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लालू से मिलने-जुलने वालों का लगा रहा तांता, लेते रहे फीडबैक

6 Nov, 2015 6:33 pm
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लालू से मिलने-जुलने वालों का लगा रहा तांता, लेते रहे फीडबैक

लालू से मिलने-जुलने वालों का लगा रहा तांता, लेते रहे फीडबैकमेटासीन खाकर करते थे आराम, ससुराल से आये असगर ने संभाला बहुत कामसंवाददाता, पटनाचुनाव परिणाम आने के 48 घंटे पहले राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद का शुक्रवार का पूरा दिन 10, सर्कुलर रोड स्थित आवास पर बीता. वे पूरे दिन कार्यकर्ताओं, नेताओं और मीडिया प्रतिनिधियों से […]

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लालू से मिलने-जुलने वालों का लगा रहा तांता, लेते रहे फीडबैकमेटासीन खाकर करते थे आराम, ससुराल से आये असगर ने संभाला बहुत कामसंवाददाता, पटनाचुनाव परिणाम आने के 48 घंटे पहले राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद का शुक्रवार का पूरा दिन 10, सर्कुलर रोड स्थित आवास पर बीता. वे पूरे दिन कार्यकर्ताओं, नेताओं और मीडिया प्रतिनिधियों से मिलते रहे. मिलने वालों से उनके क्षेत्र में हुए मतदान के बारे में जानकारी लेते रहे. जीत के प्रति आश्वस्त लालू प्रसाद किसी-किसी सीट से संबंधित राेचक जानकारी भी देते रहे. इसी बीच, सारण जिला के आमी के सहाय जी यादव और उनके साथ आये आधा दर्जन लोग लालू से मिलने पहुंचे, तो उन्होंने उनके क्षेत्र की जानकारी ली. लालू ने पूछा, वहां कैसा मतदान हुआ? लोगों की भागदारी और बूथों पर भीड़ के बारे में जानकारी ली. बहुत देर सहाय जी से सुनने के बाद उन्हें जाने को कहा. जैसे ही सहाय जी दो कदम आगे बढ़े, तो उन्होंने रोकते हुए उस क्षेत्र के एक सरपंच का हालचाल पूछा. फिर कहा, मंच पर देहल भाषण सुनाव. …और सहाय जी यादव लालू प्रसाद के स्टाइल में पूरा का पूरा भाषण सुना दिया. बीच-बीच में भाषण के कठिन शब्द के उच्चारण को वे ठीक करते रहे. आधी जान तो टिकट चाहने वालों से मिलने में ही चली गयी : पूरे चुनाव में अकेले प्रचार की कमान संभालने के बारे में पूछे जाने पर राजद अध्यक्ष ने कहा कि आधी जान तो टिकट वालों से मिलने में चली गयी. हमारा तीनों नेता चुनाव लड़ने चला गया. अकेले हमें सब काम करना पड़ा. शैलेंद्र सिंह ने समन्वय का काम संभाला. ये ही प्रचार के कार्यक्रम आदि तैयार करते थे. कई और लोगों को लगाया. पूरे दिन हेलिकॉप्टर से दौरा, रोज चार-चार जिलों में सभा को संबोधित करना तो रूटीन बन गयी थी. दिनभर की थकावट और रात के एक बजे तक क्षेत्रों से आये लोगों से मिलने के बाद बिछावन पर जाते थे. मेटासीन दवा खाकर आराम करना पड़ता था. कभी-कभी तो दिन भर खाना तक नहीं खाते थे. बहुत सारा काम मीसा ही संभालती थी. ससुराल से आये आये असगर नामक युवक की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि वही खाना-पानी आदि का ध्यान रखता था. हमने खुद से तैयार किये कई स्लोगनलालू प्रसाद ने बताया कि चुनाव प्रचार के लिए कई स्लोगन उन्होंने खुद ही तैयार किया. गरीबों की दी आवाज तो उसे कहते हो जंगलराज, सहित कई स्लोग की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जंगलराज-जंगलराज कहता था, हमने कह दिया कि हमारे जंगल से भागों नहीं तो भालू से फुंकवा देंगे.

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