गोपालगंज परिजनों ने सिसकियों में गुजारी दूसरी रात
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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गोपालगंज :देवघर से पूजा कर वापस लौटने के दौरान कोडरमा घाटी में हुए हादसे के दौरान मरनेवालों की संख्या बढ़ कर सात हो गयी है. इनमें दो लोगों की पहचान अब तक नहीं हो सकी है. परिजन शव लेने के लिए कोडरमा और राची के रिम्स अस्पताल पहुंच चुके हैं. इधर, परिजनों की दूसरी रात […]
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गोपालगंज :देवघर से पूजा कर वापस लौटने के दौरान कोडरमा घाटी में हुए हादसे के दौरान मरनेवालों की संख्या बढ़ कर सात हो गयी है. इनमें दो लोगों की पहचान अब तक नहीं हो सकी है. परिजन शव लेने के लिए कोडरमा और राची के रिम्स अस्पताल पहुंच चुके हैं. इधर, परिजनों की दूसरी रात भी सिसकियों में गुजरी. गांव में सन्नाटा पसरा है. घरों में चूल्हे नहीं जले. लोग शवों के आने का इंतजार कर रहे हैं.
41 कांवरिये गये थे देवघर
उचकागांव थाने के मथौली, पांडेय मथौली तथा बिरवट बाजार के 41 कांवरिये सात अगस्त को सिटी राइड बस (बीआर 28 ए 4380) से देवघर बाबा के दरबार गये थे. बुधवार की शाम 4 बजे राजगीर जाने के दौरान कोडरमा घाटी की मेघा तारी गांव के समीप तीखे मोड़ पर ट्रक और सिटी राइड बस की सीधे भिड़ंत हो गयी, जिसमें तीन कांविरयों लालजी राम, अजीत कुमार व जगदीश राजभर की मौत मौके पर ही हो गयी. शेष सभी गंभीर रूप से घायल हो गये. इनमें से आठ की स्थिति की नाजुक बनी हुई थी.
इलाज के दौरान बिरवट बाजार की नयन देवी तथा मथौली खास के जगदीश राजभर समेत पांच लोगों की मौत हो गयी. दो लोगों की पहचान नहीं हो सकी है. घायल गणोश यादव, कन्हैया लाल साव, अरु ण चालक, छोटे लाल यादव, राजकुमार साह, सहोदरा देवी, लालमुनी देवी, फुलमती देवी, रंभा देवी, शांति देवी, मुसम्मात रूखी देवी, हरेंद्र राम, चंद्रावती देवी, कपिलदेव यादव, पप्पू यादव, पूनम देवी, मनीष कुमार, कमलेश यादव, छोटे लाल यादव, तेतरी देवी, इंदू देवी, अल्का कुमारी गंभीर रूप से घायल हैं. सभी घायलों को कोडरमा सदर अस्पताल में भरती कराया गया, जहां से आठ लोगों की हालत गंभीर देखते हुए राची के रिम्स अस्पताल में रेफर कर दिया गया. बस पर मथौली गांव के 36 लोग सवार थे. इनमें से कुछ सीवान के भी थे, जो मथौली से ही बाबाधाम गयेथे.
बोलबम से राम नाम सत्य है तक का हुआ सफर
गोपालगंज. पिछले शुक्रवार को जब बिरवट बाजार से 45 कांवरियों ने बैजनाथ धाम की यात्रा शुरू की, तो इन्हें छोड़ने के लिए इनके परिजन आये थे. सभी की आंखों में खुशी थी. सभी में उम्मीदें थीं भोले नाथ हमलोगों की मनोकामना पूरी करेंगे. बस खुलने के पहले बच्चों ने भी सामान खरीद कर लाने को कह दिये. बोलबम के नारे से इन लोगों ने अपनी यात्रा शुरू की, तो जश्न और उत्साह के बीच किसी ने सोचा भी नहीं था कि जिस घर में एक सप्ताह पूर्व बोलबम का नारा गूंजा, वहां राम नाम सत्य है कि आवाज गूंजेगी. यहां लोगों को शव का इंतजार है. शव आते ही यहां से पांच अरथियां एक साथ उठेंगी और कारुणिक दृश्य एक ऐसे सफर की ओर चलेगा, जहां से सब कुछ इतिहास बन जायेगा. हर परिवार यहां प्रसाद के साथ अपनों का इंतजार कर रहा था, लेकिन यहां प्रसाद नहीं गांव में मौत का पैगाम पहुंचा.
सबने कहा,अब कोई नहीं जायेगा देवघर
मथौली वासियों में भक्ति का विश्वास टूट चुका है. सभी के मन में क्षोभ है. पूजा करने ही तो गये थे, आखिर फिर यह अनहोनी क्यों हो गयी. आखिर बाबा ने दया क्यों नहीं किया. चीत्कार के बीच गूंजती आवाज से लोगों की आंखों से आंसू झलक जा रहे थे. कह रहे थे कि अब देवघर नहीं जायेंगे.
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