छठ पूजा : मुस्लिम घरों से लेकर जेल तक गूंज रहे छठ के गीत, ...जानें कहां मुसलिम महिलाएं गा रहीं छठ के गीत, देखें वीडियो
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 12 Nov 2018 12:29 PM
गोपालगंज : मुस्लिम घरों में भी छठ के गीत गूंज रहे हैं. जानकर हैरत होगी कि मुस्लिम महिलाएं ईद-बकरीद की भांति ही भक्ति और श्रद्धा से छठ मनाती हैं. बरौली के भड़कुईया तिवारी टोला गांव की रसूलन बीबी और उसकी बहू नूरजहां खातून आजकल छठ पूजा की तैयारियों में लीन हैं. वे आस्था के महापर्व […]
गोपालगंज : मुस्लिम घरों में भी छठ के गीत गूंज रहे हैं. जानकर हैरत होगी कि मुस्लिम महिलाएं ईद-बकरीद की भांति ही भक्ति और श्रद्धा से छठ मनाती हैं. बरौली के भड़कुईया तिवारी टोला गांव की रसूलन बीबी और उसकी बहू नूरजहां खातून आजकल छठ पूजा की तैयारियों में लीन हैं. वे आस्था के महापर्व छठ में ठेकुआ बनाने के लिए गेहूं की सफाई कर रही हैं. भड़कुईयां तिवारी टोला में कई मुस्लिम परिवार छठ पर्व आस्था, भक्ति और पाकिजगी के साथ करते रहे हैं.
रसूलन बताती हैं कि उन्होंने करीब 15 वर्ष पहले छठ पर्व करने की शुरुआत की थी, लेकिन बीच में तीन वर्षों के लिए छूट गया. फिर मन्नत मांगी और उनकी फरियाद छठी माई ने सुन ली, तब से वह इस पर्व को लगातार करते आ रही हैं. बेटे की शादी हुई तो कुछ दिनों बाद बहू ने भी छठ करना शुरू कर दिया. रसूलन की बहू नूरजहां खातून का कहना है कि उसने भी बेटे के लिए मन्नत मांगी, जो छठ माई ने कबूल कर ली और उन्होंने छठ करना शुरू कर दिया. सास-बहू पूरी श्रद्धा और लगन के साथ पर्व की तैयारियों में लगी हैं. इसके लिए उन्होंने घर की साफ-सफाई कर ली है तथा ठेकुआ आदि बनाने के लिए गेहूं सूखा कर तैयारी करने में लगी हैं.
रसूलन ने कहा कि जब उन्होंने छठ करना शुरू किया, तो उसके मायके के लोगों ने विरोध किया था, लेकिन उनको बताया कि हिंदू भी रोजा रखते हैं. ईद-बकरीद में हमारे साथ रहते हैं, तो हम छठ क्यों नहीं करें, जबकि इसी छठ माता की कृपा से मेरी मुरादें पूरी हुई हैं. आस्था का यह पर्व करनेवाली अकेले रसुलन और नूरजहां ही नहीं, बल्कि जिले की पांच सौ से अधिक मुस्लिम घरों में छठ होता है और छठी मइया के गीत गूंज रहे हैं.
वहीं, थावेप्रखंड की लक्षवार पंचायत के चनावे गांव में राजा हुसेन की पत्नी शाहजहां खातून पिछले 15 वर्षों से छठ पर्व कर रही हैं. रेयाज के पैदा होने पर छठ करना शुरू कर दिया था. आज रेयाज 18 वर्ष का हो गया है, जो मुखीराम हाई स्कूल में वर्ग दसवीं का छात्र है. शाहजहां हर साल चौबीस कोशी भरती हैं. गेहूं के सुखाने के साथ ही मिट्टी का चूल्हा भी बनाया है, जिस पर खरना का प्रसाद बनाया जायेगा. वहीं, इसी गांव के हसमुदिन अंसारी के पत्नी खातून नेशा ने बताया कि हमें बेटा नहीं था, तो छठ मइया से कहा, ‘हमरा के बेटा देबू त, हम छठ करब’. एक साल में ही छठ मइया की कृपा से बेटा अरमान अंसारी का जन्म हुआ, जो पांच वर्ष का हो गया है, तब से छठ व्रत करती हूं. छठ पर्व को लेकर मुसलमान परिवारों में भी काफी उत्साह है.
चनावे जेल में भी गूंज रहे छठी मइया के गीत
छठ के गीतों से ना सिर्फ शहर और गांव की गलियां गूंजायमान हो रही हैं, बल्कि चनावे स्थित गोपालगंज मंडल कारा में भी छठी मइया के गीत गूंज रहे हैं. मंडलकारा में 30 कैदी सूर्योपासना का यह व्रत कर रहे हैं, जिसमें 10 महिला व्रती शामिल हैं. विधि-विधान के साथ व्रत करने से लेकर पूजा सामग्री तक की व्यवस्था जेल प्रशासन उपलब्ध करा रहा है. छठ के गीत ने जेल के माहौल को बदल दिया है. यहां वैसे 18 कैदी व्रत रखने की तैयारी में हैं, जो संगीन अपराध में बंद है. सूर्य उपासना की इस महाव्रत से अपने जीवन में आयी संकट को दूर करने एवं बाहर निकल कर समाज में एक सभ्य और जिम्मेदार नागरिक बनने की संकल्प के साथ आराधना में जुटे हुए हैं. जेल अधीक्षक संदीप कुमार ने बताया कि जेल मैनुअल के अनुरूप छठ व्रत करनेवाले कैदियों को प्रसाद तथा छठ पूजा की सामग्री उपलब्ध करायी जायेगी. जेल के अंदर एक छोटा सा छठ घाट बनाया गया है, जहां व्रती कैदी सूर्य को अर्घ देंगे. कैदियों को शॉल कपड़ा आदि भी जेल की तरफ से दिया जायेगा. जेल में बंद सभी कैदियों के बीच छठ पूजा का प्रसाद वितरण किया जायेगा.
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