मुसीबत. चढ़ते पारे के बीच गहराने लगा पेयजल संकट, कई चापाकल खराब

Published at :21 Mar 2016 4:45 AM (IST)
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मुसीबत. चढ़ते पारे के बीच गहराने लगा पेयजल संकट, कई चापाकल खराब

फागुन में चैत जैसी पड़ रही गरमी गोपालगंज : गरमी का एहसास होने लगा है. घरों में पंखे चलने लगे हैं. इस बार की गरमी पिछले 40 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ने की तैयारी में है. सच पूछिए तो दिल्ली से अधिक गरमी फिलहाल गोपालगंज में पड़ रही है. ऐसे में पेयजल संकट से एक-एक आदमी […]

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फागुन में चैत जैसी पड़ रही गरमी

गोपालगंज : गरमी का एहसास होने लगा है. घरों में पंखे चलने लगे हैं. इस बार की गरमी पिछले 40 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ने की तैयारी में है. सच पूछिए तो दिल्ली से अधिक गरमी फिलहाल गोपालगंज में पड़ रही है. ऐसे में पेयजल संकट से एक-एक आदमी को जूझना पड़ेगा. पीएचइडी शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं हो पा रहा है.
पेयजल के लिए विभाग ने 27 जलमीनार तो बना दी, लेकिन एक बूंद भी पानी नहीं निकला. उसी प्रकार जिले में 60 फीसदी चापाकल छोटे-छोटे कारणों से बंद पड़े हैं. उन्हें ठीक कराने की योजना फिलहाल विभाग के पास नहीं है. विभाग के पास तो 31 मार्च, 2015 से अब तक कितने चापाकल खराब हुए इसका आंकड़ा तक नहीं है. पिछले वित्तीय वर्ष में विभाग ने 35 फीसदी चापाकल बंद होने की बात अपनी रिपोर्ट में कही है.
हकीकत यह है कि 60 फीसदी चापाकल या तो बंद हैं या लोग निजी प्रयोग में लेकर उसे खराब कर चुके हैं. देखरेख और मरम्मत के अभाव में चापाकल लोगों को एक बूंद पानी तक उपलब्ध नहीं करा पा रहा है.
कैसे बुझेगी प्यास, 60 प्रतिशत खराब चापाकलों की पीएचइडी के पास मरम्मत की नहीं है कोई योजना
31 मार्च तक 35% चापाकल खराब
फागुन में चैत जैसी गरमी है. प्यास बुझाने के लिए सरकारी इंतजाम छलावा साबित हो रहा है. पीएचइडी की जलमीनार कागज में पानी दे रही है. विभाग 65 % चापाकल चालू होने का दावा कर रहा है. हकीकत यह है कि मात्र चार जलमीनार को छोड़ दें, तो 27 जलमीनार बंद हैं. 60 % चापाकल खराब पड़े हैं.
ऐसे में राहगीरों को पानी के लिए संकट का सामना करना पड़ेगा.
क्या कहते हैं अधिकारी
खराब चापाकलों की मरम्मती के लिए कोई स्कीम नहीं है. मरम्मती के लिए विभाग से आवंटन आने के बाद ही कोई पहल की जायेगी. अगर एक चापाकल लगाने में गड़बड़ी है, तो इसकी शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जायेगी.
संजय मिश्रा, , सहायक अभियंता, पीएचइडी, गोपालगंज
प्रखंड आबादी कार्यरत बंद
गोपालगंज 130955 2028 550
गोपालगंज (शहरी) 54449 180 24
कुचायकोट 277714 4043 981
हथुआ 188372 2578 635
बरौली 180964 2347 587
बरौली (शहरी) 34653 115 17
मांझा 172233 2194 564
थावे 96826 1281 325
बैकुंठपुर 177196 2282 637
सिधवलिया 113914 1340 353
भोरे 148890 3292 890
विजयीपुर 115723 1833 504
उचकागांव 129043 1596 429
मरीगंज (शहरी) 23576 80 7
फुलवरिया 109650 1555 425
कटेया 96742 1339 282
कटेया (शहरी) 17912 62 6
पंचदेवरी 83826 1060 280
कुल ग्रामीण 2022048 287687 442
कुल शहरी 130590 437 54
कुल 2152638 29205 7496
सबसे अधिक ग्रामीण इलाकों में खराब
ग्रामीण इलाकों में सर्वाधिक चापाकल खराब हैं. आंकड़ों पर नजर डालें, तो स्पष्ट है कि साधारण चापाकल ग्रामीण इलाके में 6374 तथा शहरी इलाके में 46, सिंगुर चापाकल ग्रामीण इलाके में 384, शहर में 8, इंडिया मार्कों-3 ग्रामीण इलाके में 126 बंद हैं, तो राता पंप 558 बंद पड़े हैं.
सबसे फेलियोर तारा पंप साबित हुआ है.
चापाकलों काे गाड़ने में भी धांधली
सरकारी चापाकल सार्वजनिक स्थल पर गाड़ना है. विधायक और पंचायत मद से गांव में पेयजल के लिए चापाकल गाड़े जाते हैं, जिसमें बड़े पैमाने पर धांधली सामने आयी है. नमूने के तौर पर देखें, तो कुचायकोट प्रखंड के पोखरभिंडा गांव में एक व्यक्ति ने अपने हाते में सरकारी दो चापाकल लगा रखा है.
एक आंगन में तो दूसरा चहारदीवारी के भीतर. सही से जांच करायी जाये, तो कई लोग अपनी छतों पर चापाकल को लेकर रखे हैं.
उसे हलाया तक नहीं गया है.
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