सीएम बताये अपराधियों को सजा दिलाने की रफ्तार आधी क्यों हो गई : मोदी

Updated at :14 Jan 2016 8:00 PM
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सीएम बताये अपराधियों को सजा दिलाने की रफ्तार आधी क्यों हो गई : मोदी

सीएम बताये अपराधियों को सजा दिलाने की रफ्तार आधी क्यों हो गई : मोदी भाजपा से गठबंधन टूटने के बाद सजा नहीं मिलने से अपराधियों का मनोबल बढ़ा 200 फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना करें सरकार, ट्रायल कोर्ट की रिक्तियां शीघ्र भरी जाये संवाददाता, पटना कानून के राज का दावा करने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार […]

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सीएम बताये अपराधियों को सजा दिलाने की रफ्तार आधी क्यों हो गई : मोदी भाजपा से गठबंधन टूटने के बाद सजा नहीं मिलने से अपराधियों का मनोबल बढ़ा 200 फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना करें सरकार, ट्रायल कोर्ट की रिक्तियां शीघ्र भरी जाये संवाददाता, पटना कानून के राज का दावा करने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बतायें कि अपराधियों को सजा दिलाने की दर 2010 की तुलना में 2015 में आधी क्यों हो गई? ट्रायल कोर्ट व फास्ट ट्रैक कोर्ट एक-एक कर बंद क्यों हो गए? क्या भाजपा से गठबंधन टूटने के बाद सजा नहीं मिलने से अपराधियों का मनोबल नहीं बढ़ा है? उक्त सवाल रुरुवार को सीएम से पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने पूछा है. उन्होंने कहा है कि पहली बार 2005 में एनडीए की सरकार बनने के बाद 2006 में स्पीडी ट्रायल के जरिए अपराधियों को सजा दिलाने में तेजी लाई गई. 2006 में जहां कुल 6,839 लोगों को सजा दी गई, वहीं 2010 में यह संख्या बढ़ कर 14,311 हो गई. मगर भाजपा के सरकार से अलग होने के बाद 2014 में यह संख्या घट कर 5,073 हो गई, वहीं 2015 नवम्बर तक मात्र 4,225 लोगों को ही सजा दिलाई जा सकी. 2010 में 37 अपराध सिद्ध लोगों को फांसी की सजा दी गई, मगर 2014 में मात्र तीन लोगों को ही फांसी की सजा दी जा सकी. सजा की अन्य श्रेणियों में भी तेजी से गिरावट आई है. 2010 में जहां 1,875 लोगों को आजीवन कारावास की सजा मिली थी, वहीं 2014 में यह संख्या घट कर 1,095 रह गई. 2010 में 640 लोगों को 10 साल से अधिक की सजा मिली थी, जबकि 2014 में यह संख्या 330 यानी आधी रही. 11,759 लोगों को 2010 में 10 साल से कम की सजा दी गई थी, वहीं 2014 में यह आंकड़ा केवल 1,157 रहा. आर्म्स एक्ट में 2006 में 1,609 लोगों को सजा दी गई थी, वहीं 2008 में 1,018, जबकि 2014 में 416 और 2015 में मात्र 274 लोगों को ही सजा दी गई. उन्होंने कहा है कि इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भाजपा से गठबंधन टूटने के बाद बिहार में जहां तेजी से अपराध बढ़ा, वहीं अपराधियों को सजा दिलाने की दर घट कर शुरुआती वर्ष 2006 के स्तर पर या उसके नीचे पहुंच गयी. अपराधियों को सजा दिलाने व उनमें कानून का खौफ पैदा करने के लिए सरकार अविलम्ब 200 फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना करें और साथ ही ट्रायल कोर्ट में बड़ी संख्या में जो रिक्तियां हैं उसे शीघ्र भरेंं.

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