गन्ने की खेती ने दिलायी नेशनल अवार्ड
गन्ने की खेती ने दिलायी नेशनल अवार्ड घर की जिम्मेवारी के साथ खेती को बनाया कैरियरगन्ने की खेती और मछली पालन से प्रतिवर्ष 20 लाख की आमदनीतीन दर्जन युवाओं के हाथों में दिया रोजगारफोटो- 1 संवाददाता, सिधवलियागन्ने की खेती ने राजेश कुमार सिंह को नेशनल अवार्ड दिलाया है. गन्ने की ही नहीं बल्कि मछली पालन […]
गन्ने की खेती ने दिलायी नेशनल अवार्ड घर की जिम्मेवारी के साथ खेती को बनाया कैरियरगन्ने की खेती और मछली पालन से प्रतिवर्ष 20 लाख की आमदनीतीन दर्जन युवाओं के हाथों में दिया रोजगारफोटो- 1 संवाददाता, सिधवलियागन्ने की खेती ने राजेश कुमार सिंह को नेशनल अवार्ड दिलाया है. गन्ने की ही नहीं बल्कि मछली पालन के क्षेत्र में भी 12 दिसंबर, 2012 को नेशनल रजत पदक इन्हें प्राप्त हो चुका है. बुलंद हौसला और विपरीत स्थितियों में भी इन्होंने कभी धैर्य नहीं खाेया. जिसके कारण ये अपनी मुकाम हासिल किये. गोपालपुर के रहनेवाले राजेश कुमार सिंह ने 1987 में मैट्रिक की पढ़ाई पूरी. इसके बाद खेती को अपना कैरियर बनाया. पांच एकड़ खेत को तालाब के रूप में परिवर्तित करा दिया. बाकी पांच एकड़ में गन्ने की खेती शुरू की. तालाब में 1990 से मछली पालन कर इलाके में मिसाल बन गये. मछली पालन से पांच से दस लाख रुपये की आमदनी करने लगे. मत्स्य विभाग ने जिले का सबसे बेहतर मछली पालक मानते हुए सरकार को रिपोर्ट भेजी. बाद में नेशनल स्तर पर बिहार से पहला किसान राजेश कुमार सिंह बने, जिन्हें 12 दिसंबर, 12 को रजत पदक का पुरस्कार मिला. ठीक इसी तरह गन्ने की खेती में इन्होंने उत्कृष्ट कार्य किया. गन्ने की उन्नत किस्म की हर बार खेती कर इलाके के किसानों के लिए नजीर बन गये. आज गन्ना और मत्स्य से प्रतिवर्ष 20 लाख की आमदनी कर लेते हैं. गन्ने के क्षेत्र में इन्हें गन्ना अनुसंधान केंद्र लखनऊ नेशनल अवार्ड से नवाज चुका है.अत्याधुनिक खेती में रखते हैं विश्वासराजेश सिंह अत्याधुनिक खेती में विश्वास रखते हैं. हर बार नये सोच के साथ खेती में उतरते हैं. एक बेहतर किसान के रूप में काम करते हुए जिले के किसानों के लिए मिसाल हैं. जिला कृषि पदाधिकारी भी किसानों से उनके उत्कृष्ट कार्य से प्रशिक्षण लेने की सलाह किसानों को देते हैं. उन्होंने इस बार पैडी राइस ऑन प्लांटिंग के जरिये धान की खेती की है. इस अत्याधुनिक मशीन से धान की रोपनी कर श्रीविधि को भी पीछे छोड़ दिया है. राजेश के खेत में धान तैयार हो चुका है. बेटा दिल्ली विवि का बना टॉपरबेटा रौशन कुमार दिल्ली विश्वविद्यालय के देशबंधु कॉलेज से स्नातक विज्ञान में इसी वर्ष 2015 में टॉपर घोषित किया गया है. बेटे को डॉक्टर बनाने का सपना है, जबकि दूसरा बेटा ऋषभ कुमार स्नातक करने के बाद सिपला दवा की कंपनी में जॉब करता है. बेटी इंटर साइंस की छात्रा है, जबकि सबसे छोटा बेटा वर्ग 8 में पढ़ता है. बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए सुबह पांच बजे से रात नौ बजे तक खेत और तालाब में कड़ी मेहनत करते हैं. इलाके के तीन दर्जन युवा इनके रोजगार शामिल भी हैं. नहीं मिली नौकरी, तो शुरू की खेतीराजेश कुमार सिंह ने नौकरी के लिए काफी प्रयास किया. सरकारी नौकरी नहीं मिलने के बाद इनके पिता ने खेती करने के लिए दबाव बनाया. हार कर इन्होंने खेती को ही कैरियर बनाया और देखते-ही- देखते नेशनल अवार्ड तक पहुंच गये. जिला कृषि पदाधिकारी डॉ वेद नारायण सिंह बताते हैं कि राजेश सिंह हर पल नयी तकनीक पर काम करते हैं. नयी तकनीक से ही खेती करते हैं. अगर किसान इनसे सीख लेकर खेती की तरफ बढ़े तो एक बेहतर माहौल बनेगा.
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