प्राचार्य ने रोका था डीइओ की वेतनवृद्धि का भुगतान!

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प्राचार्य ने रोका था डीइओ की वेतनवृद्धि का भुगतान!डीइओ के नियुक्ति पत्र पर प्राचार्य ने 1992 में उठाया था सवाल तब राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, ब्रह्मपुरा में सहायक शिक्षक थे डीइओअवर शिक्षा सेवा में भी इनकों नहीं मिला था वेतन वृद्धि का लाभ प्राचार्य के बार-बार मार्गदर्शन मांगने पर भी विभाग ने साध ली थी […]

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प्राचार्य ने रोका था डीइओ की वेतनवृद्धि का भुगतान!डीइओ के नियुक्ति पत्र पर प्राचार्य ने 1992 में उठाया था सवाल तब राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, ब्रह्मपुरा में सहायक शिक्षक थे डीइओअवर शिक्षा सेवा में भी इनकों नहीं मिला था वेतन वृद्धि का लाभ प्राचार्य के बार-बार मार्गदर्शन मांगने पर भी विभाग ने साध ली थी चुप्पी प्रभात पड़ताल इंट्रो- शिक्षा विभाग के कारनामे भी निराले हैं. एक ऐसा प्रकरण सामने आया है, जिसमें शिक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारी की नियुक्ति पर सवाल उठा है. जिला शिक्षा पदाधिकारी इससे पहले मुजफ्फपुर जिले के ब्रह्मपुरा स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में सहायक शिक्षक थे. 1992 में इनके नियुक्ति पत्र की मांग प्राचार्य ने की थी. 25 अक्तूबर, 2014 तक विभाग को उन्होंने अपना नियुक्ति पत्र उपलब्ध नहीं कराया था. संवाददाता, गोपालगंज डीइओ अशोक कुमार का नियुक्ति पत्र विभाग को उपलब्ध नहीं कराने के कारण उनकी वेतनवृद्धि का लाभ 1985 से लेकर 30 अगस्त, 2013 तक बह्मपुरा जिला स्कूल के प्राचार्य ने नहीं दिया. जब अशोक कुमार डीइओ के रूप में गोपालगंज में पदस्थापित हुए, तो वित्त विभाग वैयक्तिक दावा निर्धारण कोषांग को मैनेज कर वेतनवृद्धि नहीं किये जाने के बाद भी इसका लाभ का पुरजा निर्गत करा कर एक मुस्त 30 लाख 65 हजार 223 रुपये का भुगतान डीपीओ स्थापना के जरिये करा लिया. जब इसकी जानकारी डीपीओ राजकिशोर सिंह को आरटीआइ के जरिये मांगी गयी सूचना पर हुई, तो डीपीओ ने डीइओ से नियुक्ति पत्र की मांग कर डाली. नतीजा हुआ कि डीपीओ को स्थापना कार्य से हटा दिया गया. जिला स्कूल के प्राचार्य के पत्र से हुआ था खुलासा ब्रम्हपुरा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य ने सात नवंबर,1992 को क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक डॉ केशव त्रिपाठी को पत्र लिख कर कहा कि सहायक शिक्षक अशोक कुमार की नियुक्ति राजकीय उच्च विद्यालय, जेठौर भागलपुर में हुई थी. कुछ महीने बाद बिना सूचना दिये अशोक कुमार 15 महीने तक विद्यालय से अनुपस्थित रहे. इसी बीच उन्होंने स्थानांतरित होकर ब्रम्हपुरा मुजफ्फरपुर में योगदान दिया. तब से बार-बार इनसे नियुक्ति पत्र की मांग की गयी. लेकिन, इनके द्वारा अपना नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया. प्राचार्य के पत्र को गंभीरता से लेकर उपनिदेशक डॉ त्रिपाठी ने जांचोपरांत इस आधार पर वेतन का भुगतान जारी रखने का आदेश दिया कि अशोक कुमार नियुक्ति पत्र जमा नहीं करते हैं, तो इनकी नियुक्ति अवैध मानी जायेगी. इनकी चल-अचल संपत्ति से वेतन की राशि वसूल की जायेगी. इसके बाद भी उन्होंने विभाग को अपना नियुक्ति पत्र नहीं दिया. विभाग ने किया था जवाब तलबप्राचार्य ने निदेशक प्रशासन सह संयुक्त सचिव शिक्षा विभाग को लगातार पत्राचार किया. प्राचार्य ने निदेशक को पत्र लिख कर कहा कि वेतनवृद्धि का भुगतान सहायक शिक्षक अशोक कुमार को नहीं हो पा रहा है. मेरे द्वारा समय-समय पर जिला शिक्षा पदाधिकारी, क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक तिरहुत को बार – बार मार्गदर्शन मांगा गया. हर बार आदेश मिलता रहा कि नियुक्ति पत्र जमा नहीं करने पर ली गयी राशि इनकी चल – अचल संपत्ति से वसूल होगी. इस बीच अशोक कुमार के द्वारा वेतनवृद्धि के साथ बकाया राशि के लिए दबाव बनाया जा रहा है. विभाग ने कोई जवाब नहीं दिया. प्राचार्य ने निदेशक को पुन: पत्र लिख कर मार्गदर्शन मांगा. इस पर निदेशक राजेंद्र राम ने सहायक शिक्षक से स्पटीकरण मांगते हुए एक सप्ताह के भीतर नियुक्ति पत्र एवं सेवापुस्त की अभिप्रमाणित छायाप्रति की मांग की, जो विभाग को नहीं मिला. क्या कहते हैं डीइओ शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव ने इस पूरे प्रकरण की जांच कर मेरी नियुक्ति को वैध पाया है. ये तमाम आरोप बेबुनियाद एवं मुझे बदनाम करने की साजिश है.अशोक कुमार, डीइओ, गोपालगंज

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