मेरे आंगन फिर आना गौरैया

Published at :20 Mar 2016 4:24 AM (IST)
विज्ञापन
मेरे आंगन फिर आना गौरैया

गोपालगंज : गौरैया हमारे बचपन का साथी है. बचपन में गौरेया के पीछे भागता बालमन आज भी चूं-चूं करती आयी चिड़ियां गीत सुन कर गौरैया के साथ खड़ा हो जाता है. आज हमारे आंगन से इस प्यारी व नन्ही चिड़ियां की चहचहाहट खत्म हो रही है. शहरीकरण का विस्तार, पक्के मकान, बढ़ता प्रदूषण व मोबाइल […]

विज्ञापन

गोपालगंज : गौरैया हमारे बचपन का साथी है. बचपन में गौरेया के पीछे भागता बालमन आज भी चूं-चूं करती आयी चिड़ियां गीत सुन कर गौरैया के साथ खड़ा हो जाता है. आज हमारे आंगन से इस प्यारी व नन्ही चिड़ियां की चहचहाहट खत्म हो रही है. शहरीकरण का विस्तार, पक्के मकान, बढ़ता प्रदूषण व मोबाइल टावरों से निकलने वाली रेडियो तरंगों के कारण गौरेया का आशियाना उजड़-सा गया है. इसे पूरी दुनिया ने महसूस किया है. इसीलिए 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है. बिहार सरकार ने तो गौरेया को राजकीय पक्षी घोषित किया है. अब जिनके घर सबसे ज्यादा गौरैया आयेगी या गौरेया की बेहतर तसवीर दिखाने पर राज्य सरकार पुरस्कृृत करेगी.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन