असहष्णिुता के बहाने एक बड़ी साजिश : डॉ मश्रि
असहिष्णुता के बहाने एक बड़ी साजिश : डाॅ मिश्र पटना . पूर्व मुख्यमंत्री डा. जगन्नाथ मिश्र ने कहा है कि देश मेे हर किसी को विचारों की अभिव्यक्ति ती पूरी छूट है. कुछ समय से दादरी की धटनाओं को लेकर अचानक असष्णिुता का माहौल जंगल की आग की तरह फैला दिया गया है. बुद्धिजीवी होने […]
असहिष्णुता के बहाने एक बड़ी साजिश : डाॅ मिश्र पटना . पूर्व मुख्यमंत्री डा. जगन्नाथ मिश्र ने कहा है कि देश मेे हर किसी को विचारों की अभिव्यक्ति ती पूरी छूट है. कुछ समय से दादरी की धटनाओं को लेकर अचानक असष्णिुता का माहौल जंगल की आग की तरह फैला दिया गया है. बुद्धिजीवी होने केआवरण तले लेखक, साहित्यकार और अन्य कलाकार अचानक यह अनुभव करने लगे कि देश में असहिष्णुता है तो इसका क्या अर्थ निकाला जाये. इतना हीं नहीं इस कड़ी में अगर इतिहासकार और वैज्ञानिक भी शामिल होने लग जाए तो फिर समझ लिया जाना चाहिये कि यह किसी-न-किसी साजिश का हिस्सा है. उन्होंने असहिष्णुता को बनावटी करार देते हुए देश की माहौल को खराब करने वाला बताया. उन्होंने यह भी कहा कि सहिष्णुता देश की आत्मा है और उसे संकट में डालकर सियासी शगुफा देश की आत्मा पर हमला है. सहनशीलता और सहिष्णुता के मुद्दे पर जिस प्रकार की बौद्धिक खेमेबाजी की जा रही है, किसी भी तरह न तो उचित है और न हीं संवैधानिक रूप से न्यायोचित . लालू प्रसाद द्वारा झंझारपुर विधान सभा क्षेत्र के खैरा ग्राम में चुनावी सभा को सम्बोधित करते हुये डाŒ जगन्नाथ मिश्र पर यह आरोप लगाया गया है कि वे भारतीय जनता पार्टी द्वारा व्यक्तिगत रूप से लाभांन्वित हुये हैं। इसलिये वे भाजपा को समर्थन दे रहे हैं। जबकि वास्तविकता यह हे कि श्री लालू प्रसाद और श्री नीतीश कुमार भारतीय जनता पार्टी के प्रत्यक्ष समर्थन से ही मुख्यमंत्री बने। यह स्मरणीय है कि 1990 के विधानसभा चुनाव में जनता दल के केवल 122 सदस्य ही निर्वाचित हुये थे जबकि बहुमत के लिये 165 विधायको का समर्थन आवश्यक था। यह भी स्मरणीय है कि श्री लालू प्रसाद 6 मार्च 1990 जनता दल के नेता निर्वाचित हुये। जनता दल के मुख्यमंत्री–पद के लिये तीन उम्मीदवार थे। श्री लालू प्रसाद चौधरी देवी लाल के उम्मीदवार, श्री रामसुन्दर दास प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह के उम्मीदवार थे। तीनों में मतों के विभाजन के कारण श्री रघुनाथ झा एवं श्री रामसुन्दर दास से लालू प्रसाद को अधिक मत मिले। इसलिये वे नेता निर्वाचित किये गये परन्तु तत्कालीन राज्यपाल श्री युनुस सलीम ने श्री लालू प्रसाद को मुख्यमंत्री पद का शपथ दिलाने में सहमत नही हो रहे थे। उसका स्पष्ट कारण तो यह था कि जनता दल को विधानसभा में बहुमत नही था। वहीं जनता दल के सदस्यों में भी विभाजन था। बहुमत जुटाने के लिये राज्यपाल ने श्री लालू प्रसाद को निर्देशित किया। इस अवस्था में प्रधानमंत्री श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने भारतीय जनता पार्टी के 39 सदस्यों का समर्थन दिलाकर बिहार में जनता दल के श्री लालू प्रसाद मुख्यमंत्री पद पर आसीन कराया। इस तथ्य के आलोक में श्री लालू प्रसाद पूर्णत: भारतीय जनता पार्टी के कारण ही मुख्यमंत्री बने। श्री लालू प्रसाद ने भारतीय जनता पार्टी का समर्थन प्राप्त करनेके लिये एक पृष्ठभूमि उस समय बनायी