यहां लाशों के साथ दफन हो जाता है मौत का राज

Updated:
विज्ञापन

गोपालगंज : शीना बोरा हत्याकांड तीन साल बाद अब खुला है. इस हत्याकांड में सनसनीखेज खुलासे ने सबको चौंका दिया है. लावारिस लाश मिलने के बाद जिले की पुलिस अपना फर्ज ठीक से निभाती, तो शायद हत्यारे सजा पा चुके होते. गोपालगंज में लावारिस शव के साथ मौत का राज भी दफन हो जाता है. […]

विज्ञापन
गोपालगंज : शीना बोरा हत्याकांड तीन साल बाद अब खुला है. इस हत्याकांड में सनसनीखेज खुलासे ने सबको चौंका दिया है. लावारिस लाश मिलने के बाद जिले की पुलिस अपना फर्ज ठीक से निभाती, तो शायद हत्यारे सजा पा चुके होते. गोपालगंज में लावारिस शव के साथ मौत का राज भी दफन हो जाता है.
सड़क और रेलवे ट्रैक के किनारे से बरामद युवतियों के शवों को लावारिस मान कर अंतिम संस्कार कर दिया जाता है. इनके अपनों को खोजने की भाग-दौड़ भी तीन-चार दिन ही चलती है. कहने को तो एफएसएल जांच करायी जाती है, पर रिपोर्ट आने में दो-तीन साल लग जाते हैं. ऐसे में मामला मर्डर का ही क्यों न हो, वह भी लावारिस लाश के साथ दफन हो जाता है. वर्ष 2014 में 13 तथा इस वर्ष अब तक पांच शव बरामद हो चुके हैं. उचित जांच नहीं होने के कारण हत्याओं का राज आज तक नहीं खुल सका.
लावारिस शवों का डीएनए टेस्ट तक नहीं : कहने को तो लावारिस शवों का कुछ हिस्सा (बाल, दांत या हड्डी) पुलिस डीएनए टेस्ट के लिए रखती है, लेकिन इस सैंपल्स के मालखाने में पड़े-पड़े सालों निकल जाते हैं, लेकिन टेस्ट नहीं करायी जाती.
पोस्टमार्टम, लेकिन न जांच न कार्रवाई : लावारिस शवों का पोस्टमार्टम तो होता है, लेकिन रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं होती है. सार्वजनिक स्थान तो दूर थाने के नोटिस बोर्ड से भी लावारिस मृतक की तसवीर एक महीने बाद हटा दी जाती है.
एफएसएल रिपोर्ट का वर्षों तक इंतजार : पुलिस को मिलनेवाली कई लाशें मर्डर केस होती हैं. गला दबाने, हथियार के निशान बॉडी पर होते हैं. एफएसएल जांच पुलिस कराती तो है, लेकिन पड़ोसी ही इतनी की एक रिपोर्ट आने में ही 2-3 साल निकल जाते हैं.
अज्ञात शव की बरामदगी के बाद पुलिस हर स्तर पर पड़ताल करती है. पड़ताल में जो बातें सामने आती हैं, उसी के आधार पर जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता है. पुलिस की कोशिश रहती है कि हर मामले का उद्भेदन हो जाये. कुछ ऐसे भी मामले हैं जो बाहर से हत्या कर शव को यहां फेंक दिया जाता है.
नरेश चंद्र मिश्र, डीएसपी मुख्यालय
केस – 1
साल भर पहले हत्या,आज तक पहचान नहीं
हथुआ-फुलवरिया रेलखंड पर रेलवे ट्रैक के पास सेलार रेलवे स्टेशन के समीप 25 वर्षीया युवती का शव सात अगस्त, 2014 को बरामद हुआ. चलती ट्रेन में गैंगरेप के बाद युवती को फेंक दिया गया था. शरीर पर कई चोटें के निशान पाये गये. पुलिस आज तक युवती का नाम भी नहीं पता कर सकी.
केस-2
छह माह पहले मर्डर, परिजन को भी नहीं ढूंढ़ पायी पुलिस
हथुआ रेलवे स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक के समीप एक 28 वर्षीया युवती का शव बरामद हुआ.उसकी संभवत: गला दबा कर हत्या की गयी थी. पूरे दिन जीआरपी और मीरगंज थाने के चक्कर में शव पड़ा रहा. शव को बाद में मीरगंज पुलिस ने बरामद किया. आज तक युवती के परिजनों को भी पुलिस ढूंढ़ नहीं पायी. ये केस महज बानगी है. कई और लावारिस लाशें मिलती है, लेकिन सच्चाई उनकी अंतेष्टि के साथ ही खत्म हो जाती है.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन