पंचायत में पद आरक्षित हुआ तो कई पदों के खुले रास्ते

पंचायत में पद आरक्षित हुआ तो कई पदों के खुले रास्तेक्षेत्र व पदों को बदलकर चुनाव लड़ने की छूट संवाददाता,पटनापंचायत चुनाव में पहली बार सभी पदों के आरक्षण का चक्र बदल रहा है. इसका असर हर वार्ड, पंचायत, पंचायत समिति, जिप सदस्य, पंच व सरपंच के पद पर पड़ा है. जिन पदों का इस बार […]
पंचायत में पद आरक्षित हुआ तो कई पदों के खुले रास्तेक्षेत्र व पदों को बदलकर चुनाव लड़ने की छूट संवाददाता,पटनापंचायत चुनाव में पहली बार सभी पदों के आरक्षण का चक्र बदल रहा है. इसका असर हर वार्ड, पंचायत, पंचायत समिति, जिप सदस्य, पंच व सरपंच के पद पर पड़ा है. जिन पदों का इस बार आरक्षण बदलेगा वह 10 वर्षों व दो चुनाव तक प्रभावी रहेगा. ऐसे में पदों के आरक्षण से प्रभावित जनप्रतिनिधियों के चुनाव लड़ने के जहां एक रास्ते बंद होंगे, वहीं उनके लिए अनेक रास्ते भी खुले हैं. जनता की सेवा करनी है और प्रतिनिधित्व करना है, तो बस चुनाव क्षेत्र व पदों की दावेदारी बदलनी होगी. इसके बाद उनको आजादी है कि जिले और प्रखंड में कहीं से भी चुनाव लड़ सकते हैं. पंचायत चुनाव के जनप्रतिनिधियों के पक्ष में खुशी की बात यह है कि उनके क्षेत्र पर आरक्षण का प्रभाव पड़ता है तो वह दुसरे क्षेत्र से चुनाव लड़ सके. बिहार पंचायती राज अधिनियम की धारा 135 में इस तरह के चुनाव लड़ने की अनुमति दी गयी है. इसमें यह प्रावधान किया गया है कि कोई भी व्यक्ति जिसका नाम किसी पंचायत के निर्वाचन क्षेत्र यानी की वार्ड की मतदाता सूची में शामिल है उसे पंचायत सदस्य के रूप में चुनाव लड़ने की आजादी है. इसके तहत वह वार्ड सदस्य या पंच का चुनाव लड़ सकते हैं. इसके अलावा अगर किसी व्यक्ति का नाम प्रखंड-पंचायत समिति के चुनाव क्षेत्र की मतदातात सूची में शामिल है, तो वह व्यक्ति प्रखंड के अंदर किसी भी पंचायत के मुखिया, कचहरी के सरपंच या पंचायत समिति के किसी भी निर्वाचन क्षेत्र के सदस्य के पद का उम्मीदवार हो सकता है. जिले के लिए गठित मतदाता सूची में नाम अंकित रहने पर संबंधित मतदाता जिला परिषद के किसी भी निर्वाचन क्षेत्र से जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ सकता है. इस तरह के मामले में सिर्फ एक बंदिश लगायी गयी है. किसी पंचायत समिति या प्रखंड के मतदाता जो उस पंचायत समिति या प्रखंड के वैसे ग्राम पंचायत क्षेत्र से मुखिया या सरपंच पद पर निर्वाचित होते हैं जिस ग्राम पंचायत के वे मतदाता नहीं है, उनका निर्वाचन सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एसएलपी सुरेंद्र सिंह बनाम बिहार सरकार एवं अन्य के मामले में पारित आदेश के आलोक में प्रभावी होगा.
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