जब 29 दिसम्बर,1989 को लोक सभा चुनाव में भागलपुर साम्प्रदायिक दंगा के समय में यह आरोप लगाया कि वहां का दंगा पूर्णत: मुसलमानो ने ही शुरू किया। भारतीय जनता पार्टी का समर्थन प्राप्त करने के कारण भी यह एक तथ्य रहा होगा। अगर श्री लालू प्रसाद फिर से भारतीय जनता पार्टी के लिये दृढ़ होते तो भागलपुर दंगा के प्रभावित परिवारों को क्षतिपूर्ति दिलाने में सक्रिय रहे होते। जहांतक आडवाणी जी के रथ रोकने का प्रश्न है उसका तथ्य यह है कि प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने, जिनका विभेद भारतीय जनता पार्टी से हो रहा था, अपनी व्यक्तिगत छवि बनाने के लिये ही मुख्यमंत्री को रथ रोकने का निदेश दिया था। इसलिये एक सोची समझी राजनीति के तहत श्री आडवाणी की गिरफ्तारी की गयी। श्री लालू प्रसाद की धर्म निरपेक्षता और उनके मुसलिम प्रेम का सबूत यही है कि भागलपुर दंगा जांच के लिये गठित जांच आयोग को स्वतंत्र रूप से कार्य नही करने दिया। उन्होंने अपने दो चहेतों को आयोग में सदस्य मनोनीत कर दिया उसके बावजूद भी जांच आयोग ने 29 दिसम्बर,1989 के भाषण को अहमियत दी है। यह भी उल्लेखनीय है कि श्री लालू प्रसाद एवं श्री नीतीश कुमार के पिछले 25 वर्षो में मुसलमानो की 3000 एकड़ जमीन हिन्दुओं द्वारा जबरन ले लिये जाने के बावजूद उनकी सरकारें ने उनकी जमीन (मुसलिमों की) वापस नही करा पायीं और न ही 15000 विस्थापित परिवारों का पुर्नवास ही करा सकी। यह तथ्य श्री नीतीश कुमार द्वारा गठित एन पी सिंह रिर्पोट से भी जाहिर होता है। जहांतक श्री नीतीश कुमार का प्रश्न है श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें केन्द्र में मंत्री बनाया। 2000 में मुख्यमंत्री बनाया फिर 2005 तथा 2010 में राष्ट्रीय गठबंधन में भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया। इसप्रकार यें दोनो महागठबंधन के नेता भारतीय जनता पार्टी के उपज हैं। पूर्णतया निजी स्वार्थ एवं महत्वाकांक्षा के वशीभूत होकर श्री लालू प्रसाद एवं श्री नीतीश कुमार एक साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को विधान सभा चुनाव में चुनौती दे रहे हैं। जहांतक डाŒ मिश्र का सवाल है 2005, 2010 में विधानसभा चुनाव में राजग के श्री नीतीश कुमार को समर्थन दिया था और उन्हें विजयी बनाने में सहयोग दिया था। उन्होने (डाŒ मिश्र बिहार को दिशाहीनता, विकासहीनता, उद्योगविहीनता एवं जंगलराज से मुक्त करने के लिये उन्हें सहयोग समर्थन दिया था। परन्तु बिहार की जनता को उन्होंने जो सुशासन, विकास, रोजगार, औद्योगीकरण का सपना दिखाया था उसे पूर्णत: ध्वस्त करने के लिये यह महागठबंधन बिहार की जनता के साथ छल कर रही है। डाŒ मिश्र कांग्रेस विचारो के रहे और उन्होंने केवल राज्य हित में एवं बिहार की अगली पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य के लिये श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी को समर्थन देने का निर्णय लिया है। भारतीय जन कांग्रेस को 2005 एवं 2010 के चुनावों में निलंबित कर दिया था उसे पुनर्जीवित करते हुये बिहार के विकास के लिये विधान सभा चुनाव में राजग गठबंधन के उम्मीदवारों को समर्थन दे रही है। भारतीय जनता पार्टी का भविष्य महागठगंधन के विरूद्ध अच्छा दिख रहा है।
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