संघर्ष से सफलता तक: मुर्गी पालन से आत्मनिर्भर बनीं रामगढ़ की नमिता देवी

Author :Sweta Vaidya
Published by :Sweta Vaidya
Updated at :13 May 2026 9:12 AM
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ramgarh success story

मुर्गी पालन के माध्यम से आत्मनिर्भर बनी पालू (पिपरीटोला) की नमिता देवी

Success Story: पतरातू के पालू (पिपरीटोला) गांव की नमिता देवी ने संघर्षों को पीछे छोड़ मुर्गी पालन के जरिए आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम की है. आर्थिक तंगी और पति के निधन के बाद टूटने के बजाय पतरातू के पालू (पिपरीटोला) गांव की नमिता देवी ने हिम्मत और मेहनत के दम पर नई पहचान बनाई.

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पतरातू से अजय तिवारी की रिपोर्ट

Success Story: झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातू प्रखंड के पालू (पिपरीटोला) गांव की नमिता देवी की कहानी संघर्ष, मेहनत और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गई है. कभी आर्थिक तंगी और सामाजिक संकोच में जीवन बिताने वाली नमिता देवी आज मुर्गी पालन और सामाजिक जिम्मेदारियों के माध्यम से अपने परिवार का सहारा बन चुकी हैं. उनकी सफलता में स्वयं सहायता समूह और झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) की महत्वपूर्ण भूमिका रही है.

2019 में समूह से जुड़कर की नई शुरुआत

बताया गया कि वर्ष 2019 में गांव में जेएसएलपीएस की पहल पर आंचल आजीविका सखी मंडल का गठन किया गया. इसी दौरान नमिता देवी समूह से जुड़ीं और 10 रुपये की साप्ताहिक बचत के साथ अपनी नई शुरुआत की. समूह की बैठकों में शामिल होने के बाद उन्होंने बैंकिंग, ऋण प्रबंधन और स्वरोजगार की जानकारी हासिल की, जिससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ा.

पति की मृत्यु के बाद संभाली परिवार की जिम्मेदारी

पति स्वर्गीय कमलेश कुमार महतो की आकस्मिक मृत्यु के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी नमिता देवी पर आ गई थी. आर्थिक संकट के बीच बच्चों की पढ़ाई और घर चलाना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया था. इसी दौरान जेएसएलपीएस द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों से प्रेरित होकर उन्होंने मुर्गी पालन को आजीविका का साधन बनाया.

20 हजार रुपये से शुरू किया व्यवसाय

सामुदायिक निवेश कोष से मिले 20 हजार रुपये के कर्ज से उन्होंने 1000 चूजे और दाना खरीदा. वर्तमान में वह सोनाली मुर्गी पालन कर रही हैं, जिसकी बाजार में अच्छी मांग है. वैज्ञानिक तरीके से पालन और समय पर टीकाकरण के कारण उनका व्यवसाय लगातार आगे बढ़ रहा है.

हर महीने 19 हजार रुपये तक हो रही आय

नमिता देवी की सक्रियता और कार्यक्षमता को देखते हुए उनके संकुल संगठन में जेंडर-सीआरपी पद के लिए चयन किया गया. आज उन्हें मुर्गी पालन से हर महीने करीब 12 हजार रुपये और जेंडर-सीआरपी के रूप में लगभग 7 हजार रुपये की आमदनी हो रही है. उनकी वार्षिक आय दो लाख रुपये से अधिक पहुंच चुकी है. इससे अब वह अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुविधाएं उपलब्ध करा पा रही हैं.

अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा 

नमिता देवी ने कहा कि एक समय ऐसा था जब परिवार की छोटी-छोटी जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल था, लेकिन स्वयं सहायता समूह ने उन्हें संघर्ष करना और आत्मनिर्भर बनना सिखाया. उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय समूह और जेएसएलपीएस को दिया. आज नमिता देवी क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं.

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श्वेता वैद्य प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में एक साल से अधिक का अनुभव है. पिछले करीब दो महीनों से वे झारखंड बीट पर सक्रिय रूप से काम कर रही हैं. इस दौरान वे राज्य से जुड़ी ताजा खबरों, लोगों से जुड़े मुद्दे और जरूरी जानकारियों पर आधारित स्टोरीज तैयार कर रही हैं. इससे पहले उन्होंने लाइफस्टाइल बीट के लिए भी कंटेंट लिखा. इस बीट में उन्होंने रेसिपी, फैशन, ब्यूटी टिप्स, होम डेकोर, किचन टिप्स, गार्डनिंग टिप्स और लेटेस्ट मेहंदी डिजाइन्स जैसे रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर रोचक और उपयोगी आर्टिकल लिखे. श्वेता की हर बार कोशिश यही रहती है कि बात आसान, साफ और सीधे तरीके से लोगों तक पहुंचे, जिससे कि हर कोई उसे बिना दिक्कत के समझ सके. कंटेंट राइटर के तौर पर उनका फोकस होता है कि कंटेंट सिंपल, रिलेटेबल और यूजर-फ्रेंडली हो.

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