कहिया ले रही दियारा के लाइफ लाइन नाव
कहिया ले रही दियारा के लाइफ लाइन नाव इन बार भी चुनावी मुद्दा नहीं बना दियारे का विकास 15 फीसदी दियारे की आबादी बिताती है अलग जिंदगीसंवाददाता, गोपालगंजजीना यहां-मरना यहां, इसके सिवा जाना कहां, चुनाव की बात पूछते ही अपनी धुन में दीना सहनी गुनगुने लगते हैं. कहते हैं, चुनाव देखते-देखते तो उम्र के चौथे […]
कहिया ले रही दियारा के लाइफ लाइन नाव इन बार भी चुनावी मुद्दा नहीं बना दियारे का विकास 15 फीसदी दियारे की आबादी बिताती है अलग जिंदगीसंवाददाता, गोपालगंजजीना यहां-मरना यहां, इसके सिवा जाना कहां, चुनाव की बात पूछते ही अपनी धुन में दीना सहनी गुनगुने लगते हैं. कहते हैं, चुनाव देखते-देखते तो उम्र के चौथे पड़ाव में पहुंच गया, लेकिन वोट लेने के सिवा यहां कोई काम नहीं हुआ है. हम लोगों के विकास के बारे में सोचता कौन है. जी हां, हम बात कर रहे हैं दियारा इलाके की, जहां चुनावी बयार तो बह रही है, लेकिन विकास नहीं होने की बेबसी का दर्द सबके माथे पर है. सदियों से यहां की लाइफ लाइन नाव है. इससे कब छुटकारा मिलेगा इसके बारे में कहना मुश्किल है. गोपालगंज जिले के छह विधानसभा क्षेत्रों के कुल ढाई सौ गांव और तीन लाख से अधिक की आबादी दियारे में निवास करती है. चुनाव-दर-चुनाव बीतता गया, लेकिन इनकी स्थिति आज भी वही है, जो सौ वर्ष पहले थी. पानी, सड़क, बिजली, स्वास्थ्य सुविधाओं से दियारे का इलाका आज भी वंचित है. इनकी जिंदगी नाव से शुरू होकर नाव पर ही खत्म हो जाती है. प्रत्याशियों के पास नहीं है मुद्दाप्रत्याशी दियारे के गांवों में घूम-घूम कर वोट मांग रहे हैं. इनकी समस्याओं से निबटने और इनके विकास का मुद्दा किसी के पास नहीं है. उत्तर प्रदेश की सीमा अहिरौली से लेकर प्यारेपुर तक 125 किलोमीटर ये आबादी हमेशा से अलग जिंदगी बिताती रही है. दियारे के विकास के लिए दियारा संघर्ष समिति ने कई बार आंदोलन भी किया, लेकिन इनकी स्थिति नहीं बदली. चुनाव का नाम सुनते ही दियारावासी सहसा कह उठते हैं, वोट के बाद दियारा याद किसे. क्या होनी चाहिए सुविधाएंआवागमन के लिए हो सड़कों की व्यवस्था इलाज के लिए स्वास्थ्य केंद्र खोला जाना नदी में मोटर बोट की हो व्यवस्था बाढ़ से निजात दिलाने का हो ठोस उपाय सभी गांवों को बिजली से जोड़ा जायेएक नजर में दियारा इलाका कुल गांव – 250 आबादी – 3 लाख स्वास्थ्य केंद्र – 00बिजली की सुविधा – 10 फीसदी गांव में प्रतिवर्ष गंडक द्वारा मचायी जा रही तबाही
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