मूर्ति बेचे जाते यूपी के रास्ते दल्लिी ले जाकर

Updated at :19 Jan 2016 6:29 PM
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मूर्ति बेचे जाते यूपी के रास्ते दल्लिी ले जाकर

मूर्ति बेचे जाते यूपी के रास्ते दिल्ली ले जाकर- औरंगाबाद में पकड़े गये मूर्ति चोर गिरोह ने पूछताछ में किये गये खुलासेसंवाददाता, पटनाऔरंगाबाद में मूर्ति चोर गिरोह के पकड़े गये 10 चोरों ने पूछताछ में कई अहम खुलासे किये हैं. इओयू की टीम भी इनसे पूछताछ करेगी. इसके लिए इन्हें रिमांड पर लिया जायेगा. इस […]

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मूर्ति बेचे जाते यूपी के रास्ते दिल्ली ले जाकर- औरंगाबाद में पकड़े गये मूर्ति चोर गिरोह ने पूछताछ में किये गये खुलासेसंवाददाता, पटनाऔरंगाबाद में मूर्ति चोर गिरोह के पकड़े गये 10 चोरों ने पूछताछ में कई अहम खुलासे किये हैं. इओयू की टीम भी इनसे पूछताछ करेगी. इसके लिए इन्हें रिमांड पर लिया जायेगा. इस दौरान यह बात सामने आयी है कि ये चोर राज्य के विभिन्न मंदिरों से विशेष किस्म की मूर्तियों की चोरी करते थे. फिर इन्हें पड़ोसी राज्य यूपी से होते हुए नयी दिल्ली ले जाकर बेचा जाता था. यह सब जानते हैं कि पुरानी दिल्ली में कुछ ऐसे बाजार हैं, जो चोरी के महंगे सामानों को बेचने और खरीदने का बड़ा अड्डा है. जो मूर्ति ज्यादा बहुमूल्य या प्राचीन होते थे, उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बेचने की जुगत की जाती थी. यूपी में आगरा, वाराणसी, अलीगढ़ समेत कुछ अन्य स्थान इस तरह की मूर्तियों को रखने और फिर दिल्ली सप्लाइ करने के लिए खासतौर से उपयोग किये जाते हैं. बिहार से यूपी अन्य सामानों के साथ कैरियर वाहन में छिपाकर इन मूर्तियों को ले जाया जाता है. पूछताछ में ये तथ्य भी सामने आये कि इस गिरोह के यूपी और दिल्ली के अलावा एमपी, ओड़िसा, महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों में भी लिंक हैं. हालांकि किन-किन राज्यों में क्या लिंक है, इसकी अभी जांच चल रही है. इसके बाद ही इससे जुड़े पूरे रैकेट का खुलासा हो पायेगा. मूर्ति चोरों ने अपनी चोरी करने की पूरे क्रियाकलाप का भी खुलासा किया. पहले शहर के हिसाब से मंदिरों को छांटा जाता था. किस मंदिर में कौन-सी मूर्ति रखी हुई, इसकी पूरी जानकारी प्राप्त की जाती थी. इसके बाद यह देखा जाता था कि कौन-सा मंदिर चोरी करने के लिए आसान होगा. सुरक्षा समेत तमाम इंतजामों के बारे में अच्छे से पड़ताल करने के बाद चोरी करने से संबंधित पूरी रेकी की जाती थी. इसके बाद वारदात को अंजाम दिया जाता था. हालांकि, अभी यह पता नहीं चल पाया है कि यह गिरोह किसके इशारे पर मंदिरों को निशाना बनाता था. शुरुआती जांच यह बात सामने आयी है कि मंदिरों की महत्ता और उनमें चोरी करने की सहूलियत के हिसाब से उन्हें निशाना बनाया जाता था. इस गिरोह ने औरंगाबाद के गोह स्थित मंदिर से मगवान महावीर की मूर्ति चोरी की थी. इसके अलावा बांका के मंदार पर्वत से भी इस गिरोह ने एक ऐतिहासिक मूर्ति को उड़ाया था. जमुई के लछुआर से भी चोरी हुए ऐतिहासिक भगवान महावीर की चोरी हुई मूर्ति में भी इनका हाथ था. इसके अलावा अन्य कई वारदातों में भी इनका हाथ है, जिसकी पड़ताल चल रही है.

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