पेड़ के नीचे कट रही कटावपीड़ितों की जिंदगी
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
Updated:
विज्ञापन
गोपालगंज : नारायणी नदी ने अमीरी-गरीबी के भेद को मिटा दिया है. लोग दाने-दाने को मुहताज हो गये हैं. पीड़ितों का दर्द प्रशासन को सुनाई नहीं दे रहा है. यहां खुले आकाश के नीचे 127 परिवार रह रहे हैं. सिर छुपाने के लिए एक अदद पॉलीथिन भी नहीं मिला है. पेड़ के नीचे दिन और […]
विज्ञापन
गोपालगंज : नारायणी नदी ने अमीरी-गरीबी के भेद को मिटा दिया है. लोग दाने-दाने को मुहताज हो गये हैं. पीड़ितों का दर्द प्रशासन को सुनाई नहीं दे रहा है.
यहां खुले आकाश के नीचे 127 परिवार रह रहे हैं. सिर छुपाने के लिए एक अदद पॉलीथिन भी नहीं मिला है. पेड़ के नीचे दिन और ऊंचे स्थल पर रात कट रही है.
घर नदी में समा चुके हं. जमीन पहले ही नदी के आगोश में चली गयी. कटावपीड़ित परिवार कहां शरण लें इसकी चिंता उन्हें सता रही है.
छोटे-छोटे बच्चे, भूख और प्यास से बिलबिला रहे हैं. कल तक जो दूसरे को सहारा देते थे आज सगे-संबंधी के सहारे की उम्मीद में टकटकी लगाये हुए हैं.
नदी के किनारे पेड़ के नीचे कलावती देवी, रामपती देवी, शारदा देवी, बिमला देवी अपने बच्चों के साथ इस उम्मीद में बैठी हैं कि कोई खाने-पीने का सामान लेकर आयेगा. इनके घरनदी में समा चुके हैं.
वहीं दूसरी तरफ जगीरी टोला स्कूल तथा पंचायत भवन पर तेजी से कटाव हो रहा है.गांव को बचाने के लिए बाढ़ नियंत्रण विभाग यहां अब तक 9 लाख से अधिक की राशि पानी में बहा चुका है.
फिर भी खाप टोला को नहीं बचाया जा सका है. जगीरी टोले के इस सरकारी भवन को बचाने के लिए भी बाढ़ नियंत्रण विभाग के अभियंता जुटे हैं.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन










