कृषि की आधी दर्जन योजनाओं के लिए सरकार नहीं दे रही जमीन : मोदी

Updated at :15 Jan 2016 6:26 PM
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कृषि की आधी दर्जन योजनाओं के लिए  सरकार नहीं दे रही जमीन :  मोदी

कृषि की आधी दर्जन योजनाओं के लिए सरकार नहीं दे रही जमीन : मोदी संवाददाता, पटनाभाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व उप मुख्यभारत सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि राज्य सरकार कृषि मंत्रालय की आधी दर्जन से ज्यादा राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाएं को जमीन नहीम दे रही है. जमीन के अभाव में योजना क्रियान्वित […]

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कृषि की आधी दर्जन योजनाओं के लिए सरकार नहीं दे रही जमीन : मोदी संवाददाता, पटनाभाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व उप मुख्यभारत सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि राज्य सरकार कृषि मंत्रालय की आधी दर्जन से ज्यादा राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाएं को जमीन नहीम दे रही है. जमीन के अभाव में योजना क्रियान्वित नहीं हो पा रही है. पिछले डेढ़ साल से केंद्र के बार-बार अनुरोध के बावजूद राज्य सरकार अब तक जमीन उपलब्ध नहीं करा सकी है. राज्य का कृषि रोड मैप सभी मानकों पर बुरी तरह फेल हो गया है वहीं बिहार में कृषि प्रक्षेत्र के विकास के लिए तत्पर केन्द्र को भी राज्य सरकार सहयोग नहीं कर रही है. श्री मोदी ने कहा कि बिहार में मत्स्य शोध एवं प्रशिक्षण केन्द्र तथा केन्द्रीय अंतर्स्थलीय मत्यस्की अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर की ओर 16 जून, 23 जुलाई व 17 सितम्बर 2014 को पत्र लिख कर क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्र स्थापित करने के लिए मुजफ्फरपुर या उसके आस पास के इलाके में 25-25 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने की बिहार सरकार से मांग की गई थी. बिहार सरकार द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किए जाने की स्थिति में 1 जुलाई, 2015 को इन दोनों संस्थानों को जमीन उपलब्ध कराने का आग्रह करते हुए कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अलग-अलग पत्र लिखा. मगर अबतक बिहार सरकार जमीन देने में विफल रही है. राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, करनाल की ओर से भी 20 जनवरी,2015 को पत्र लिख कर बिहार में संस्थान की क्षेत्रीय इकाई स्थापित करने के लिए राज्य सरकार से 200 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने की मांग की गई थी, मगर एक साल बाद भी राज्य सरकार जमीन उपलब्ध नहीं करा सकी है. केंद्र सरकार ने अपने डेढ़ साल के कार्यकाल में बिहार में कृषि प्रक्षेत्र के विकास के लिए छह कृषि विज्ञान केन्द्र, चार कृषि महाविद्यालय व लीची अनुसंधान केन्द्र सहित अनेक संस्थानों की स्थापना की पहल की है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बताना चाहिए कि केन्द्र सरकार की तत्परता और बार-बार पत्र लिखने के बावजूद फिशरी व डेयरी के राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों के लिए बिहार सरकार जमीन उपलब्ध क्यों नहीं करा रही है. क्या मत्स्य पालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने में राज्य सरकार की अब कोई रुचि नहीं रही.

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