गोपालगंज. रमजान के महीने का आज चौथा दिन है. रोजे के दौरान इनसान केवल खुदा की इबादत में मशगूल रहता है. इस महीने खुद को नेकी से जोड़ने तथा बुराइयों से दूर रहें. जामा मसजिद के इमाम शौकत फहमी बताते हैं कि रमजान साल के 12 महीनों में सबसे मुबारक महीना होता है. इस महीने में नेकी का सबाब अन्य दिनों के मुकाबले 7 सौ गुना बढ़ जाता है. उन्होंने कहा कि रोजेदारों को गरमी के कारण थोड़ी दिक्कत महसूस होती है. लेकिन, इसमें भी एक खास मजे का एहसास होता है, जो मालिक से लौ लगा कर इबादत करते हैं उनका कष्ट की ओर ध्यान नहीं जाता, बल्कि रोजा रखने की तमन्ना और मजबूत होती है. उन्होंने कहा कि यह सब्र का महीना है और सब्र का बदला जन्नत होता है. यह गमखारी का महीना होता है, जिसमें दूसरों के साथ हमदर्दी, खैरखाही, तथा प्यार- मुहब्बत के साथ पेश आना चाहिए. रोजा का मतलब होता है ‘रोकना’. न केवल खुद को भूखा-प्यास से रोकना, बल्कि झूठ, गीबत (बुराई), कीना, हसद, बुरी निगाह, गुनाह, धोखा आदि से खुद को दूर रखना. इस माह यतीमों, बेवाओं तथा गरीब व बेसहरा लोगों की मदद की जानी चाहिए. जुल्म व सितम से दूर रह कर तमाम जीव-जंतुओं) के साथ रहम, हमदर्दी व आदर से पेश आना चाहिए.
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बुराइयों से रोकता है रोजा : इमाम
गोपालगंज. रमजान के महीने का आज चौथा दिन है. रोजे के दौरान इनसान केवल खुदा की इबादत में मशगूल रहता है. इस महीने खुद को नेकी से जोड़ने तथा बुराइयों से दूर रहें. जामा मसजिद के इमाम शौकत फहमी बताते हैं कि रमजान साल के 12 महीनों में सबसे मुबारक महीना होता है. इस महीने […]
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Prabhat Khabar Digital Desk
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