सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा, वह फ्रांसीसी महिला की रिहाई का विरोध क्योें कर रहा है

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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा, वह फ्रांसीसी महिला की रिहाई का विरोध क्योें कर रहा है नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने सरकार से जानना चाहा है कि वह 1991 में चिली के सीनेटश्र की हत्या में संलिप्तता के आरोपों में प्रत्यर्पण का सामना कर रही फ्रांसीसी महिला की रिहाई का विरोध क्यों कर रही […]

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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा, वह फ्रांसीसी महिला की रिहाई का विरोध क्योें कर रहा है नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने सरकार से जानना चाहा है कि वह 1991 में चिली के सीनेटश्र की हत्या में संलिप्तता के आरोपों में प्रत्यर्पण का सामना कर रही फ्रांसीसी महिला की रिहाई का विरोध क्यों कर रही है. न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ की अध्यक्षता वाली पीठ ने सवाल किया कि केरल के दो मछुआरों की गोली मार कर हत्या करने के आरोपी दो इतालवी मरीन की रिहाई की हिमायत करने वाली सरकार फ्रांसीसी महिला की रिहाई का विरोध क्यों कर रही है? न्यायालय ने कहा कि यह विरोधाभास किसलिये है ? पीठ ने सवाल किया, ‘‘यदि फ्रांस की सरकार आश्वासन देती है तो फिर आपको क्या समस्या है? आप विदेशी नागरिकों :इतालवी मरीन: को अन्य मामले में वापस जाने देते हैं. यदि आप इटली की सरकार का सम्मान करते हैं तो आपको फ्रांस की सरकार का भी सम्मान करना चाहिए. न्यायालय ने ये टिप्पणियां उस वक्त कीं जब विदेश मंत्रालय की ओर से अतिरिक्त सालिसीटर जनरल पी एस पटवालिया ने 56 वर्षीय फ्रांसीसी महिला मारी एमैन्युअल वरहोवन की रिहाई का विरोध किया. पटवालिया का तर्क था कि चिली के अधिकारियों ने भारत सरकार को पत्र लिखकर इस महिला को रोकने का अनुरोध किया है ताकि उसका प्रत्यर्पण किया जा सके. पटवालिया ने इस पर विदेश मंत्रालय से आवश्यक निर्देश प्राप्त करने के लिये समय देने का अनुरोध किया. न्यायालय ने इस फ्रांसीसी महिला की रिहाई के बारे में मंत्रालय से निर्देश प्राप्त करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया और इस मामले को 16 नवंबर के लिये सूचीबद्ध कर दिया. इस महिला पर आरोप है कि एक अप्रैल, 1991 को चिली के सीनेटर जैमे गुजमैन एरैंजुरिज की हत्या में कथित रुप से वह भी शामिल थी. इस महिला ने इस आरोप से इंकार करते हुए दावा किया है कि विशेष मानवाधिकार मिशन में शामिल होने के कारण ही उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है. वरहोवन को 16 फरवरी को उत्तर प्रदेश से उस समय गिरफ्तार किया गया था जब वह नेपाल के रास्ते भारत में प्रवेश कर रही थी. वह तभी से न्यायिक हिरासत में है.

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