शहाबुद्दीन को नहीं मिली राहत, तीन भाइयों की हत्या का मामला

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शहाबुद्दीन को नहीं मिली राहत, तीन भाइयों की हत्या का मामला छठ बाद होगी सुनवाई विधि संवाददाता, पटनापटना हाइकोर्ट ने सीवान के पूर्व सासंद मो शहाबुद्दीन की जमानत याचिका पर कोई फैसला नहीं दिया. इस मामले की सुनवाई अब छठ की छुट्टी के बाद होगी. पूर्व सांसद के खिलाफ सीवान जिले के बड़हरिया गांव के […]

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शहाबुद्दीन को नहीं मिली राहत, तीन भाइयों की हत्या का मामला छठ बाद होगी सुनवाई विधि संवाददाता, पटनापटना हाइकोर्ट ने सीवान के पूर्व सासंद मो शहाबुद्दीन की जमानत याचिका पर कोई फैसला नहीं दिया. इस मामले की सुनवाई अब छठ की छुट्टी के बाद होगी. पूर्व सांसद के खिलाफ सीवान जिले के बड़हरिया गांव के दो युवक गिरीश राज और सतीश राज की तेजाब डाल कर हत्या करने और नमक डाल कर शव को नष्ट करने का आरोप है. इस मामले में एकमात्र गवाह तीसरे भाई राजीव रोशन की भी हत्या कर दी गयी थी. इस हत्या का आरोप शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा पर है. न्यायाधीश हेमंत कुमार श्रीवास्तव ने सुनवाई के दौरान फिलहाल कोई राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि इस प्रकार गवाह की हत्या होगी, तो लोगों का न्यायपालिका पर से भरोसा उठ जायेगा. कोर्ट ने कहा कि इस तरह के लोग किसी भी हाल में बच नहीं पायेंगे. सुनवाई को छठ पूजा की छुट्टी तक टाल दिया गया. शहाबुद्दीन के वकील का कहना था कि गवाह हत्याकांड में पूर्व सांसद का सीधा हाथ होने का आरोप नहीं है. ऐसे में उन्हें जमानत मिलनी चाहिए. इस पर दूसरे पक्ष के वकील ने कहा बड़हरिया गांव के चंद्रशेखर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू के तीन बेटों का पूर्व सांसद ने अपहरण किया था. इनमें से दो सतीश राज और गिरीश राज की तेजाब डाल कर हत्या कर दी गयी, जबकि तीसरा राजीव रोशन किसी तरह जान बचा कर भाग गया. वह इस केस का एकमात्र गवाह था. दोनों की हत्या का आरोप पूर्व सांसद पर है. पिता चंद्रशेखर प्रसाद ने 17 जून, 2014 को प्राथमिकी दर्ज करायी थी, जिसमें शहाबुद्दीन पर हत्या कराने का आरोप लगा. इस बीच राजीव रोशन पर पूर्व सांसद के आदमी अपनी गवाही बदलने का दवाब डाल रहे थे. इसके लिए वह तैयार नहीं था. इसी बीच अपने पिता के साथ कहीं जा रहे राजीव रोशन को गोली मार दी गयी. आरोप शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा पर लगा. पिता चंद्रशेखर प्रसाद ने सीधा आरोप लगाया कि ओसामा ने मेेरे तीसरे बेटे राजीव रोशन की गवाही से ठीक एक दिन पहले उसकी कनपटी पर पिस्तौल सटा कर गोली मार दी, जिससे उसकी मौत हो गयी. वकील का तर्क था कि गवाह की मौत से सीधा लाभ शहाबुद्दीन को हुआ है.

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