डिजिटल युग में कैशलेस की रफ्तार धीमी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :27 May 2016 5:02 AM (IST)
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नकद भुगतान को अब भी सुरक्षित मान रहे लोग कैशलेस सोसाइटी बनाने के प्रति सरकारी बैंक हैं बेफिक्र गोपालगंज : निधि गुप्ता सालों से एसबीआइ का एटीएम कार्ड लिये हुए हैं. लेकिन, इस्तेमाल यदा-कदा ही करती हैं. वह भी केवल पैसे निकालने के लिए. उन्हें इस कार्ड की महत्ता का पता तब चला, जब वह […]
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नकद भुगतान को अब भी सुरक्षित मान रहे लोग
कैशलेस सोसाइटी बनाने के प्रति सरकारी बैंक हैं बेफिक्र
गोपालगंज : निधि गुप्ता सालों से एसबीआइ का एटीएम कार्ड लिये हुए हैं. लेकिन, इस्तेमाल यदा-कदा ही करती हैं. वह भी केवल पैसे निकालने के लिए. उन्हें इस कार्ड की महत्ता का पता तब चला, जब वह विगत रविवार को ड्रेस लैंड शॉपिंग करने गयीं. उन्होंने डेढ़ हजार रुपये की खरीदारी ज्यादा कर ली. काउंटर पर पैसे कम पड़े, तो थोड़ी निराशा हुई. सेल्समैन ने उनसे एटीएम कार्ड के बारे में पूछ लिया. उन्होंने देखा कि काउंटर पर मशीन से ही उसने स्वैप कर पैसे कार्ड से ले लिये.
निधि तो घरेलू महिला हैं. लेकिन, सरकारी बैंकें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कैशलेस सोसाइटी बनाने के सपने के प्रति बेफ्रिक हैं. जिले में 280 बैंक शाखाएं हैं.
जिनकी 320 एटीएम लगी हुई हैं. इन एटीएम से रोजाना कितना लेन देन होता है, इसका आंकड़ा न तो स्टेट बैंक के पास है और न ही लीड बैंकों के पास. जाहिर है कि जिले में हर दिन होनेवाले कुल कारोबार का कितना फीसदी कैशलेस हो रहा है, यह जानना बहुत दूर की कौड़ी है. वैसे किसी भी सेवा या खरीद में नकद लेन-देन अब भी सिरमौर है.डेबिट, क्रेडिट कार्ड, मोबाइल मनी अथवा एटीएम के जरिये भुगतान का चलन कम ही हो रहा है.
इसकी सबसे बड़ी वजह व्यापारियों का जागरूक न होना भी है. वोडाफोन, एयरटेल, आइडिया जैसी कंपनियां मोबाइल मनी सुविधा दे रही है. लेकिन, इसका चलन अभी तक सिर्फ मोबाइल और डीटीएच रिचार्ज में ही किया जा रहा है. इसके अलावा पिछले दिनों पेटीएम सरीखे कई विकल्प आये हैं, लेकिन लोग इनके उपयोग से कतरा रहे हैं.
एक्सपर्ट कमेंट : अधिवक्ता रमेश श्रीवास्तव कहते हैं कि साइबर कानून जब तक प्रभावी तरीके से लागू नहीं होगा, लोग इ-पेमेंट पर भरोसा नहीं करेंगे. बैंक खाते को ऑनलाइन करना अभी भी खतरे से खाली नहीं है. डेबिट और क्रेडिट कार्ड कुछ साल पहले एकदम से चलन में आया था. लेकिन, अधिक ब्याज के कारण लोग पीछे हट गये. अब मोबाइल बैंकिंग और इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट की सुविधाएं अभियान के तौर पर प्रसारित की जानी चाहिए.
क्या कहते हैं अधिकारी
ऑनलाइन कैशलेस सोसाइटी की ओर देश बढ़ रहा है. जिले में एटीएम सेवाएं तेजी से बढ़ी हैं. बैंक ट्रांजेक्शन को अधिक सुरक्षित माना जा रहा है. फिर भी यह नकद भुगतान की तुलना में काफी कम है. जन-धन योजना, आधार कार्ड आदि योजनाओं से रफ्तार में कमी आयी है. इसका असर आनेवाले समय में देखने को मिलेगा.
राघव पांडेय, शाखा प्रबंधक, स्टेट बैंक, गोपालगंज
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