लालू के गांव फुलवरिया में जश्न का माहौल

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लालू के गांव फुलवरिया में जश्न का माहौल रंग-गुलाल के साथ आतिशबाजी कर जश्न मनाने में डूबे ग्रामीणएक दशक बाद फुलवरिया के लोगों के चेहरे पर लौट आयी रौनकउत्साहित युवा एक दूसरे को गुलाल लगा कर देते रहे बधाईढोल-नगाड़े पर थिरकने लगे युवा और ग्रामीणफोटो-12, 16अवधेश कुमार राजन, फुलवरियाराजद सुप्रीमो लालू प्रसाद का गांव फुलवरिया. […]

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लालू के गांव फुलवरिया में जश्न का माहौल रंग-गुलाल के साथ आतिशबाजी कर जश्न मनाने में डूबे ग्रामीणएक दशक बाद फुलवरिया के लोगों के चेहरे पर लौट आयी रौनकउत्साहित युवा एक दूसरे को गुलाल लगा कर देते रहे बधाईढोल-नगाड़े पर थिरकने लगे युवा और ग्रामीणफोटो-12, 16अवधेश कुमार राजन, फुलवरियाराजद सुप्रीमो लालू प्रसाद का गांव फुलवरिया. रवि की किरण ने यहां नयी उम्मीद के साथ उत्साह भरने का काम किया. दिन के एक बजे थे. युवाओं में उत्साह चरम पर था. उत्साहित युवाओं में अपनी मिट्टी के लाल लालू प्रसाद की सत्ता में वापसी का उत्साह है. गांव के बुजुर्ग से लेकर युवाओं के चेहरे पर एक दशक बाद सुकून देखा जा रहा था. उनका चेहरा खिला हुआ था. बुजुर्गों में भी लगता था कि एक नयी जान आ गयी है. युवा जहां पटाखा फोड़ कर जश्न मना रहे थे, वहीं दूसरी तरफ ढोल-नगाड़ों के साथ युवाओं का समूह गांव में घूम-घूम कर खुशी का इजहार कर रहा था. 1990 के दशक से मुख्य केंद्र रहा है फुलवरियाफरवरी, 2005 के चुनाव के दौरान से ही फुलवरिया बिहार की सत्ता से बाहर हो गया था. इसका खामियाजा न सिर्फ राजद सुप्रीमो को भुगतना पड़ा, बल्कि इस गांव को भी कम दुर्दशा का शिकार नहीं होना पड़ा था. 1990 के दशक से बिहार की सत्ता का मुख्य केंद्र फुलवरिया रहा है. तब फुलवरिया में चमचमाती सड़क, प्रखंड कार्यालय, रजिस्ट्री कार्यालय, थाना, डाकघर, पेयजल टंकी, बैंक, हाइस्कूल, तालाब, हेलीपैड बनाये गये. गांव-गांव में पीसीसी सड़क और गली-गली में पेयजल पाइप लाइन बिछायी गयी. लगता था कि फुलवरिया गांव नहीं बल्कि शहर का मॉडल है. डीएम, एसपी से लेकर राज्य के मुख्य सचिव तक यहां दरबार लगाते थे. सत्ता से बेदखल होने के बाद यहां अगर ट्रॉसफॉर्मर जल गया, तो महीनों इंतजार करना पड़ता था. दर्द था बिहार की सत्ता से बेदखल होने कागांव की बात छोड़ दें, परिजनों की बात तक थानेदार और बीडीओ नहीं मानते थे. इसका मलाल लोगों को था. दर्द था बिहार की सत्ता से बेदखल होने का. आज स्थिति उलट गया है. यहां राजद सुप्रीमो का साथ नीतीश कुमार का मिला है. जैसे ही टीवी पर महागंठबंधन की सरकार बनने का रुझान आया, तो परिजन रामानंद यादव, भतीजा सुदीश यादव, उपेंद्र यादव, मिथिलेश यादव, लवकुश यादव, बब्लू यादव, रामाकांत प्रसाद, संजय सिंह अलग-अलग टोली में एक दूसरे को अबीर लगा बधाई देने लगे. युवाओं की एक टोली ने काजीपुर, माड़ीपुर, श्यामपटी सहित कई गांवों में जाकर जश्न मनाया.

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