सांप काटने के बाद झाड़-फूंक कराती रही महिला, समय पर इलाज नहीं मिलने से चली गई जान

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प्रतीकात्मक फोटो.

Snake Bite: सोनभद्र में सर्पदंश की शिकार एक महिला की समय पर इलाज न मिलने और झाड़-फूंक पर भरोसा करने से मौत हो गई. घटना ने ग्रामीण इलाकों में फैले अंधविश्वास और स्वास्थ्य जागरूकता की कमी को उजागर किया है. विशेषज्ञों ने सर्पदंश में तुरंत अस्पताल पहुंचाने की अपील दोहराई है.

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गढ़वा से प्रभाष मिश्रा की रिपोर्ट

Snake Bite: सांप काटने के बाद समय पर चिकित्सकीय उपचार नहीं मिलने और अंधविश्वास के कारण झाड़-फूंक का सहारा लेना एक महिला के लिए जानलेवा साबित हुआ. झारखंड से सटे उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में सर्पदंश की शिकार एक महिला की इलाज में देरी होने के कारण मौत हो गई. घटना सोनभद्र जिले के कौण थाना क्षेत्र के कचनारवा गांव (रोहिनमा दामर टोला) की है. मृतका की पहचान शिवदास की पत्नी तेतरी देवी (47 वर्ष) के रूप में हुई है. घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.

खेत से पानी भरकर लौटते समय सांप ने काटा

परिजनों के अनुसार गुरुवार रात करीब आठ बजे तेतरी देवी घर से कुछ दूरी पर स्थित खेत में लगे बोरिंग से पीने का पानी भरने गई थीं. पानी लेकर वापस लौटते समय खेत की मेड़ पर पहले से मौजूद एक जहरीले सांप ने उनके दाहिने पैर में काट लिया. महिला ने शोर मचाया तो आसपास के लोग और परिजन मौके पर पहुंचे. शुरुआत में सभी घबरा गए, लेकिन अस्पताल ले जाने के बजाय अंधविश्वास के कारण दूसरा रास्ता चुन लिया.

अस्पताल के बजाय ओझा-गुणी के पास ले गए परिजन

सांप काटने की जानकारी मिलने के बाद परिजन महिला को तुरंत अस्पताल नहीं ले गए. इसके बजाय वे उन्हें झाड़-फूंक कराने के लिए एक ओझा-गुणी के पास ले गए. वहां कथित रूप से झाड़-फूंक की गई और कुछ देर बाद महिला को वापस घर ले आया गया. इस दौरान महिला की हालत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन चिकित्सकीय उपचार शुरू नहीं कराया गया. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सर्पदंश के मामलों में शुरुआती कुछ घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं. यदि इसी समय मरीज को उचित इलाज और एंटी-स्नेक वेनम मिल जाए तो अधिकांश मामलों में जान बचाई जा सकती है. लेकिन इस मामले में अंधविश्वास के कारण बहुमूल्य समय नष्ट हो गया.

तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल पहुंचे, लेकिन हो चुकी थी देर

शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे तेतरी देवी की तबीयत अचानक गंभीर हो गई. उनके शरीर में जहर फैलने के स्पष्ट लक्षण दिखाई देने लगे. स्थिति बिगड़ती देख परिजन आनन-फानन में उन्हें इलाज के लिए गढ़वा सदर अस्पताल लेकर पहुंचे. अस्पताल में मौजूद चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया. डॉक्टरों के अनुसार महिला को अस्पताल पहुंचाने में काफी देर हो चुकी थी, जिससे उनकी जान नहीं बचाई जा सकी. इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि सर्पदंश के मामलों में देरी और अंधविश्वास जानलेवा साबित हो सकते हैं.

पुलिस ने कराया पोस्टमार्टम, जांच शुरू

घटना की सूचना मिलने के बाद गढ़वा पुलिस सदर अस्पताल पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया. कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया. पुलिस मामले से संबंधित आवश्यक कार्रवाई कर रही है. घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है और लोग इस दुखद घटना को लेकर चर्चा कर रहे हैं.

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

गढ़वा जिला महामारी विशेषज्ञ डॉ संतोष मिश्रा ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए लोगों से अंधविश्वास से दूर रहने की अपील की है. उन्होंने कहा कि सांप काटने के बाद झाड़-फूंक, ओझा-गुणी या किसी भी तरह के घरेलू उपचार पर भरोसा करना बेहद खतरनाक हो सकता है. इससे इलाज में देरी होती है और मरीज की जान खतरे में पड़ जाती है. उन्होंने कहा कि सर्पदंश होने पर पीड़ित को बिना समय गंवाए नजदीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र ले जाना चाहिए, जहां एंटी-स्नेक वेनम की सुविधा उपलब्ध रहती है. समय पर सही इलाज मिलने से अधिकांश मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं.

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जागरूकता ही बचा सकती है जिंदगी

स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रहा है कि सांप काटने की स्थिति में किसी भी प्रकार के अंधविश्वास में न पड़ें. विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी झाड़-फूंक और टोना-टोटका जैसी मान्यताओं के कारण कई लोग समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते, जिससे अनावश्यक मौतें होती हैं. डॉ संतोष मिश्रा ने लोगों से अपील की कि यदि किसी व्यक्ति को सांप काट ले तो घबराने के बजाय शांत रहें, मरीज को सुरक्षित स्थान पर रखें और तुरंत अस्पताल पहुंचाएं. उन्होंने कहा कि अंधविश्वास कभी इलाज का विकल्प नहीं हो सकता. सही समय पर चिकित्सकीय उपचार ही सर्पदंश से पीड़ित व्यक्ति की जान बचा सकता है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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