच्चे नहा रहें थे. नहाने के दौरान नूरे नजर व लखते जिगर दोनों भाई की डूब गये.
आंखों के सामने ही नदी में डूबते गये दोनों भाई : मौत की मुंह से बाहर निकली शिबू ने होश में आने के बाद कहा कि आंखों के सामने ही नदी में दोनों भाई डूबते गये. शिबू ने कहा कि बचाने के लिए दोनों भाइयों को नदी में गयी. लेकिन, मैं भी उनके साथ डूबती चली गयी. आसपास के लोगों ने शिबू की बाल को देख कर डूबने से बचा लिया. आनन-फानन में इलाज के लिए सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में लाया गया. इलाज के बाद शिबू को चिकित्सकों ने खतरे से बाहर बतायी.
पोस्टमार्टम कराये बिना शव ले गये परिजन : नदी में डूबे बच्चों को परिजन सदर अस्पताल में इलाज कराने के लिए पहुंचे. जहां, चिकित्सकों ने जांच के बाद दोनों भाइयों को मृत घोषित कर दिया, जबकि नदी में डूबी बच्ची शिबू का इलाज शुरू कर दिया गया. चिकित्सकों की टीम ने इलाज करने के बाद बच्ची को खतरे से बाहर बताया. उधर, परिजन मौत की पुष्टि होने के बाद दोनों बच्चों के शव को पोस्टमार्टम कराये बिना घर लेकर चले गये. पुलिस ने भी इस मामले में कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं की.
चीत्कार से गमगीन रहा सदर अस्पताल
बच्चों के मौत की खबर परिजनों को जैसे ही मिली. सदर अस्पताल में सगे – संबंधी के साथ पहुंच गये. दोपहर बाद अस्पताल परिसर परिजनों की चीत्कार से गमगीन हो गया. परिजनों के रोते-बिलखते देख आसपास के लोगों भी गमगीन हो गये. हादसे की खबर जिसको भी मिली, एक पल के लिए बच्चों के शव को देखने अस्पताल पहुंच गया. हालांकि बाद में परिजन शव को लेकर चले गये. जबकि बच्ची की इलाज शाम तक होता रहा.
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